अपहरण कर सातवीं के छात्र के हाथ-पैर बांधकर पीटा, बाल काटे
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अलीगंज क्षेत्र में मारुति वैन सवार बदमाशों ने शुक्रवार सुबह सेंट फेडलिस स्कूल में सातवीं के छात्र का अपहरण कर लिया। टाई से हाथ और जूते के फीतों से पैर बांधकर उसे एक बाग में ले जाकर यातनाएं दीं।
सिर के एक हिस्से पर मुंडा बनाया और देरशाम स्टेडियम के पास छोड़कर भाग निकले। कुछ लोगों ने छात्र को बदहवास हालत में घर पहुंचाया। पुलिस ने सीनियर छात्रों पर संदेह जताते हुए तहकीकात शुरू की है।
एसओ अलीगंज कमलापति यादव ने बताया कि सेक्टर-डी में रहने वाले कपड़ा व्यवसायी अनूप श्रीवास्तव का बेटा आयुश श्रीवास्तव (13) विकासनगर स्थित सेंट फेडलिस स्कूल में सातवीं का छात्र है। आयुश रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह सात बजे साइकिल लेकर स्कूल के लिए निकला। दोपहर दो बजे तक घर न लौटने पर परिवारीजनों ने तलाश शुरू की। पता चला कि आयुश स्कूल गया ही नहीं था।
अनहोनी की आशंका के चलते अनूप ने थाने में सूचना दी और आयुश के दोस्तों व अन्य स्थानों पर ढूंढते रहे। पुलिस ने आयुश के दोस्तों के बारे में जानकारी की। पता चला कि दो दिन पहले आयुश का कुछ लड़कों से विवाद हुआ था।
तहकीकात चल ही रही थी कि केंद्रीय भवन का एक वाहन चालक आयुश को लेकर उसके घर पहुंचा। बदहवास हालत में घर लौटे आयुश के शरीर पर पिटाई की चोटें और सिर के एक हिस्से के बाल कटे थे। आयुष के पास उसका बस्ता तो था लेकिन साइकिल गायब थी।
टाई से हाथ और जूते के फीते से पैर बांधकर पीटा
बुरी तरह घबराए आयुश ने परिवारीजनों को बताया कि साइकिल से स्कूल जाने के दौरान मारुति वैन सवार युवकों ने उसे रास्ते में रोका। साइकिल से उतरते ही उसे मुंह दबाकर गाड़ी में बैठा लिया। साइकिल भी पीछे लादी। चलती वैन में टाई से हाथ और जूते के फीते से पैर बांधकर पीटना शुरू कर दिया। एक बाग में ले जाकर दिन भर यातनाएं दीं।
सूर्यास्त के बाद उसे गाड़ी में लादा और बस्ता समेत अलीगंज में स्टेडियम के पास फेंककर भाग गए थे। उसने कुछ सीनियर छात्रों के नाम लिए। एसओ का कहना है कि आयुश की दिमागी हालत ठीक न होने के कारण तहकीकात नहीं की गई है। पुलिस टीम शनिवार सुबह उसके बयान दर्ज करके आरोपियों की धरपकड़ करेगी।
स्कूल से खफा परिवार
अनूप व उनके परिवारीजनों ने कहा कि आयुश दोपहर दो बजे तक स्कूल से लौट आता है। वक्त गुजरने के बाद भी न आने पर तलाश शुरू की तो स्कूल प्रबंधन ने उसके गैरहाजिर होने की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बच्चे के स्कूल न पहुंचने पर प्रबंधन ने परिवारीजनों से संपर्क नहीं किया। पता चला है कि पहले भी सीनियर छात्रों द्वारा अन्य बच्चों को प्रताड़ित किया जा चुका है। बच्चे के साथ बड़ा हादसा भी हो सकता था।