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सुल्तानपुर के लिए ---गैर संपादित

Mon, 31 Jul 2017 10:36 PM IST
Updated Mon, 31 Jul 2017 10:36 PM IST
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सुल्तानपुर के लिए ---गैर संपादित

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अगवा युवक की हत्या कर
ट्रॉमा सेंटर में फेंकी लाश

क्रासर

रविवार सुबह इंडिका कार सवार बदमाशों ने पयागीपुर से किया था अपहरण
परिवारीजनों ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख और उसकेभाई पर लगाया हत्या का आरोप
पयागीपुर बाजार में कीमती जमीन के लिए हत्या की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर/लखनऊ। सुल्तानपुर के पयागीपुर से रविवार सुबह 42 वर्षीय ज्ञान प्रकाश पाठक का इंडिका कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। उसकी हत्या करने के बाद लाश को हादसे का रूप देने के लिए लखनऊ केट्रामा सेंटर परिसर में स्ट्रेचर पर फेंककर बदमाश फरार हो गए। सोमवार सुबह ट्रॉमा कर्मियों ने परिवारीजनों को सूचना दी। दोपहर में पहुंचे परिवारीजनों ने शव की शिनाख्त की।
सुल्तानपुर केपयागीपुर निवासी ज्ञानप्रकाश पाठक चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। ज्ञान केअलावा राम प्रकाश, हरिप्रकाश और रवि प्रकाश भाई है। परिवारीजनों के मुताबिक सभी केनाम पयागीपुर बाजार में पुश्तैनी जमीन है जिसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। इस जमीन पर दबंग ब्लॉक प्रमुख की निगाह काफी दिनों से लगी है। जिसने ज्ञान केहिस्से की करीब 95 लाख रुपए की जमीन हड़प ली है। इसके बाद भी उसके हिस्से की बाजार में करीब छह बिस्वा जमीन बची है। इस जमीन को हड़पने के लिए ही ज्ञान की हत्या की गई।
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रविवार सुबह इंडिका कार सवारों ने किया अगवा
ज्ञान केभांजे मोनू और भाई रवि प्रकाश सूचना मिलने पर लखनऊ पहुंचे। दोनों ने बताया कि रविवार सुबह ज्ञान केमोबाइल पर किसी ने कॉल किया। बात होने के बाद सुबह करीब साढ़े सात बजे वह पयागीपुर बाजार में पहुंचा। जहां गांव के कुछ लोगों ने प्रभाकर और कलाकार के साथ बात करते देखा। भांजे ने बताया कि इसके कुछ देर बाद वह इंडिका कार से दोनों के साथ ही निकले थे। गाड़ी जयंत चला रहा था। काफी देर तक जब ज्ञान घर नही लौटा तो परिवारीजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
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परिवारीजनों को नहीं मालूूम, गांव वालों ने कराया था भर्ती
इंस्पेक्टर चौक उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि ज्ञान की तबियत खराब थी। उसे कोई चोट नहीं लगी है। उसे बीमारी की हालत में गांव वालों ने सुल्तानपुर से ट्रामा सेंटर में लाकर भर्ती कराया था। इसकी जानकारी परिवारीजनों को नहीं हो पाई थी। सोमवार दोपहर परिवारीजन पहुंचे तो उन्होंने तलाश शुरू की। जब ज्ञान की मौत की सूचना मिली तो वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। परिवारीजनों ने कोई शिकायत नहीं की है।
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