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तस्वीरें: फूलों की नर्सरी से दीनानाथ की बढ़ी आमदनी, हर साल कमाते हैं लाखों रुपये

Sat, 12 Dec 2020 07:38 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Sat, 12 Dec 2020 07:38 PM IST
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Dinanath income increased by flower nursery in Maharajganj
फूलों की खेती करते दीनानाथ। - फोटो : अमर उजाला।

महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र के जंगलों से सटे गांव बैदौली के टोला बनकटी निवासी दीनानाथ मौर्य के फूलों का कारोबार फलफूल रहा है। इनकी फूलों की महक जिले के अलग-अलग हिस्सों में है। फूलों की नर्सरी से प्रति वर्ष लाखों की आमदनी होती है। सीजन के अनुसार फूल के पौधों की मांग घटती-बढ़ती है। ठंड में सबसे ज्यादा फूलों के पौधों की मांग होती है।



 

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फूल दिखाते दीनानाथ। - फोटो : अमर उजाला।

पहले फूल के पौधे के लिए लोगों को पूरी तरह से दूर दराज की नर्सरियों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब फूलों के पौधे आसानी से उन्हें मिल जाते हैं। बैदौली गांव के टोला बनकटी निवासी दीनानाथ मौर्य ने बताया कि बीते करीब दस वर्ष पूर्व कला वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद छोटे स्तर पर फूलों की नर्सरी शुरू की थी। धीरे-धीरे फूलों की मांग बढ़ने पर 50 डिस्मिल की भूमि पर नर्सरी शुरू कर दी। नर्सरी में सीजन के मुताबिक फूल के अलावा शो प्लांट सहित जंगली प्लांट भी साल भर उपलब्ध रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक सीजन में करीब 40 से 50 हजार की लागत लगती है। इस दौरान नर्सरी में 13 से 15 हजार फूलों के पौधे उगाए जाते हैं। उससे करीब डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा होता है।
 

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दीनानाथ ने खेती से बढ़ाई आमदनी। - फोटो : अमर उजाला।

मामा के साथ रहकर सीखी थी नर्सरी
दीनानाथ मौर्य ने बताया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद वह गोरखपुर के चौरीचौरा इलाके के लक्ष्मणपुर में मामा रामकिशुन मौर्य के घर गए। वहां उनके मामा वर्षों से बड़े पैमाने पर फूलों की नर्सरी करते थे। उनके साथ रहकर नर्सरी सीखने लगे। मामा के साथ ही बनारस की नर्सरी मंडुआडीह और बिहारी बाग में जाकर तकनीकी विधि से नर्सरी की विधि सीखी थी। उसके बाद घर आकर नर्सरी शुरू की।


 

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50 डिस्मिल खेत में करते हैं फूलों की खेती। - फोटो : अमर उजाला।

फूलों की नर्सरी से भाई को करा दी बीटेक
दीनानाथ ने बताया कि परिवार में बड़ा हूं। पत्नी पुष्पा गृहणी के साथ नर्सरी के खेती में सहयोग करती हैं। दो छोटे भाई अमरनाथ और अक्षय कुमार की भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है। फूलों की नर्सरी कर एक भाई को शिक्षा दिलाकर सहज जन सेवा केंद्र खुलवा दिया। दूसरे भाई को बीटेक कराया। फूलों की नर्सरी से घर में खुशहाली है।  

 

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शादी ब्याह में खूब होती है डिमांड। - फोटो : अमर उजाला।

सीजनल फूलों की अधिक मांग
जाड़े में सीजनल फूलों की मांग अधिक होती है। गेंदा, स्ट्रॉबेरी प्लांट, विगोनिया, पेटूनिया, कैलेंडुला, डालिया, भरबिना, डॉग फ्लावर, जुरेनियम, पेंजी, ऑस्टर, डेन्थस, सांवरिया, गजेनिया समेत 200 वेराइटी के फूलों की होती है। गर्मी में सजावट वाले पौधे और बरसात में फल के पौधों सहित शो प्लांट की मांग होती है।
 

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