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पाकिस्तान से ऊंचा है गोरक्षनगरी के खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर, कुतुब मीनार से भी है दोगुना

Sun, 08 Nov 2020 08:59 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 08 Nov 2020 08:59 AM IST
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Gorakhpur fertilizer factory Prilling tower is height than Pakistan and qutub minar
गोरखपुर खाद कारखाना और कुतुब मिनार। - फोटो : अमर उजाला।

दुनिया के भीतर अभी तक पाकिस्तान के दहरकी शहर में एग्रो फर्टिलाइजर्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर सबसे ऊंचा था। मगर अब यह उपलब्धि गोरक्षनगरी यानी गोरखपुर खाद कारखाने के नाम दर्ज हो गई है। पाकिस्तान के खाद कारखाने के प्रिलिंग टावर की ऊंचाई 125 मीटर है जबकि हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) द्वारा गोरखपुर में बनाए जा रहे खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर 149.5 मीटर है। इसका व्यास 28 से 29 मीटर है। यह टावर बनकर तैयार हो गया है। जून 2021 से नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।

Gorakhpur fertilizer factory Prilling tower is height than Pakistan and qutub minar
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

पूरी तरह से प्राकृतिक गैस से संचालित होने वाले इस कारखाने तक गैस पहुंचाने के लिए गेल ने वाराणसी से लेकर गोरखपुर खाद कारखाना परिसर तक पाइल लाइन बिछाई है। पिछले साल ही इसके ट्रायल का काम पूरा हो गया था। वहीं शुक्रवार से इसमें गैस सप्लाई शुरू कर दी गई। एचयूआरएल और गेल के अफसरों ने कारखाना परिसर में लगे गेल और एचयूआरएल के संयुक्त ज्वाइंट पर इसकी टेस्टिंग भी शुरू कर दी। करीब 7085 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है गोरखपुर खाद कारखाना, देश का सबसे बड़ा खाद कारखाना होगा।

Gorakhpur fertilizer factory Prilling tower is height than Pakistan and qutub minar
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

प्रिलिंग टॉवर से ऐसे बाहर निकलेगा यूरिया
एचयूआरएल के सीनियर वाइस प्रसिडेंट वीके दीक्षित बताते हैं कि गेल द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाएगा। अमोनिया के इस लिक्विड को प्रिलिंग टावर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाएगा। इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम तैयार किया जा रहा है। अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया छोटे-छोटे दानों के रुप में प्रिलिंग टावर के बेसमेंट में बने कई होल के रास्ते बाहर आएगा। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाया जाएगा। नीम कोटिंग होने के बाद उसे पैक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कारखाने में अमोनिया कूलिंग टावर के सभी नौ सेल भी बनकर तैयार हो गए हैं। कारखाने का यांत्रिक कार्य इसी महीने (नवंबर 2020) पूरा हो जाएगा जबकि उत्पादन का काम फरवरी 2021 में शुरू होगा।

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कुतुब मिनार। - फोटो : अमर उजाला।
कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा है प्रिलिंग टावर
गोरखपुर खाद कारखाने के प्रिलिंग टावर की ऊंचाई कुतुब मिनार से दोगुने से भी अधिक है। कुतुब मिनार की ऊंचाई 72.5 मीटर (237.86 फीट) है जबकि प्रिलिंग टावर की ऊंचाई 149.5 मीटर (490.48 फीट) है।
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Gorakhpur fertilizer factory Prilling tower is height than Pakistan and qutub minar
खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला
टॉवर की ऊंचाई का फायदा
यूरिया के दानों को लेकर देश के भीतर जो मानक तय है, उसके मुताबिक यूरिया के दाने 0.3 एमएम से अधिक नहीं होने चाहिए। गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर ऊंचा होने की वजह से इसमें 0.2 एमएम के दाने बनेंगे। दानों का आकार छोटा होने से वे मिट्टी में तेजी से घुलेंगे और उसका असर भी जल्द होगा।
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