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बेखौफ होकर तारबंदी के पास चारा काट रहे किसान, जानिए पाकिस्तान की मंशा पर लोगों की राय
Sun, 07 Mar 2021 03:29 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 07 Mar 2021 03:29 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भारत-पाकिस्तान के मध्य हुए संर्घषविराम समझौते के बाद से सीमावर्ती गांवों के किसानों को राहत मिली है। सांबा जिले में किसान बेखौफ होकर जीरो लाइन पर तारबंदी के निकट जाकर चार काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब वह बिना किसी डर के अपनी फसल की बिजाई और कटाई कर सकेंगे। हालांकि किसानों को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। बता दें, समझौते से पहले लगातार हो रही गोलाबारी से किसान खेती नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब उन्हें जीरो लाइन पर फसल लहलहाने की उम्मीद है।
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जिला के सीमावर्ती गांव मंगुचक निवासी बलवीर सिंह का कहना है कि उनकी भूमि जीरो लाइन के निकट है। गोलाबारी के चलते काफी समय से वह खेती नहीं कर पा रहे थे। अब दोनो देशों के मध्य हुए संघर्ष विराम समझौते से उन्हें कुछ राहत मिली है। यदि पाकिस्तान अपने वादे पर कायम रहता है तो वे बेखौफ हो कर अपनी भूमि पर काश्त कर सकेंगे।
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सीमावर्ती गांव चलेआरी के किसान मनोहर लाल का कहना है कि पाकिस्तान की मंशा हमेशा संदेह भरी रही है। उस पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान हमेशा अपने मतलब के लिए संघर्ष विराम करता है। सीमावर्ती पंचायत चक दुलमा के सरपंच विनय शर्मा ने कहा कि उनकी पंचायत सीमा के पास है। यहां किसान हर समय भयभीत रहते थे। अब संघर्ष विराम समझौते से राहत मिली है। अब तारबंदी के आगे की भूमि पर भी किसान खेती कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि उनकी पंचायत के किसानों की ही 200 कनाल से अधिक भूमि तारबंदी के आगे है, जहां किसान खेती ही नही कर पाते थे। अब उन्हें उमीद जगी है कि वह अपनी भूमि पर फसल लगा सकेेंगे।
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