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Exclusive: यहां लोग तोहफे में देते हैं अपनों को 'कफन', खुशी से करते हैं कबूल

Thu, 19 Aug 2021 03:04 PM IST
vivek shukla रबींद्र कुमार गुप्ता, सिद्धार्थनगर।
रबींद्र कुमार गुप्ता, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 19 Aug 2021 03:04 PM IST
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people give Kafan to their loved ones as gifts in siddharthnagar
कफन। - फोटो : अमर उजाला।

सिद्धार्थनगर जिले के हल्लौर गांव की परंपरा विचित्र है। यहां तो लोग जीते जी अपने व परिवार के लिए कफन खरीद कर रख लेते हैं। साथ ही दोस्तों, रिश्तेदारों को भी तोहफे में कफन देते हैं और सभी इसे खुशी-खुशी कबूल भी करते हैं। शिया समुदाय में सौ फीसदी न सही, पर अधिकांश परिवार ऐसे जरूर मिल जाएंगे, जिन्होंने जिंदा रहते ही अपने लिए कफन खरीद कर रख लिया है।



दरअसल यह कफन होता तो आम ही की तरह, पर इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा के नवासे हजरत इमाम हुसैन की पाक सरजमीन कर्बला से आने की वजह से खास हो जाता है। हल्लौर निवासी डॉ. तनवीर रिजवी, गुलाम कम्बर, कैसर अहमद, अनवार मेंहदी, वजीहुल हसन, ताकीब रिजवी, नफीस हैदर, शादाब हुसैन, जमाल हैदर, फजल अब्बास, हबीबुल हसन, शफीक रजा, आरजू अहमद जैसे न जाने कितने लोग हैं, जिन्होंने कफन मंगाकर रख लिया है।

people give Kafan to their loved ones as gifts in siddharthnagar
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

इनका मानना है कि उनका कफन ऐसी मुकद्दस सरजीमन से आया, जहां इमाम हुसैन ने इस्लाम की खातिर अपनी जान की कुर्बानी दी थी। वह कहते हैं कि हम लोग भी हर वक्त कफन साथ रख कर तैयार रहते हैं। जब भी इस्लाम को जरूरत होगी, वह पीछे नहीं हटेंगे। ऐसा नहीं है कि बुजुर्ग ही अपने लिए कफन खरीद कर लाते हैं। युवा भी इसे खरीद कर रखने में पीछे नहीं हैं। कई युवा ऐसे हैं, जिन्होंने भी अपने लिए कफन मंगा कर रख लिया है।

 

people give Kafan to their loved ones as gifts in siddharthnagar
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

खुशी से कबूल करते हैं कफन का तोहफा
अमूमन लोग रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले सामान का तोहफा देते हैं, लेकिन शिया समुदाय के लोग कर्बला से लाए गए कफन को अपने करीबियों को तोहफे में देते हैं, जिसे लोग खुशी-खुशी कबूल करते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं, जो फरमाइश कर कफन मंगाते हैं।

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people give Kafan to their loved ones as gifts in siddharthnagar
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

कफन पर लिखा होता है अल्लाह का कलाम
कर्बला से लाए गए कफन पर दुआएं लिखी होती हैं। भारत में बिकने वाले कफन बिल्कुल कोरे होते हैं। दुआओं के लिखे होने से लोगों का मानना है कि इससे कब्र के अजाब से निजात तो मिलती ही है, जन्नत भी नसीब होती है।

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

महिलाओं को 16 और पुरुषों को लगता है 15 मीटर कफन
महिलाओं के लिए 16 और पुरुषों के लिए 15 मीटर का कफन लगता है। जियारत कर लौटने वाले लोग कर्बला से लाए गए कफन को उन लोगों को प्रसाद स्वरूप दे देते हैं, जिनके पास कर्बला का कफन नहीं होता है या जो कभी कर्बला जा नहीं पाते हैं।

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