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Bus Accident: सीट की पर्ची में जो पास वो जिंदगी हारे... फेल हुए वे जिंदा; सबकी जुबां पर जीत-हार की कहानी
Sun, 25 Aug 2024 11:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 25 Aug 2024 11:50 AM IST
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Nepal Bus Accident
- फोटो : अमर उजाला
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महाराष्ट्र के जलगांव जिले के भुसावल नगर से 90 सदस्यीय टीम पर्यटन पर निकली थी। यह टीम 17 अगस्त को प्रयागराज पहुंची। टीम लीडर चारू बोंडे द्वारा ऑनलाइन केसरवानी ट्रेवल्स की दो बसें और एक ट्रेवलर बुक कराई गई। तीनों गाड़ियां तय समय पर प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर मिलीं। वहां पर चारू ने 90 सदस्यीय टीम की नंबरिंग की, जिसके आधार अलग-अलग बसों में लोगों को बैठाया गया। पर्ची निकालकर तय हुई नंबरिंग में जो पास हुए वे नेपाल हादसे वाली आकर्षक बस में बैठे और नदी में समा गए। वहीं जो फेल हुए, वे दूसरी साधारण बस-ट्रेवलर में बैठाए गए और सुरक्षित बच गए। सबकी जुबां पर अब सीट नंबरिंग के साथ मौत से जीत-हार की कहानी है।
Nepal Bus Accident
- फोटो : PTI
गोरखपुर में देर रात को पहुंचे दल में लीडर चारू ने बताया कि हर साल हम लोग कहीं ना कहीं घूमने जाते हैं। इस बार अयोध्या और नेपाल घूमने का प्लान बनाकर 16 अगस्त को निकले थे। प्रयागराज से बस बुक की थी। 17 अगस्त की सुबह हम लोग प्रयागराज पहुंचे थे। जिस बस से हादसा हुआ, वह हर किसी को पसंद आ रही थी।
road accident
- फोटो : अमर उजाला
सभी उसमें सवारी चाहते थे। इसीलिए पर्ची निकालकर बस तय की गई। इसमे पास होने वाले 41 लोगों को उस बस में भेजा गया, जो सबको पसंद थी। तब ये किसी को नहीं पता था कि उस बस में मौत बैठी है। बाकी बस और ट्रैवलर वाले बच गए। चारू ने बताया कि 15 दिन की यात्रा पर निकले थे, लेकिन यह जिंदगी भर का दर्द दे गया।
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road accident
- फोटो : अमर उजाला
भुसावल के अशोक पाटिल ने बताया कि पिछले साल यही टीम केदारनाथ गई थी। इस बार अयोध्या और नेपाल में पशुपतिनाथ के दर्शन करने का प्लान बनाकर निकले थे। घूमने निकले लोगों के साथ बच्चे नहीं आए थे। केवल एक चार साल की छोटी बच्ची अपनी दादी के साथ आई थी, जिसकी मौत हो गई। छोटी को अपने पास बैठाने के लिए हर कोई जिद कर रहा था, लेकिन वह भी हादसे वाली बस में ही बैठी।
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Nepal Bus Accident
- फोटो : अमर उजाला
देखते-देखते बस फिसलकर खाई में चली गई
इस हादसे को भुसावल के पुंजा जी झोपे ने अपनी आंखों से देखा था। पुंजा जी ने बताया कि वह ट्रेवलर में सवार थे। पोखरा से निकलते समय सड़क पर दूसरे नंबर पर हादसे वाली बस और तीसरे नंबर पर उनकी ट्रेवलर गाड़ी धीरे-धीरे आगे-पीछे चल रही थी। तभी एक मोड़ के पास पहली बस निकली और दूसरी बस ब्रेक मारते ही फिसलने लगी।
इस हादसे को भुसावल के पुंजा जी झोपे ने अपनी आंखों से देखा था। पुंजा जी ने बताया कि वह ट्रेवलर में सवार थे। पोखरा से निकलते समय सड़क पर दूसरे नंबर पर हादसे वाली बस और तीसरे नंबर पर उनकी ट्रेवलर गाड़ी धीरे-धीरे आगे-पीछे चल रही थी। तभी एक मोड़ के पास पहली बस निकली और दूसरी बस ब्रेक मारते ही फिसलने लगी।