{"_id":"615e8e638ebc3e05c56b5ddb","slug":"manish-murder-case-update-13-policemen-under-investigation-of-sit-kanpur","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मनीष हत्याकांड: केवल छह पुलिसकर्मी ही नहीं सात और भी हैं शामिल, एसआईटी की जांच के दायरे में हैं ये लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनीष हत्याकांड: केवल छह पुलिसकर्मी ही नहीं सात और भी हैं शामिल, एसआईटी की जांच के दायरे में हैं ये लोग
Thu, 07 Oct 2021 11:42 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Oct 2021 11:42 AM IST
विज्ञापन
मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले की जांच कर रही एसआईटी कानपुर की जांच के दायरे में निलंबित किए गए छह पुलिस वालों के अलावा सात और पुलिस वाले शामिल हैं। ये सभी वे लोग हैं जो इंस्पेक्टर जगत नारायण के करीबी थे या फिर घटना वाले दिन मददगार की भूमिका में थे। एसआईटी इनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। एसआईटी के सदस्यों ने तीसरी बार मेडिकल कॉलेज पहुंचकर ट्रॉमा सेंटर में घटना वाले दिन ड्यूटी पर तैनात डॉ. एके श्रीवास्तव समेत अन्य स्टाफ से बातचीत कर जानकारी हासिल किया। बारीकी से उनसे पूछताछ कर यह समझने की कोशिश की गई कि आखिर उस रात असल में हुआ क्या था? डॉक्टर ने भर्ती होने की जानकारी दी है, लेकिन दो पर्चे का सवाल अभी उलझा ही है। पर्ची काउंटर के कर्मचारी का भी बयान दर्ज कर लिया गया है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरा मामला...
मनीष गुप्ता हत्याकांड।
- फोटो : अमर उजाला।
30 लोगों का बयान दर्ज कर चुकी है एसआईटी
एसआईटी पिछले पांच दिन में 30 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। सोमवार को नौ लोगों के बयान दर्ज किए गए तो मंगलवार को आठ लोगों से टीम ने जानकारी हासिल की है। बुधवार को 17 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही एक ही हर व्यक्ति को अलग-अलग समय बैठाकर और वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बयान लेकर टीम उसे मैच भी करा रही है, ताकि किसी तरह की कोई संशय की स्थिति न बनने पाए।
एसआईटी पिछले पांच दिन में 30 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। सोमवार को नौ लोगों के बयान दर्ज किए गए तो मंगलवार को आठ लोगों से टीम ने जानकारी हासिल की है। बुधवार को 17 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही एक ही हर व्यक्ति को अलग-अलग समय बैठाकर और वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बयान लेकर टीम उसे मैच भी करा रही है, ताकि किसी तरह की कोई संशय की स्थिति न बनने पाए।
मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
अब गिरफ्तारी ही बाकी...
अब तक जांच में किए गए सीन रिक्रिएशन, पकड़े गए टाइमिंग के खेल और बेंजाडीन टेस्ट कर जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर टीम उस दिन हुए घटनाक्रम की तह तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले में सिर्फ गिरफ्तारी होनी ही बाकी रह गई है। बताया जा रहा है कि अब टीम साक्ष्य संकलन के साथ ही आरोपितों की गिरफ्तारी कराकर ही गोरखपुर से वापस कानपुर जाएगी।
अब तक जांच में किए गए सीन रिक्रिएशन, पकड़े गए टाइमिंग के खेल और बेंजाडीन टेस्ट कर जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर टीम उस दिन हुए घटनाक्रम की तह तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले में सिर्फ गिरफ्तारी होनी ही बाकी रह गई है। बताया जा रहा है कि अब टीम साक्ष्य संकलन के साथ ही आरोपितों की गिरफ्तारी कराकर ही गोरखपुर से वापस कानपुर जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनीष हत्याकांड में जांच करती एसआईटी कानपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
सीबीआई से पहले पर्दाफाश की कोशिश
एसआईटी की ओर से इस मामले के विवेचना अधिकारियों को भी गिरफ्तारी का इशारा मिलते ही ताबड़तोड़ दबिशें पड़नी शुरू हो गईं हैं। सूत्रों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आरोपी गिरफ्त में होंगे। वहीं, दूसरी ओर सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जरूरत पड़ने पर ही सिर्फ गोरखपुर पुलिस की मदद ली जा रही है। जबकि, कानपुर पुलिस की अलग-अलग टीमों ने गोरखपुर के अलावा अन्य शहरों में आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी हैं। आखिरी लोकेशन और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकार्ड) के आधार पर भी आरोपियों की तलाश की जा रही है। वहीं, एसआईटी जांच के साथ ही एसआईटी की एक और कोशिश है कि इस मामले के सीबीआई के टेकओवर करने से पहले ही इसका पर्दाफाश हो जाए।
एसआईटी की ओर से इस मामले के विवेचना अधिकारियों को भी गिरफ्तारी का इशारा मिलते ही ताबड़तोड़ दबिशें पड़नी शुरू हो गईं हैं। सूत्रों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आरोपी गिरफ्त में होंगे। वहीं, दूसरी ओर सूत्रों का कहना है कि इस मामले में जरूरत पड़ने पर ही सिर्फ गोरखपुर पुलिस की मदद ली जा रही है। जबकि, कानपुर पुलिस की अलग-अलग टीमों ने गोरखपुर के अलावा अन्य शहरों में आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी हैं। आखिरी लोकेशन और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकार्ड) के आधार पर भी आरोपियों की तलाश की जा रही है। वहीं, एसआईटी जांच के साथ ही एसआईटी की एक और कोशिश है कि इस मामले के सीबीआई के टेकओवर करने से पहले ही इसका पर्दाफाश हो जाए।
विज्ञापन
मनीष हत्याकांड की जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआईटी ने अब तक पकड़े ये झूठ
- रामगढ़ताल थाने की जीडी में गढ़ी गई पुलिस की झूठी कहानी।
- थाने की जीडी में मनीष को मृतक और अस्पताल में घायल है दर्ज।
- जीडी में दर्ज है जिला अस्पताल से रेफर होने की बात, जबकि हकीकत में मानसी अस्पताल से रेफर थे
- मेडिकल कॉलेज में मनीष के बने दो पर्चे। एक में अज्ञात दूसरे में नाम।