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Hamirpur (Himachal) News: सिलाई-कढ़ाई से मजबूत की आर्थिक स्थिति
Sat, 04 Apr 2026 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 04 Apr 2026 12:58 AM IST
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चाहब की पूजा घर पर कपड़ों की सिलाई करते हुए। संवाद
हमीरपुर। सफलता के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। चाहब क्षेत्र की पूजा ने सीमित साधनों में अपने हुनर और मेहनत के दम पर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि अपने परिवार को भी सहारा दिया है।
साधारण परिवार से संबंध रखने वाली पूजा के घर की आर्थिक स्थिति पहले मजबूत नहीं थी, जिसके चलते उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में उन्होंने अपने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को ही अपनी ताकत बनाया और घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया।
शुरुआत में उनके पास ज्यादा ग्राहक नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों के कपड़े, महिलाओं के सूट, ब्लाउज और अन्य वस्त्रों की सिलाई का काम करना जारी रखा। कढ़ाई में विशेष रुचि होने के कारण उनके काम में अलग निखार आया, जिससे ग्राहकों को उनके डिजाइन और फिनिशिंग पसंद आने लगी।
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सिलाई के साथ-साथ पूजा ने अपने घर पर ही एक छोटा मनियारी का कारोबार भी शुरू किया। इसमें उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे कॉस्मेटिक सामान, चूड़ियां, बिंदी और हेयर एक्सेसरी आदि रखना शुरू किया। यह कदम उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। जो ग्राहक सिलाई के लिए आते थे, वे मनियारी का सामान भी खरीदने लगे, जिससे उनकी आमदनी के दो स्रोत बन गए।
पूजा के पति पेंटर का काम करते हैं, लेकिन अकेले पूरे घर का खर्च संभालना मुश्किल था। अब पूजा की आय से घर की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है और वह पति के साथ मिलकर खर्चों को संभाल रही हैं।
आज पूजा सिलाई-कढ़ाई के काम से हर महीने लगभग 7 से 8 हजार रुपये कमा रही हैं, जबकि मनियारी के कारोबार से उन्हें अतिरिक्त आय भी हो जाती है।
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साधारण परिवार से संबंध रखने वाली पूजा के घर की आर्थिक स्थिति पहले मजबूत नहीं थी, जिसके चलते उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में उन्होंने अपने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को ही अपनी ताकत बनाया और घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया।
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शुरुआत में उनके पास ज्यादा ग्राहक नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों के कपड़े, महिलाओं के सूट, ब्लाउज और अन्य वस्त्रों की सिलाई का काम करना जारी रखा। कढ़ाई में विशेष रुचि होने के कारण उनके काम में अलग निखार आया, जिससे ग्राहकों को उनके डिजाइन और फिनिशिंग पसंद आने लगी।
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सिलाई के साथ-साथ पूजा ने अपने घर पर ही एक छोटा मनियारी का कारोबार भी शुरू किया। इसमें उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे कॉस्मेटिक सामान, चूड़ियां, बिंदी और हेयर एक्सेसरी आदि रखना शुरू किया। यह कदम उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। जो ग्राहक सिलाई के लिए आते थे, वे मनियारी का सामान भी खरीदने लगे, जिससे उनकी आमदनी के दो स्रोत बन गए।
पूजा के पति पेंटर का काम करते हैं, लेकिन अकेले पूरे घर का खर्च संभालना मुश्किल था। अब पूजा की आय से घर की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है और वह पति के साथ मिलकर खर्चों को संभाल रही हैं।
आज पूजा सिलाई-कढ़ाई के काम से हर महीने लगभग 7 से 8 हजार रुपये कमा रही हैं, जबकि मनियारी के कारोबार से उन्हें अतिरिक्त आय भी हो जाती है।