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Bilaspur News: कृष्ण जन्म की लीला सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 28 Aug 2025 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 28 Aug 2025 11:54 PM IST
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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु। संवाद
लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही है श्रीमद्भागवत कथा
चौथे दिन नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष गूंजे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य नीरज शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया। कथा के बीच मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष गूंज उठा।
आचार्य नीरज शर्मा ने बताया कि किस प्रकार अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और जीजा वसुदेव को कारागार में डालकर एक-एक कर छह संतानें मौत के घाट उतार दीं। सातवीं संतान बलराम को योगमाया की कृपा से सुरक्षित निकाल लिया गया और आठवीं संतान के रूप में जब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया तो संपूर्ण कारागार दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। उन्होंने कहा कि कंस ने गोकुल और वृंदावन में भी पूतना, तृणावर्त, अघासुर और बकासुर जैसे राक्षस भेजकर कृष्ण वध के प्रयास किए, लेकिन हर बार अधर्म पर धर्म की विजय हुई और श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रकट हुईं। इस दौरान मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित होकर भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं और भक्ति रस में डूब रहे हैं।
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चौथे दिन नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष गूंजे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य नीरज शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया। कथा के बीच मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष गूंज उठा।
आचार्य नीरज शर्मा ने बताया कि किस प्रकार अत्याचारी राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और जीजा वसुदेव को कारागार में डालकर एक-एक कर छह संतानें मौत के घाट उतार दीं। सातवीं संतान बलराम को योगमाया की कृपा से सुरक्षित निकाल लिया गया और आठवीं संतान के रूप में जब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया तो संपूर्ण कारागार दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। उन्होंने कहा कि कंस ने गोकुल और वृंदावन में भी पूतना, तृणावर्त, अघासुर और बकासुर जैसे राक्षस भेजकर कृष्ण वध के प्रयास किए, लेकिन हर बार अधर्म पर धर्म की विजय हुई और श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रकट हुईं। इस दौरान मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित होकर भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं और भक्ति रस में डूब रहे हैं।
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