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सीएम योगी ने महंत अवैद्यनाथ का शिष्य बनने से किया था इनकार, जानिए कैसे बन गए गोरखनाथ के 'युवराज'

Sun, 08 Mar 2020 01:18 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 08 Mar 2020 01:18 PM IST
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CM yogi adityanath special life story gorakhnath temple story in gorakhpur
योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्पेशल सीरीज का ये सातवां भाग है। पहले सात भाग में आपने पढ़ा कि कैसे योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित  पैतृक गांव पंचूर से गोरखपुर आए और दीक्षा लेकर संन्यासी बन गए। मां-बाप ने भी बेटे के फैसले के आगे हार मान ली। योगी ने पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और पहली बार में ही एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। छोटी उम्र में ही योगी नायक बन गए थे। वहीं गोरखपुर मंदिर के भंडारे में योगी ने ऐसा सबक सीखा, जिसे वह जीवन में कभी नहीं भूले। अब आगे पढ़ें...


 
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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

यह कहानी सीएम योगी आदित्यनाथ और महंत अवैद्यनाथ की पहली मुलाकात की है। बात अक्टूबर 1993 की है,  महंत अवैद्यनाथ दिल्ली एम्स अस्पताल में हृदयरोग विभाग में इलाज करवा रहे थे। इस दौरान संक्षिप्त निंद्रा में अपनी आंख खोली तो देखा, सामने योगी खड़े थें। उनके चेहरे पर फीकी मुस्कान दौड़ पड़ी। उनकी आंखें, हालांकि अभी भी वही सवाल पूछ रही थीं, जो उन्होंने कुछ महीने पहले ही पौढ़ी के इस युवा से पूछी थी, 'क्या तुम मेरे शिष्य बनोगें?' उस समय योगी ने विनम्रता पूर्वक इनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : Yogi Adityanath Life
महंत को एक शिष्य की शिद्दत से तलाश थी, जो उनका उत्तराधिकारी बन सके और उनकी अनुपस्थिति में उनके नाम पर मंदिर प्रशासन का संचालन कर सके। दिग्विजयनाथ मात्र 48 साल के थे  जब उन्होंने अवैद्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। परन्तु अवैद्यनाथ 74 साल की उम्र में भी यह कर पाने में सफल नहीं हो सके थे।
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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
महंत अवैद्यनाथ को अपनी कहानी याद आ गई, जब 52 साल पहले उन्होंने भी अपने गुरू महंत दिग्विजयनाथ का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। हालांकि थोड़े समय बाद ही कहानी बदलनी वाली थी। कुछ समय बाद अजय को पता चला कि अवैद्यनाथ फिर से अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर हैं। इस बार वो अपने आप को नहीं रोक सके।
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योगी आदित्यनाथ को छोटे बच्चों से बहुत लगाव है। - फोटो : अमर उजाला।
अजय अस्पताल में मंहत अवैद्यनाथ के बिस्तर के पास खड़े थे, महंत आशा भरी निगाहों से उन्हें देख रहे थे। उन्होंने कहा कि मैंने अपना जीवन रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया है, किन्तु अपना शिष्य नहीं चुन सका हूं। अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या होगा?। इसके बाद अजय ने कहा कि आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे, मैं जल्द गोरखपुर आऊंगा। इसके बाद योगी अपने घर गए और अपनी मां गोरखपुर जाने की बात कहीं तो उन्हें लगा कि बेटा नौकरी करने जा रहा है।

साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।  

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