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गुलजार सिंह मौत मामला: मान सरकार की बढ़ी मुश्किलें, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट

Tue, 08 Sep 2026 09:36 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 08 Sep 2026 09:36 PM IST
सार

पंजाब के संगरूर में वित्त मंत्री की रैली में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले गुलजार सिंह के मौत मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है।

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National Commission for Scheduled Castes seeks report in Gulzar Singh suicide case
गुलजार सिंह आत्महत्या मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने संगरूर निवासी गुलजार सिंह की मौत और उनकी मौत से पहले सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर पंजाब अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आयोग का यह कदम पूर्व विधायक एवं पंजाब भाजपा एससी मोर्चा के राज्य अध्यक्ष शीतल अंगुराल द्वारा सौंपे गए अभ्यावेदन के बाद उठाया गया है। 
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अंगुराल ने एनसीएससी से उचित कार्रवाई करने और वीडियो में उठाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। अपने अभ्यावेदन में उन्होंने गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों और घटना से पहले वीडियो में लगाए गए आरोपों की गहन जांच की मांग की थी। मामले पर संज्ञान लेते हुए एनसीएससी ने संबंधित पंजाब अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राज कुमार वेरका ने मंगलवार को भगवंत मान सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। 
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उन्होंने संगरूर में दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में ड्रग्स के मुद्दे पर सवाल उठाने वालों के साथ “क्रूरता और सजा” का व्यवहार किया जाता है। एएनआई से बात करते हुए वेरका ने कहा कि तूर बंजारा गांव के दिहाड़ी मजदूर गुलजार सिंह ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या को लेकर सवाल उठाए थे और इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। 
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इसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली। वेरका ने कहा, “जो भी ड्रग्स के मुद्दे पर सवाल उठाता है, उसके साथ क्रूरता और सजा का व्यवहार होता है। कल ही संगरूर में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली और इसी सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भगवंत मान की एक रैली में सवाल पूछने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के साथ “थर्ड डिग्री” टॉर्चर किया गया। 

वेरका ने कहा भगवंत मान की रैली में सवाल पूछने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के साथ क्रूर थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया, यहां तक कि उसके घावों पर नमक भी रगड़ा गया। गुलजार सिंह ने जहर खाने के बाद उनका शव उम्मीद मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें डीएमसी लुधियाना शिफ्ट किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुलजार सिंह ने दिरबा में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के एक कार्यक्रम के दौरान संगरूर में ड्रग्स की बिक्री का मुद्दा उठाया था। जहर खाने के बाद बनाए गए वायरल वीडियो में गुलजार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने ‘चिट्टा’ की लत के कारण घर बेच दिया था। 

अंतिम संस्कार में हुआ जमकर बवाल
गुलजार सिंह की मौत के बाद जिस तरह उनका अंतिम संस्कार किया गया उससे गांव के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला । ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस-प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय मामले को जल्दबाजी में रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजनों को अंतिम बार गुलज़ार सिंह का चेहरा देखने की इजाजत तक नहीं दी गई।

इससे गुस्साए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और श्मशान घाट पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो उठा। आक्रोशित लोगों ने विरोध दर्ज कराते हुए एक बार तो चिता पर सजाई गई लकड़ियां उठाकर फेंक दीं। चारों तरफ नारेबाजी और गहमागहमी की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया।

श्मशान घाट पर बिगड़ते हालात को देखते हुए मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। अधिकारियों और गांव के लोगों की मध्यस्थता में करीब आधे घंटे तक तीखी बहस चली। प्रशासन ने परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया। इसके बाद, भारी पुलिस बल की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल के बीच गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। एहतियात के तौर पर पूरे गांव में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

 

ये था मामला 
संगरूर के दिड़बा हलके के गांव तूरबंजारा में नशे के मुद्दे पर सवाल उठाने वाले गुलजार सिंह की मौत हो गई है। परिजनों ने सार्वजनिक अपमान और पुलिस द्वारा माफी मांगने के दबाव को उनकी मौत का कारण बताया है। यह घटना वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की जनसभा के दौरान हुई।

गांव तूरबंजारा में रविवार को वित्त मंत्री की जनसभा थी। गुलजार सिंह ने इलाके में फैल रहे नशे के कारोबार पर अपनी बात रखनी चाही। उन्हें सभा में चुप कराकर बाहर निकाल दिया गया। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद पुलिस प्रशासन ने भी उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया जिसके बाद उन्होंने जहर का सेवन किया। 
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