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बुराड़ी में 1 घर में 11 मौतें, परिवार का एक सच आया सामने, रिश्तेदार ने किए 3 बड़े खुलासे पढ़ें...
सुशील सिंगला, अमर उजाला, टोहाना(फतेहाबाद)
Updated Thu, 05 Jul 2018 09:57 AM IST
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burari death case
- फोटो : जी पाल
दिल्ली के बुराड़ी में एक घर में 11 मौतों के मामले में नया सच सामने आया है। दरअसल, एक रिश्तेदार ने परिवार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने ऐसी बात बताई है, जिसके बारे में शायद ही लोग जानते होंगे।
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करीब पांच माह पहले परिवार के सदस्य हरियाणा में फतेहाबाद में टोहाना स्थित अपने मकान की सीढ़ियों का डिजाइन देखने आए थे। वह किसी तंत्र मंत्र विद्या में तो विश्वास नहीं रखते थे, लेकिन निरंकारी मिशन से जुड़ाव जरूर था। यह कहना है परिवार के रिश्तेदार व टोहाना के पार्षद तिलक भाटिया का। तिलक भाटिया ने बताया कि नारायणी देवी उनकी मौसेरी सास लगती थीं। गोपालदास का परिवार राजस्थान के चितौड़गढ़ के गांव रावत भाटा से करीब 45 वर्ष पहले रहने आया था।
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तिलकराज ने बताया कि उनका रिश्ता भी गोपालदास के परिवार से उन्हीं ने करवाया था। जब गोपालदास का परिवार टोहाना में रहता था तो वह भक्ति में लीन रहते थे, लेकिन अंधविश्वास जैसा कुछ नहीं था। उन्होंने बताया कि जब वे दिल्ली गए थे तो उन्होंने निरंकारी मिशन से जुड़ाव कर लिया था। इस परिवार के धार्मिक कार्यों में निरंकारी भवन के संत मौजूद रहते थे। गोपालदास के परिवार का नियम था कि वह सुबह व शाम के समय इकट्ठे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते थे।
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घर के बाहर जमा भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पांच माह पूर्व टोहाना आया था परिवार
भाटिया नगर निवासी रामस्वरूप ने बताया कि गोपालदास ने लगभग 33 साल पहले उनसे भाटिया नगर में मकान खरीदा था। गोपालदास के परिवार से फोन पर कभी-कभी बातचीत हो जाती थी। रामस्वरूप ने बताया कि लगभग पांच माह पूर्व गोपालदास की दो बहुएं और पोते टोहाना आए थे। यहां मकान में जो सीढ़ियां लगी हैं, उनका डिजाइन देखा था। यह परिवार दिल्ली में भी मकान बना रहा था। उनको इन्हीं पौड़ियों का डिजाइन वहां लगवाना था।
भाटिया नगर निवासी रामस्वरूप ने बताया कि गोपालदास ने लगभग 33 साल पहले उनसे भाटिया नगर में मकान खरीदा था। गोपालदास के परिवार से फोन पर कभी-कभी बातचीत हो जाती थी। रामस्वरूप ने बताया कि लगभग पांच माह पूर्व गोपालदास की दो बहुएं और पोते टोहाना आए थे। यहां मकान में जो सीढ़ियां लगी हैं, उनका डिजाइन देखा था। यह परिवार दिल्ली में भी मकान बना रहा था। उनको इन्हीं पौड़ियों का डिजाइन वहां लगवाना था।
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खेतीबाड़ी से शुरू किया था काम
तिलकराज ने बताया कि गोपालदास का परिवार गांव शक्करपुरा के एक नंबरदार के खेत में पार्टनरशिप के तौर पर काम करता था। इसके बाद उन्होंने टोहाना में जमीन लेकर भाटिया नगर में मकान बनाया और रतिया रोड पर जमीन ली। कुछ समय तक उन्होंने भैंस पालकर दूध का कार्य किया। लगभग 33 साल पहले परिवार दिल्ली चला गया। टोहाना रहने के दौरान गोपालदास का बड़ा बेटा भुनेश विदेश में कार्य करता था। लगभग 7-8 साल के बाद उसका बेटा भी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आ गया था।
तिलकराज ने बताया कि गोपालदास का परिवार गांव शक्करपुरा के एक नंबरदार के खेत में पार्टनरशिप के तौर पर काम करता था। इसके बाद उन्होंने टोहाना में जमीन लेकर भाटिया नगर में मकान बनाया और रतिया रोड पर जमीन ली। कुछ समय तक उन्होंने भैंस पालकर दूध का कार्य किया। लगभग 33 साल पहले परिवार दिल्ली चला गया। टोहाना रहने के दौरान गोपालदास का बड़ा बेटा भुनेश विदेश में कार्य करता था। लगभग 7-8 साल के बाद उसका बेटा भी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर आ गया था।