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Exclusive: 96 फीसदी बच्चों ने घर में ही जीत ली कोरोना से 'जंग', जानिए किस वजह से बच्चों में खतरा कम
Thu, 27 May 2021 12:41 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 27 May 2021 12:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के बीच दूसरी लहर में अप्रैल और मई माह में 96 फीसदी बच्चों ने घर में ही कोरोना से जंग जीत ली। अब तक 0 से 10 साल के 1476 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन, कुल संक्रमितों में पांच बच्चों की मौत हुई है और महज 10 बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई। अन्य सभी होम आइसोलेशन में ही कोरोना से जंग जीत चुके हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
इस वजह से बच्चों में खतरा कम
आईएमए के पूर्व सचिव व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि बच्चे इस वायरस से लड़ने में सक्षम नजर आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है उनका स्ट्रॉन्ग इम्यून सिस्टम और मजबूत लंग्स।
आईएमए के पूर्व सचिव व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि बच्चे इस वायरस से लड़ने में सक्षम नजर आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है उनका स्ट्रॉन्ग इम्यून सिस्टम और मजबूत लंग्स।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में साइटोकाइन स्टॉर्म सिंड्रोम वाली स्थिति कम बनती है, उनके इम्यून सिस्टम की वजह से इस बीमारी को पनपने की अनुकूल स्थिति नहीं बनती। इसलिए बच्चों में गंभीरता वाली स्थिति कम बनती है। दूसरी बात, बच्चों के लंग्स बड़ों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते हैं। क्योंकि उन्हें प्रदूषण का एक्सपोजर नहीं होता है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
नौ-20 माह के मासूम ने भी जीती कोरोना से जंग
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में शहर की नौ माह की प्रतिभा भर्ती थी। स्थिति ठीक नहीं होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, लेकिन जल्द ही उसने कोरोना को मात दे दी। इसी तरह देवरिया के 20 माह के मोहम्मद साजिद को भी आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था, लेकिन वह भी जल्द ही स्वस्थ हो गया।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में शहर की नौ माह की प्रतिभा भर्ती थी। स्थिति ठीक नहीं होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा, लेकिन जल्द ही उसने कोरोना को मात दे दी। इसी तरह देवरिया के 20 माह के मोहम्मद साजिद को भी आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था, लेकिन वह भी जल्द ही स्वस्थ हो गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
बच्चों में ये लक्षण मिले तो नजरअंदाज न करें
डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोरोना के लक्षण अन्य मरीजों की तुलना में थोड़े अलग मिल रहे हैं। इनमें बुखार, जुकाम-खांसी, दस्त, दौरा आना, पेट में दर्द, डायरिया जैसे लक्षण शामिल हैं। अगर ये लक्षण इस वक्त बच्चों में मिलते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करते हुए डॉक्टर से सलाह लें।
डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोरोना के लक्षण अन्य मरीजों की तुलना में थोड़े अलग मिल रहे हैं। इनमें बुखार, जुकाम-खांसी, दस्त, दौरा आना, पेट में दर्द, डायरिया जैसे लक्षण शामिल हैं। अगर ये लक्षण इस वक्त बच्चों में मिलते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करते हुए डॉक्टर से सलाह लें।