बैंक ऑफ बड़ौदा के लॉकर से एक करोड़ के जेवर गायब, गोपनीयता पर उठाए सवाल
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लखनऊ चौक में बैंक ऑफ बड़ौदा के लॉकर से एक करोड़ रुपये के जेवर गायब होने का राज बैंक के भीतर ही छिपा है। पीड़ित अमित प्रकाश का कहना है कि लॉकर के लॉक में लगी लोहे की पत्ती उखड़ी थी। उन्होंने ड्रिल से लॉकर खोलकर जेवर निकाले जाने की आशंका जताई है।
चौक इंस्पेक्टर विश्वजीत सिंह ने इस बाबत बैंक अफसरों से पूछताछ करने की बात कही है। लॉकर के मालिक सराय माली खां निवासी व वर्तमान में बंगलुरू में रह रहे अमित का कहना है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों से मुलाकात की तो पता चला कि लंबे समय से बंद लॉकर को बैंक ड्रिल करके खुलवाता है।
हो सकता है कि उनका लॉकर भी ड्रिल किया गया हो। हालांकि, बैंक की जांचकर्ता टीम को अधिकारियों ने वर्ष 2018 से कोई भी लॉकर ड्रिल करके न खोलने की जानकारी दी है। अमित का कहना है कि जब उन्हें लॉकर टूटा होने का पता चला तो वह बैंक गए थे।
वहां बैंक अधिकारियों ने दीपक नाम के लॉकर की मरम्मत करने वाले व्यक्ति को बुलवाया था। बकौल अमित, दीपक ने उनके और बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों के सामने लॉकर को ड्रिल से खोले जाने की जानकारी दी थी।
पहले स्टील की पत्ती उखड़ी मिली फिर ठीक हो गई
अमित का यह भी कहना है कि पहले लॉकर के लॉक में लगी स्टील की पत्ती उखड़ी मिली थी जो बाद में सही-सलामत हो गई। बैंक अधिकारियों ने अपना अपराध छिपाने को पत्ती ठीक कराई होगी। मालूम हो कि चौक के खुनखुनजी रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में अमित प्रकाश के पिता डॉ. रविंद्र बहादुर और मां पुष्पा बहादुर के नाम का लॉकर है, जिसमें रखे एक करोड़ रुपये के जेवर गायब हो गए थे।
अमित ने लॉकर की बैंक अधिकारियों के पास वाली चाबियों की गोपनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों ने उनके सामने चपरासी से चाबियां और रजिस्टर मंगाए। इससे साफ है कि बैंक का हर व्यक्ति लॉकर की चाबियों और दस्तावेजों तक पहुंच रखता है। अमित ने कंप्यूटर के रिकॉर्ड में लॉकर की चाबी के नंबर अलग होने की भी बात कही है।