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Hamirpur (Himachal) News: पेड़ों की अधिकता से एफसीए क्लीयरेंस पर मंत्रालय ने जताई आपत्ति
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कैंसर, नर्सिंग कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए भेजी गई थी एफसीए की फाइल
वन विभाग के अधिकारियों ने अन्य विभागों के साथ मिलकर किया मौके का निरीक्षण
आपत्तियों को लेकर सभी अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज सभागार में बैठकर की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। निर्माणाधीन डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर स्थित जोलसप्पड़ के साथ ही प्रस्तावित कैंसर अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए एफसीए (वन संरक्षण अधिनियम) क्लीयरेंस के लिए भेजी फाइल पर कुछ आपत्तियां लगाई गई हैं। यह आपत्तियां पर्यावरण और वन मंत्रालय के चंडीगढ़ स्थित रीजनल कार्यालय की ओर से लगाई गई हैं। इन आपत्तियों के बाद वन विभाग के अधिकारियों के अलावा मेडिकल कॉलेज प्रशासन व राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर संयुक्त निरीक्षण किया है। फाइल पर लगी आपत्तियों को तकनीकी रूप से हटाने के लिए विस्तारपूर्वक चर्चा की गई ताकि अति शीघ्र फाइल पर लगी आपत्तियों को दूर करके वन विभाग की अनुमति के लिए दोबारा से भेजा जाए। इन संस्थानों के लिए प्रस्तावित भूमि पर पेड़ों का घनत्व अधिक होने की वजह से पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्तियां लगा दी हैं। उसी के चलते सभी संबंधित विभागों की उपस्थिति में मौके पर जाकर प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया गया है ताकि पेड़ों के उच्च घनत्व वाले क्षेत्र को प्रस्तावित परियोजना से बाहर करके कम से कम पेड़ काटे जाएं। इस तरह से परियोजना के नक्शे को कम पेड़ों वाले क्षेत्र में व्यवस्थित किया जाए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को अति शीघ्र परियोजना के तहत आने वाली भूमि के बदले कम पेड़ों वाली भूमि की प्रस्तावना भेजने के लिए आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि साथ लगते गांव के लिए जाने वाली पुरानी सड़क को भी नक्शे से बाहर कर दिया गया है ताकि क्षेत्रवासियों को आने जाने में कोई भी असुविधा न हो। इस मौके पर सलाहकार विनोद रांटा, वन विभाग के कंजरवेटर, वन मंडल अधिकारी हमीरपुर अंकित, राजस्व विभाग की ओर से नायब तहसीलदार कांगू बलवंत सिंह के अलावा वन परिक्षेत्र अधिकारी राजीव सूद व फील्ड कानूनगो देशराज आदि उपस्थित रहे।
कोट्स
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि वन भूमि का तबादला होने को लेकर वन विभाग की अनुमति लेने के लिए भेजी गई फाइल पर पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आपत्तियां लगाई गई थीं। उन्हीं को दूर करने के लिए निरीक्षण किया गया।
वन विभाग के अधिकारी एपीसीसीएफ संजय सूद ने कहा कि परियोजना नक्शे को कम पेड़ों वाले क्षेत्र में व्यवस्थित किया जाए, इसके लिए आदेश दिए गए हैं।
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वन विभाग के अधिकारियों ने अन्य विभागों के साथ मिलकर किया मौके का निरीक्षण
आपत्तियों को लेकर सभी अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज सभागार में बैठकर की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। निर्माणाधीन डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर स्थित जोलसप्पड़ के साथ ही प्रस्तावित कैंसर अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए एफसीए (वन संरक्षण अधिनियम) क्लीयरेंस के लिए भेजी फाइल पर कुछ आपत्तियां लगाई गई हैं। यह आपत्तियां पर्यावरण और वन मंत्रालय के चंडीगढ़ स्थित रीजनल कार्यालय की ओर से लगाई गई हैं। इन आपत्तियों के बाद वन विभाग के अधिकारियों के अलावा मेडिकल कॉलेज प्रशासन व राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर संयुक्त निरीक्षण किया है। फाइल पर लगी आपत्तियों को तकनीकी रूप से हटाने के लिए विस्तारपूर्वक चर्चा की गई ताकि अति शीघ्र फाइल पर लगी आपत्तियों को दूर करके वन विभाग की अनुमति के लिए दोबारा से भेजा जाए। इन संस्थानों के लिए प्रस्तावित भूमि पर पेड़ों का घनत्व अधिक होने की वजह से पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्तियां लगा दी हैं। उसी के चलते सभी संबंधित विभागों की उपस्थिति में मौके पर जाकर प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया गया है ताकि पेड़ों के उच्च घनत्व वाले क्षेत्र को प्रस्तावित परियोजना से बाहर करके कम से कम पेड़ काटे जाएं। इस तरह से परियोजना के नक्शे को कम पेड़ों वाले क्षेत्र में व्यवस्थित किया जाए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को अति शीघ्र परियोजना के तहत आने वाली भूमि के बदले कम पेड़ों वाली भूमि की प्रस्तावना भेजने के लिए आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि साथ लगते गांव के लिए जाने वाली पुरानी सड़क को भी नक्शे से बाहर कर दिया गया है ताकि क्षेत्रवासियों को आने जाने में कोई भी असुविधा न हो। इस मौके पर सलाहकार विनोद रांटा, वन विभाग के कंजरवेटर, वन मंडल अधिकारी हमीरपुर अंकित, राजस्व विभाग की ओर से नायब तहसीलदार कांगू बलवंत सिंह के अलावा वन परिक्षेत्र अधिकारी राजीव सूद व फील्ड कानूनगो देशराज आदि उपस्थित रहे।
कोट्स
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि वन भूमि का तबादला होने को लेकर वन विभाग की अनुमति लेने के लिए भेजी गई फाइल पर पर्यावरण मंत्रालय की ओर से आपत्तियां लगाई गई थीं। उन्हीं को दूर करने के लिए निरीक्षण किया गया।
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वन विभाग के अधिकारी एपीसीसीएफ संजय सूद ने कहा कि परियोजना नक्शे को कम पेड़ों वाले क्षेत्र में व्यवस्थित किया जाए, इसके लिए आदेश दिए गए हैं।