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Kaithal News: 3 महीने से ज्यादा चली कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया, सीटें फिर भी खाली
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राजकीय कॉलेज कैथल।
कैथल। नए सत्र में स्नातक यानी यूजी पाठ्यक्रमों में कॉलेजों में बहुत कम दाखिले हुए। दाखिला प्रक्रिया पिछले साल की तुलना में लंबी रही लेकिन कॉलेजों में दाखिले नहीं हो पाए। कैथल के राजकीय कॉलेज में करीब चार महीने तक चली दाखिला प्रक्रिया के बाद 47.31 प्रतिशत सीटें खाली रह गईं। हालात ये हैं कि बीए मेजर इंग्लिश में एक और बीए मेजर गणित में सिर्फ दो दाखिले हो पाए हैं। बीएससी मेजर फिजिक्स में 14, मास कम्युनिकेशन में 16 और बीटीएम में 21 दाखिले हुए हैं।
कॉलेज में 780 सीटें हैं और 369 अब भी खाली हैं। इसके अलावा दाखिला लेने के बावजूद कॉलेजों में कम छात्र पढ़ रहे हैं। पहले से चले रहे कोर्स में यह आंकड़ा लगातार गिर रहा है। जिस कोर्स में प्रथम वर्ष में 40 दाखिले हुए थे, आज उनमें 15 से 20 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
कॉलेज में फैकल्टी के 62 में से सात खाली
राजकीय कॉलेज कैथल में फैकल्टी के 62 पद स्वीकृत हैं और 55 पद भरे हुए हैं। इनमें से अंग्रेजी के तीन, हिस्ट्री व पॉलिटिकल साइंस के दो पद खाली हैं।
ऐसा पहली बार हुआ...
स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष के लिए दाखिले की प्रक्रिया कई चरणों में चली। उच्च शिक्षा विभाग ने 7 मई को ही पंजीकरण शुरू कर दिए थे। पहले इसको 31 मई तक बढ़ाया गया, फिर 15 जून और बाद में इसको बढ़ाते गए और 12 जुलाई तक आवेदन चले। उसके बाद मेरिट लिस्ट और फिजिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया 23 अगस्त तक चली। दोबारा पोर्टल भी खोले गए लेकिन दाखिलों की संख्या कम रही।
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शिफ्ट करने पड़ेंगे छात्र
बीए मेजर इंग्लिश और बीए मेजर गणित में सिर्फ तीन दाखिले हुए हैं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार इनको अन्य कोर्स में शिफ्ट करना पड़ेगा, क्योंकि एक या दो छात्रों के लिए पूरे साल पाठ्यक्रम चलाना और पढ़ाई करवाना संभव नहीं है।
बीकॉम में 49 और बीए में 11 सीटें खाली
राजकीय कॉलेज में बीए और बीकॉम जैसे प्रसिद्ध कोर्स में भी सीटें नहीं भर सकी हैं। बीए में अब भी 9 और बीकॉम में 49 सीटें खाली हैं। सबसे ज्यादा बीएएससी फिजिकल साइंस में 112 सीटें खाली हैं। इसके अलावा बीबीए में 11 और बीएएसी मेजर फिजिक्स में भी 26 सीटें खाली हैं।
उच्च शिक्षा विभाग को मंथन की जरूरत ...
