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नवरात्रि में पूजा से लेकर अखंड ज्योति तक, जानें मां दुर्गा की उपासना के सही वास्तु नियम

Fri, 09 Oct 2026 04:48 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 09 Oct 2026 04:48 PM IST
सार

नवरात्रि पर देवी उपासना के लिए 9 दिन समर्पित होते हैं, जिसमें वास्तु के नियमों के अनुसार कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योत जलाने के नियम होते हैं। 
 

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Navratri 2026 Niyam Important Vastu Rules to Follow During Navratri Puja
Shardiya Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। इस दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में सच्चे मन से मां दुर्गा की साधना करने से जीवन के सभी भय दूर होते हैं और माता रानी की कृपा से भक्त के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस दौरान मां दुर्गा की उपासना न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि घर-परिवार में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का संचार भी करती है। धार्मिक मान्यताओं के साथ यदि वास्तु शास्त्र के नियमों का भी ध्यान रखा जाए, तो साधना का प्रभाव और अधिक फलदायी हो सकता है।

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Shardiya Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
पूजा स्थान की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की स्थापना के लिए घर का ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा देवताओं का स्थान मानी गई है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। यदि यह संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है।यद्धपि देवी माँ का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते वक्त आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को मानसिक शांति अनुभव होती है।  
Navratri 2026 Niyam Important Vastu Rules to Follow During Navratri Puja
नवरात्रि नौ दिन नौ देवी पूजन - फोटो : AI
स्वच्छता और पवित्रता का रखें ध्यान
नवरात्रि में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है। पूजा स्थान के आसपास किसी प्रकार की गंदगी या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार, जहां स्वच्छता होती है, वहीं सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। प्रतिदिन पूजा से पहले स्थान को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है।
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कलश स्थापना की पूजा सामग्री - फोटो : AI
कलश स्थापना के नियम
नवरात्रि की शुरुआत में कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वास्तु के अनुसार कलश को हमेशा मिट्टी या तांबे के पात्र में स्थापित करें और उसे पूजा स्थान के केंद्र में रखें। कलश के पास जौ बोना भी शुभ माना जाता है, जो समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। ध्यान रखें कि कलश के ऊपर रखा नारियल टूटा हुआ या दोषपूर्ण न हो।

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अखंड ज्योति जलाने के नियम - फोटो : amar ujala
अखंड ज्योति और दीपक की दिशा
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। दीपक को हमेशा अग्नि कोण अर्थात दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित होती है और यहां दीपक रखने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। साथ ही, दीपक को ऐसी जगह रखें जहां हवा का सीधा प्रभाव न हो।

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