9 अगस्त की सुबह, वक्त करीब 10 बजे के आसपास ही था। जब पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ग्रेटर कैलाश स्थित अपने आवास पर नाश्ता कर रहे थे। तभी अचानक से उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई और उन्हें एम्स में भर्ती किया गया। तभी से अरुण जेटली के उपचार में एम्स के पांच विभागों के 12 डॉक्टरों की टीम जुट गई थी लेकिन 21 अगस्त की रात अचानक से पूर्व वित्त मंत्री का स्वास्थ्य गिरता चला गया। उनके जीवन के इन आखिरी तीन दिनों के बारे में शनिवार को एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों ने विस्तृत रूप से बताया।
Exclusive: अरुण जेटली के आखिरी तीन दिन, जब शरीर का एक-एक अंग छोड़ने लगा था साथ
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एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, अरुण जेटली का स्वास्थ्य शुरूआत से ही काफी गंभीर चुनौतियों से घिरा हुआ था। कभी उनके शरीर पर दवाएं बेहतर काम करतीं तो कभी उनकी सांस उखड़ने लगती। अंतिम तीन दिनों में तो हालात एकदम से बदल गए। हमने वो सबकुछ किया जो एक मरीज को बचाने में करते हैं। दवाओं की डोज बढ़ाई, वेंटीलेटर से एक्मो पर ले गए, हार्ट पंप के अलावा फेफड़ों से संक्रमण को दूर किया, लेकिन बीते शुक्रवार सुबह हमें पेट में संक्रमण की बात पता चली।
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हमने अभी इलाज शुरू ही किया था कि करीब 8 घंटे बाद शुक्रवार शाम को संक्रमण काफी तेजी से शरीर के बाकी अंगों को कवर करने लगा। आखिर में बीती रात अरूण जेटली की तबियत और ज्यादा बिगड़ी। रात भर करीब 25 लोगों की टीम कार्डिएक न्यूरो सेंटर स्थित आईसीयू में मौजूद थी। हमें लग भी रहा था कि अब उन्हें बचाना संभव नहीं है, लेकिन फिर भी हमने पूरी मेहनत की।
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सुबह तक काफी असर भी हमें देखने को मिला तो पूरी टीम को खुशी हुई, लेकिन कुछ ही घंटे बाद सुबह करीब साढ़े 9 बजे के आसपास उनकी तबियत अचानक से बिगड़ गई। हर दवा उनके शरीर पर फेल हो रही थी। मानों उनका शरीर ही रेस्पांस नहीं कर रहा हो। आखिर में दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली जाते जाते भी बीमारी से लगातार लड़ते रहे।
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डॉक्टरों ने बताया कि धीरे-धीरे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का एक-एक अंग शरीर का साथ छोड़ रहा था। पहले हार्ट, फिर फेफड़ें, किडनी भी सूजन की चपेट में होने के कारण डायलिसिस पर थी। शुक्रवार रात अरुण जेटली को आंतों में ब्लीडिंग हुई थी और उन्हें कार्डिएक अरेस्ट भी हुआ जिसे डॉक्टरों ने समय रहते सीपीआर के जरिए कवर कर लिया था लेकिन शनिवार सुबह मौत से चंद समय पहले उन्हें फिर कार्डिएक अरेस्ट यानि दिल का दौरा पड़ा था लेकिन इस बार डॉक्टरों के हाथ निराशा लगी।
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