ये ट्रेंड नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से इन कोर्स में दाखिले लगातार गिर रहे हैं। जबकि पॉलिटेक्निक कॉलेजों, राजकीय आईटीआई व कंप्यूटर कोर्स में पिछले कुछ वर्षों से लगातार दाखिले बढ़ रहे हैं जो बदलते ट्रेंड को दिखाता है। कॉलेजों की जगह दूसरे संस्थान स्किल वर्क फोर्स तैयार कर रहे हैं। यही कारण है कि इनमें युवाओं और अभिभावकों की रूचि बढ़ी है और इनकी विदेशों में भी मांग ज्यादा है।
-डाॅ. संजय गोयल, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, आरकेएसडी कॉलेज, कैथल।
पहले की तुलना में दाखिला प्रक्रिया लंबी चली लेकिन इसका लाभ मिलना चाहिए था, जबकि आंकड़े इसके उलट हैं। सीटें खाली रहने के प्रमुख कारणों में युवाओं और अभिभावकों की बदलती सोच, कॉलेजों की बढ़ती संख्या और नौकरी के लिए वर्षों तक इंतजार न करने की प्रवृत्ति शामिल है। युवा अब ऐसे डिप्लोमा और स्किल कोर्स पसंद कर रहे हैं, जिनके बाद देश-विदेश में रोजगार के अवसर मिल सकें।
- डॉ. मनोज भांबू, जिला नोडल अधिकारी, उच्चतर शिक्षा विभाग, कैथल।
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कॉलेज में 780 सीटें हैं और 369 अब भी खाली हैं। इसके अलावा दाखिला लेने के बावजूद कॉलेजों में कम छात्र पढ़ रहे हैं। पहले से चले रहे कोर्स में यह आंकड़ा लगातार गिर रहा है। जिस कोर्स में प्रथम वर्ष में 40 दाखिले हुए थे, आज उनमें 15 से 20 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
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कॉलेज में फैकल्टी के 62 में से सात खाली
राजकीय कॉलेज कैथल में फैकल्टी के 62 पद स्वीकृत हैं और 55 पद भरे हुए हैं। इनमें से अंग्रेजी के तीन, हिस्ट्री व पॉलिटिकल साइंस के दो पद खाली हैं।
ऐसा पहली बार हुआ...
स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष के लिए दाखिले की प्रक्रिया कई चरणों में चली। उच्च शिक्षा विभाग ने 7 मई को ही पंजीकरण शुरू कर दिए थे। पहले इसको 31 मई तक बढ़ाया गया, फिर 15 जून और बाद में इसको बढ़ाते गए और 12 जुलाई तक आवेदन चले। उसके बाद मेरिट लिस्ट और फिजिकल काउंसलिंग की प्रक्रिया 23 अगस्त तक चली। दोबारा पोर्टल भी खोले गए लेकिन दाखिलों की संख्या कम रही।
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शिफ्ट करने पड़ेंगे छात्र
बीए मेजर इंग्लिश और बीए मेजर गणित में सिर्फ तीन दाखिले हुए हैं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार इनको अन्य कोर्स में शिफ्ट करना पड़ेगा, क्योंकि एक या दो छात्रों के लिए पूरे साल पाठ्यक्रम चलाना और पढ़ाई करवाना संभव नहीं है।
बीकॉम में 49 और बीए में 11 सीटें खाली
राजकीय कॉलेज में बीए और बीकॉम जैसे प्रसिद्ध कोर्स में भी सीटें नहीं भर सकी हैं। बीए में अब भी 9 और बीकॉम में 49 सीटें खाली हैं। सबसे ज्यादा बीएएससी फिजिकल साइंस में 112 सीटें खाली हैं। इसके अलावा बीबीए में 11 और बीएएसी मेजर फिजिक्स में भी 26 सीटें खाली हैं।
उच्च शिक्षा विभाग को मंथन की जरूरत ...
ये ट्रेंड नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से इन कोर्स में दाखिले लगातार गिर रहे हैं। जबकि पॉलिटेक्निक कॉलेजों, राजकीय आईटीआई व कंप्यूटर कोर्स में पिछले कुछ वर्षों से लगातार दाखिले बढ़ रहे हैं जो बदलते ट्रेंड को दिखाता है। कॉलेजों की जगह दूसरे संस्थान स्किल वर्क फोर्स तैयार कर रहे हैं। यही कारण है कि इनमें युवाओं और अभिभावकों की रूचि बढ़ी है और इनकी विदेशों में भी मांग ज्यादा है।
-डाॅ. संजय गोयल, सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, आरकेएसडी कॉलेज, कैथल।
पहले की तुलना में दाखिला प्रक्रिया लंबी चली लेकिन इसका लाभ मिलना चाहिए था, जबकि आंकड़े इसके उलट हैं। सीटें खाली रहने के प्रमुख कारणों में युवाओं और अभिभावकों की बदलती सोच, कॉलेजों की बढ़ती संख्या और नौकरी के लिए वर्षों तक इंतजार न करने की प्रवृत्ति शामिल है। युवा अब ऐसे डिप्लोमा और स्किल कोर्स पसंद कर रहे हैं, जिनके बाद देश-विदेश में रोजगार के अवसर मिल सकें।
- डॉ. मनोज भांबू, जिला नोडल अधिकारी, उच्चतर शिक्षा विभाग, कैथल।

राजकीय कॉलेज कैथल।