मुश्किलें झेलीं अपशब्द सुने, पर हिम्मत नहीं छोड़ी। पिता के सपने को इस तरह से जिया कि स्टार क्रिकेटर बन गई, देखिए इस बहादुर बेटी का जज्बा गजब का है।
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हरमनप्रीत कौर
- फोटो : pti
बात कर रहे हैं, 28 साल की इंडियन क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर की, जिन्होंने वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में कंगारुओं के छक्के छुड़ा दिए। हरमनप्रीत कौर ने 12 चौके और दो छक्के की मदद से 90 गेंदों में शतक लगाया। यह हरमन का तीसरा एक दिवसीय शतक है। वे इंडियन वुमन क्रिकेट टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं। अपने अनोखे बैटिंग स्टाइल के लिए पहचानी जाती हैं। हरमनप्रीत वीरेंद्र सहवाग को ही अपना आदर्श मानती हैं।
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हरमनप्रीत कौर
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8 मार्च 1989 को जन्मी हरमनप्रीत पंजाब में लुधियाना के मोगा के छोटे से गांव दुनेके की रहने वाली हैं। उनकी इस कामयाबी से उनके क्लर्क पिता हरमंदर सिंह बेहद खुश हैं और कुछ बातें साझा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि परेशानियों ने क्रिकेट के प्रति उसके जुनून को कम नहीं होने दिया। कभी इतने पैसे नहीं थे कि पांच साल की बेटी के लिए नया बैट खरीदें। वे भारी-भरकम बैट को काट-छांट कर छोटा करते थे।
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इंडियन क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर
हरमंदर बताते हैं कि मैं क्लर्क की प्राइवेट नौकरी करता था, लेकिन अपने और बेटी के सपने को जीवित रखना चाहता था। परेशानियां बहुत थीं, लेकिन बेटी को तो बस खेलना था। वह रुकी नहीं थमी नहीं, क्योंकि उसका जुनून ही ऐसा था। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हरमनप्रीत की कहानी देश की दूसरे खिलाड़ियों से काफी अलग है। न तो उसके पास खेलने का माहौल था और न ही साथी।
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इंडियन क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर
हरमंदर बताते हैं कि हरमन को साथ खेलने के लिए लड़कियां नहीं मिलती थीं तो लड़कों के साथ ही प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। अब वो लड़कों के साथ गली में क्रिकेट खेलती थी, लेकिन उस माहौल में अपशब्द कहना आम बात थी। लड़के खेलते-खेलते कई तरह के अपशब्द कहते थे, जो किसी के लिए सुनना आसान न हो। पर मैंने उसे रोका नहीं बल्कि कान बंद कर शॉट्स से जवाब देने को कहा।