MP Assembly Session : किसानों को कैबिनेट की सौगात; CM बोले- राहुल पहले तिलहन-दलहन जान लें
MP Vidhan Sabha Session: मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र में सीएम मोहन यादव ने किसान से जुड़े कैबीनेट के फैसले की जानकारी दी। वहीं भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भोपाल और इंदौर में हुए टकराव पर सदन में चर्चा करवाने का मुद्दा उठा।
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छोटे शहरों से निकले खिलाड़ी-विधायक उमाकांत शर्मा
विधायक शैलेन्द्र जैन ने कहा कि सागर में आधा दर्जन भवन ऐसे हैं जिनमें ठेकेदारों को पेमेंट हो गया है। रिपेयरिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है। सागर से भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि नगरीय विकास आवास विभाग के योजनाओं में धांधली हो रही है। सागर में कई ऐसे प्रमाण मिलते हैं। जैन ने कहा जयवर्धन जी का कथन सही है कई परिवारों के पास रजिस्ट्री नहीं है।भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि नगरीय निकाय और खेल विभाग का समन्वय बनाया जाए। हर निकाय में खेल ओलंपिक आयोजित कर छोटे शहरों के खिलाड़ियों को अवसर दिया जाए। बीजेपी विधायक उमाकांत शर्मा ने सदन में कहा कि बड़े शहरों में तो स्टेडियम बन गए हैं। खिलाड़ी भी निकल रहे हैं लेकिन छोटे शहरों से खिलाड़ी नहीं निकल रहे हैं। जरूरी है कि सरकार खेल और नगरीय विकास विभाग में समन्वय स्थापित कर नगर ओलंपिक जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करें ताकि शहरों के सूने पड़े हुए स्टेडियम भी खिलाड़ियों से भर पाए और प्रतिभा निकले।
अमृत योजना में गुणवत्तापूर्ण काम नहीं हुआ-कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह
नगरीय विकास आवास विभाग के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सदन में कहा कि अमृत योजना में गुणवत्ता का काम नहीं हुआ है। बीते 10-12 साल में जो डीपीआर बनी है, उसमें भविष्य का ध्यान नहीं रखा गया। भागीरथपुरा में भी यही हुआ था। प्रधानमंत्री आवास योजना में पहले रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं थी अब रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी गई है। लोगों पर अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। कई नियमों में संशोधन किया गया जो लोगों के लिए ठीक नहीं है। जो अत्यंत गरीब है वह रजिस्ट्री कैसे करेंगे।उन्होंने कहा कि मेट्रो को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जब तक नहीं जोड़ेंगे तब तक कुछ नहीं होने वाला मेट्रो कभी सफल नहीं होगी। मास्टर प्लान बहुत गंभीर विषय है 2005 के बाद भोपाल मास्टर प्लान नहीं बन पा रहा है इंदौर के मास्टर प्लान में लगातार देरी हो रही है। प्रदेश लगातार पिछड़ रहा है। CAG ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि जब वे मंत्री बने तब बाबूलाल गौर से मिलने के लिए गए थे। नगर निगम में स्वतंत्र संस्था नगरी निकाय स्वतंत्र संस्था है। उनका बजट अलग होता है उनका व्यय अलग होता है उनकी आय अलग होती है उनके प्रतिनिधि अलग होते हैं लेकिन सरकार ने उनके अधिकारों की चिंता नहीं की है। भोपाल नगर निगम की नई बिल्डिंग का पहला टेंडर 22 करोड़ का हुआ था। अब उसमें 72 करोड रुपए खर्च हो चुके हैं एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार किया गया है। प्रदेश के सभी 400 शहरों में पाइप लाइन से संबंधित प्रोजेक्ट्स में भारी धांधली की जा रही है
नगरीय विकास आवास विभाग का बजट हुआ कम-जयवर्धन सिंह
नगरीय विकास आवास विभाग के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सदन में कहा कि कुल बजट का पांच फीसदी नगरीय विकास आवास विभाग को आवंटित किया गया है। यह ऐसा विभाग है जो शहरों का संचालन करता है। शहरों की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है कम से कम कुल बजट का 10 फीसदी बजट दिया जाना चाहिए था। नगरीय विकास आवास विभाग की कई योजनाओं में बजट की कमी की गई है। अधोरचना विकास की राशि कम की गई है। मूलभूत सुविधाओं का अनुदान कम किया गया है। भागीरथपुरा से भी सरकार ने सबक नहीं लिया है। मल से जल की सुरक्षा के लिए मात्र 15 करोड रुपए का प्रावधान किया गया। कायाकल्प योजना में लगातार राशि कम की गई, जो 400 करोड़ की थी, वह अब 200 करोड़ ही रह गई है।सदन में दोनों ओर से तीखी नोकझोंक
विधानसभा में भोपाल और इंदौर में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच पत्थरबाजी पर ध्यानाकर्षण में चर्चा कराने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा की तरफ से आज सुबह ध्यानकर्षण दिया गया था। इस पर विपक्ष ने नियमों का हवाला देकर आपत्ति ली। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर और भोपाल दोनों जगह भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला कार्यकर्ता भी घायल हुई है, इसलिए इस गंभीर मामले पर चर्चा जरूरी है। सदस्य इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते हैं। वहीं कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उनके पार्टी कार्यालय पर हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने माहौल बिगाड़ने का काम किया है।
भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने कहा कि घटनास्थल पर पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी हो रही है? पांडे ने कहा कि शनिवार और रविवार होने की वजह से वे पहले प्रतिक्रिया नहीं दे पाए, लेकिन अब इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा से बचना चाहती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है। कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा की घटना पर चर्चा क्यों नहीं की जा रही? उन्होंने इसे गलत परंपरा बताते हुए सभी घटनाओं पर समान रूप से चर्चा की मांग की। सदन में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
