वास्तु शास्त्र में हर घर की दिशा का अपना-अपना महत्व माना जाता है और उससे जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं। ऐसे में अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं तो वास्तु के नुकसान से बच सकते हैं। सनातन धर्म में कुबेर को धन के देवता के रूप में जाना जाता है। कुबेर देव की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि कुबेर देवता की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में कभी भी आर्थिक संकट उत्पन्न नहीं होता। इसी क्रम में आज हम आपको बताएंगे कि वास्तु शास्त्र में किस दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है और किन मामलों में इस दिशा में रहने की गलती नहीं करनी चाहिए।
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kuber dev vastu disha
- फोटो : freepik
कुबेर देव की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की उत्तर दिशा को भगवान कुबेर का निवास स्थान माना जाता है। इसके अलावा इस दिशा को सकारात्मक ऊर्जा के भंडार के रूप में भी देखा जा सकता है। यह दिशा पूजा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। ऐसे में आपको इसी दिशा में मंदिर बनाना चाहिए। इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा।
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गलती से भी न रखें ये चीज़ें
अपने घर की उत्तर दिशा में कभी भी जूते, चप्पल, कूड़ेदान आदि न रखें। क्योंकि ऐसा करना कुबेर देव का अपमान है, इससे आर्थिक परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा घर की उत्तर दिशा में पुराना या टूटा हुआ सामान रखने से बचें। अन्यथा, आप कुबेर देव को नाराज कर सकते हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- किसी भी स्थिति में घर के उत्तरी भाग में शौचालय नहीं बनवाना चाहिए। वास्तु की दृष्टि से यह आमतौर पर गलत माना जाता था।
- वहीं, भारी सामान जैसे भारी फर्नीचर आदि इस दिशा में न रखें।
- उत्तर दिशा में भंडारण नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है।
- इस क्षेत्र में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।