उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पेशल सीरीज का ये आठवां भाग है। पहले सात भाग में आपने पढ़ा कि कैसे योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित पैतृक गांव पंचूर से गोरखपुर आए और दीक्षा लेकर संन्यासी बन गए। मां-बाप ने भी बेटे के फैसले के आगे हार मान ली। योगी ने पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और पहली बार में ही एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। छोटी उम्र में ही योगी नायक बन गए थे। वहीं गोरखपुर मंदिर के भंडारे में योगी ने ऐसा सबक सीखा, जिसे वह जीवन में कभी नहीं भूले। अब आगे पढ़ें...
सीएम योगी का हैरान करने वाला वो बयान, जो सात साल बाद हुआ था वायरल
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बात 26 जनवरी 2007 गणतंत्र दिवस की है। दिनभर चले उत्सव के बाद शाम तक गोरखपुर शहर में सन्नाटा हो चुका था। हालांकि बक्शीपुर के डीएवी कॉलेज के पास एक वैवाहिक स्थल पर स्थानीय ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम चल रहा था। ज्यादातर अतिथि आनंद उठा रहे थे कि अचानक लड़ाई-झगड़ा शुरू हो गया। फसाद बढ़ता देख कमजोर पड़ता गुट भाग खड़ा हुआ। शादी समारोह से भागे लोग मुहर्रम जुलूस में घुस गए। राजकुमार अग्रहरी नाम के युवा को पकड़कर पुलिस जीप में बैठा ली। अग्रहरी को अकेला पाकर जुलूस में शामिल उग्र युवकों ने उसे जीप से निकालकर बुरी तरह पीट दिया।
मुहर्रम जुलूस में हिंसा की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और गोरखपुर में संप्रदायिक तनाव फैल गया। दुर्भाग्य से अग्रहरी की अस्पताल में मौत हो गई। जब उसकी मौत की खबर मंदिर पहुंची तो योगी अस्पताल जाने की तैयारी करने लगे। लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने जब उन्हें समझाया कि उनके जाने से तनाव बढ़ जाएगा, वह नरम पड़ गए। माहौल बिगड़ता देख योगी ने जिलाधिकारी हरिओम से तत्काल कर्फ्यू लगाने का अनुरोध किया। लेकिन जब उनकी मांग नहीं मानी गई जिसके कारण योगी और उनके समर्थकों को धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।
योगी ने चेतावनी सभा और मशाल जुलूस निकालने का एलान कर दिया। चेतावनी सभा में दिए गए योगी के भाषण का एक हिस्सा सात साल बाद 2014 में चर्चा में आया तब तक भाजपा ने लोकसभा चुनाव बहुमत के साथ जीत लिया था और योगी उत्तर प्रदेश विधान सभा उपचुनावों के प्रचार प्रभारी बना दिए गए थे। उन्होंने कहा था- 'अगर एक हिंदू का खून बहेगा तो उसके बदले 10 हत्याएं होंगी और इसको कोई रोक नहीं पाएगा।'
28 जनवरी 2007 को योगी पड़ोस के जिले कुशीनगर में किसी समारोह में गए थे। लौटते वक्त जब उनका काफिला गोरखपुर सीमा के पास पहुंचा उसे रोक लिया गया। योगी पुलिस लाइन ले जाए गए। इससे हिंदू युवा वाहिनी के सदस्य उग्र हो गए। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही की माने तो बिना किसी तैयारी के योगी को गिरफ्तार कर लिया गया था। योगी समर्थकों के साथ 11 दिन जेल में रहे। रिहाई के बाद योगी ने संसद में अपनी पीड़ा सुनाते समय फूट पड़े। उनका गला रूंध गया था और आंसू थे कि रुक ही नहीं रहे थे। इस घटना के टाइम्स ऑफ इंडिया के लखनऊ संस्करण में योगी को लेकर लिखा था कि 'आखिरकार यूपी भाजपा को अपना युवराज मिल गया।'
साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।
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