किसानों के लिए बड़ा पैकेज
इसके साथ ही किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत अगले पांच वर्षों के लिए कुल 10,520 करोड़ रुपये की पांच कृषि योजनाओं को निरंतर जारी रखने की स्वीकृति दी गई है। आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इन योजनाओं को 1 अप्रैल 2026 से आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया।
जिन योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी गई है, उनमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (माइक्रो इरिगेशन), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन शामिल हैं।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ये घोषणाएं राहुल गांधी के संभावित दौरे के दबाव में की जा रही हैं? उन्होंने कहा कि यदि सरकार को यह निर्णय लेना था तो पहले भी लिया जा सकता था। इस पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी से पूछा जाना चाहिए कि तिलहन और दलहन में कौन-कौन सी फसलें आती हैं।
सदन में गूंजा सोसायटी चुनाव का मुद्दा
भाजपा विधायक अंबरीष शर्मा ‘गुड्डू’ ने सहकारी विभाग की मार्केटिंग सोसायटी लहार के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को वैधानिक घोषित किए जाने का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में डेढ़ वर्ष पहले आवेदन दिया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब जब दोबारा मामला उठाया गया तो संबंधित पक्ष को पत्र जारी किया गया है। विधायक ने कहा कि उन्होंने संचालक मंडल को अयोग्य घोषित करने की मांग भी की है, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब देते हुए कहा कि सदस्य के पत्र पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने माना कि कार्रवाई में कुछ विलंब हुआ है। मंत्री ने बताया कि संबंधित पक्ष को न्यायालय से कुछ राहत मिली हुई है, जिसे निरस्त (वैकट) कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में जिस अधिकारी की ओर से लापरवाही या देरी हुई है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में उठा हाकरी कारखाना मामला
जिलों में उद्योग स्थापना पर सवाल, सरकार ने बताई नई औद्योगिक योजना
विधानसभा में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस विधायक सेना महेश पटेल ने सरकार को घेरा। उन्होंने जिलों में उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके प्रश्न के जवाब में गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं और स्पष्ट नीति की जानकारी भी नहीं दी गई है।
इस पर मंत्री गौतम टेटवाल ने जवाब देते हुए बताया कि अलीराजपुर जिले में कुल 12,550 जीवित पंजीयन दर्ज हैं। प्रदेश में उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने निवेश प्रोत्साहन विभाग के अंतर्गत ‘उद्योग संवर्धन नीति 2025’ लागू की है। उन्होंने कहा कि रोजगार पोर्टल पर सभी इच्छुक युवा स्वयं पंजीयन करते हैं।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि अलीराजपुर जिले के छकतला कला में 6 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा सेजवाड़ा, तहसील चंद्रशेखर आजाद नगर में 21.3 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण किया गया है।
कुल सचिव के भुगतान पर सवाल, मंत्री बोले- सब कुछ नियमानुसार
छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा विधानसभा में गूंजा। भाजपा विधायक ललिता यादव ने आरोप लगाया कि शासन की प्रशासकीय स्वीकृति के बिना कुल सचिव द्वारा करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कुल सचिव बिना स्वीकृति 40 करोड़ रुपये तक का भुगतान कर सकता है।
इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने जवाब देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के प्रस्ताव के आधार पर कुलपति निवास और प्रशासकीय भवन निर्माण के लिए 17 करोड़ रुपये तथा बाउंड्री वॉल, गेट और गार्ड रूम निर्माण के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इस प्रकार कुल 27 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान विश्वविद्यालय द्वारा लोक निर्माण विभाग (पीआईयू), जिला छतरपुर को किया गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुल सचिव द्वारा यह भुगतान नियमानुसार किया गया है। यदि किसी को प्रक्रिया पर आपत्ति है तो मामले की जांच कराई जा सकती है।
टंट्या भील विश्वविद्यालय को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा
टंट्या भील विश्वविद्यालय को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा हुआ है। कांग्रेस विधायक डॉ. झूमा सोलंकी ने विश्वविद्यालय में शिक्षकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वर्तमान में कितने पद भरे हुए हैं, कितने रिक्त हैं और रिक्त पदों पर कब तक भर्ती की जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने लिखित जवाब में बताया कि विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर कृषि, कला, वाणिज्य (कंप्यूटर) और विज्ञान (कंप्यूटर) पाठ्यक्रम संचालित हैं। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम चल रहा है।
मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के 80, सह प्राध्यापक के 40 और प्राध्यापक के 20 पद स्वीकृत हैं। इस प्रकार कुल 140 शैक्षणिक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सभी पद रिक्त हैं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। अभी विश्वविद्यालय में कार्य परिषद का गठन नहीं हुआ है, इसलिए भर्ती की प्रक्रिया कुलपति के अधिकार क्षेत्र में है। पदों की पूर्ति की सटीक समय-सीमा बताना संभव नहीं है, हालांकि 4 से 5 माह में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
