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वो कश्मीरी 'शेर': जिसने चार दिन पाक को उलझाए रखा, पढ़िए- बारामुला के नायक मकबूल शेरवानी की कहानी

Sat, 06 Mar 2021 04:07 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, जम्मू-कश्मीर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, जम्मू-कश्मीर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 06 Mar 2021 04:07 PM IST
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Maqbool Sherwani Baramula kashmir special story
मकबूल शेरवानी की वीरता का बखान करता है ये स्थान - फोटो : साकिब नबी

कश्मीर में मकबूल शेरवानी का नाम जब भी लोगों की जुबां पर आता है तो उनकी वीरता, पराक्रम और देशप्रेम के चर्चों का दौर शुरू हो जाता है। मकबूल शेरवानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनको आज याद करने की एक विशेष वजह है। देश की आजादी की 75वीं सालगिरह पर जम्मू-कश्मीर में 12 मार्च से अमृत महोत्सव शुरू होगा। यह महोत्सव 75 सप्ताह तक चलेगा। जिसमें मकबूल शेरवानी की जन्मस्थली बारामुला में कार्यक्रम भी होगा। इस दौरान उनकी वीरता और साहस के बारे में युवा पीढ़ी को रूबरू कराया जाएगा। जानिए पाकिस्तान को पस्त कर देने वाले बारामुला के वीर सपूत के बारे में...

Maqbool Sherwani Baramula kashmir special story
मकबूल शेरवानी की वीरता का बखान करता है ये स्थान - फोटो : साकिब नबी

मकबूल शेरवानी ने पाकिस्तानी बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाई थी। बारामुला में पाकिस्तानी सेना समर्थित कबाइलियों को 1947 में चार दिन तक उलझाए रखा था ताकि भारतीय सेना वहां पहुंच सके। हमलावरों का मकबूल शेरवानी और उनके साथियों ने डटकर सामना किया था। इसी दौरान उन्होंने शहादत दी थी। शेरवानी को बारामुला के रक्षक के तौर पर भी जाना जाता है।

Maqbool Sherwani Baramula kashmir special story
मकबूल शेरवानी की वीरता का बखान करता है ये स्थान - फोटो : साकिब नबी

उस तारीख से लेकर आज तक बारामुला के नायक मकबूल शेरवानी की शहादत, पाकिस्तान के कथित धर्म युद्ध की असलियत का भंडाफोड़ करती है। हमले के समय कश्मीर के लोगों ने आगे आकर हमलावरों को रोका था, उन्होंने नारा लगाया था ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’। उस समय उनके पास बंदूकें नहीं थीं लेकिन उन्होंने लाठियों के सहारे अपनी बहादुरी दिखाई।

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Maqbool Sherwani Baramula kashmir special story
मकबूल शेरवानी की वीरता का बखान करता है ये स्थान - फोटो : साकिब नबी
कबाइलियों के भेष में थे पाकिस्तानी सैनिक

पाकिस्तान ने न केवल 1999 के कारगिल युद्ध में झूठ बोला, बल्कि 1947 में भी झूठ बोला था जब उसने अपनी सेना के जवानों को पख्तूनी कपड़े पहना दिए थे। कहा जाता है कि प्रत्येक कबाइली दल की कमान पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने संभाली थी। 22 अक्तूबर को कश्मीर और कश्मीरियत पर लगाए गए घावों के पीछे पाकिस्तान का हाथ था। 


 
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Maqbool Sherwani Baramula kashmir special story
मकबूल शेरवानी की वीरता का बखान करता है ये स्थान - फोटो : साकिब नबी
शेख अब्दुल्ला ने 1948 में कहा था कि पाकिस्तानी हमलावरों ने हमारी धरती पर हजारों बेगुनाहों को मार डाला, सभी धर्मों की लड़कियों का अपहरण कर दुष्कर्म किया और संपत्तियों को नष्ट कर दिया। 
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