उत्तर प्रदेश के गोरकपुर जिले में कोविड वैक्सीनेशन के दूसरे चरण में हुए दो दिनों के टीकाकरण में 27 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गए। इसकी वजह फ्रंट लाइन वर्करों में टीकाकरण के प्रति उत्साह की कमी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वैक्सीनेशन जितना कम होगा उतना ही वायल खराब होंगे। दूसरे चरण के पहले दिन जहां 12 प्रतिशत वैक्सीन खराब हुए थे। वहीं दूसरे दिन 15 प्रतिशत वैक्सीन खराब हुए हैं। इसकी वजह से विभाग भी चिंतित है।
यूपी के इस जिले में दो दिनों के अंदर बर्बाद हुई 27 फीसदी कोरोना वैक्सीन, इस वजह से चिंता में है विभाग
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दो दिनों में कम हुआ टीकाकरण
कोविड टीकाकरण का दूसरा चरण 11 फरवरी को शुरू हुआ। इसमें फ्रंट लाइन वर्करों को टीका लगना है। दूसरे चरण के पहले दिन 11 फरवरी को लक्ष्य 3859 के सापेक्ष 1555 लोगों ने टीका लगवाया। कुल प्रतिशत 40.3 रहा। इसकी वजह से कोविशील्ड और को-वैक्सीन के 15 प्रतिशत टीके खराब हो गए। जबकि दूसरे दिन 6022 लोगों के सापेक्ष 2554 लोगों ने टीकाकरण कराया। कुल 42.4 प्रतिशत ही टीकाकरण हो सका। ऐसे में 12 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गए।
कितने डोज हुए बर्बाद शुरू हुआ मंथन
विभाग बर्बाद हो चुके वैक्सीन का हिसाब देने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। को-वैक्सीन के एक वायल में 20 डोज और कोविशील्ड के एक वायल में 10 डोज होते हैं। ऐसे में विभाग अब सभी बूथों पर यह पता करने की कोशिश में जुटा हुआ है कि किस वायल में कितने लोगों को डोज लगाए हैं। इसके बाद से यह पता चल सकेगा कि दो दिनों के अंदर कितने डोज बर्बाद हुए।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि जितना ही वैक्सीनेशन कम होगा। उतने ही डोज बर्बाद होंगे। दर्जन भर बूथ पर डोज बर्बाद हुए हैं। एक वायल के खुलने पर चार घंटे तक ही उसे नॉर्मल तापमान पर रखा जाता है। इस बीच अगर कोई नहीं आता है तो वह वायल खुलने के बाद खराब हो जाता है।
12 फरवरी- 42.4
11 फरवरी- 40.3
05 फरवरी- 70.7
04 फरवरी- 70
29 जनवरी- 82.4
28 जनवरी- 77.3
22 जनवरी- 70.83
16 जनवरी - 51
नोट:- सभी फीसदी में है।