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आखिर कौन ले गया मैनेजर का सिर, बना पहेली
Updated Mon, 19 Feb 2018 11:29 PM IST
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बरमाणा (बिलासपुर)। महाशिवरात्रि को लापता हुए अल्ट्राटेक कंपनी के वित्त विभाग के मैनेजर अवधेश शाही का शव क्षत-विक्षत मिलने से इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। छह दिन बाद शाही का शव मिला है, उससे तो यही लग रहा है कि उसको मारकर फेंका गया है। लेकिन पुलिस ने अभी तक आईपीसी की धारा 174 के तहत ही मामला दर्ज किया है।
स्थानीय लोगों की मानें तो जहां मृतक की लाश मिली है, वहां पहाड़ी से गिरकर पहुंचना संभव नहीं है। यानी यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत किया गया कत्ल है। लेकिन वहीं थाना प्रभारी बागा देशराज गुलेरिया का कहना है कि यह एक प्राकृतिक मौत है जो कि गिरने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि अभी तक पुलिस ने इस मामले को आईपीसी की धारा 174 के तहत ही दर्ज किया है। उसी के तहत कार्रवाई भी की जा रही है। आगामी कार्रवाई फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट और शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अमल में लाई जाएगी।
शव कठपौल टिब्बा बाबा बालक नाथ मंदिर से लगभग डेढ़ से 600 मीटर की दूरी पर जंगल के बीचों-बीच पड़ा मिला था। स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव अपने कब्जे में लिया। जांच के लिए शिमला से फोरेंसिक टीम सोमवार सुबह मौके पर पहुंची।
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गौरतलब है कि अवधेश शाही मूल रूप से मिर्जापुर बिहार का रहने वाला था। अल्ट्राटेक कंपनी के वित्त विभाग में पिछले पांच वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहा था। मृतक के परिवार में उसकी पत्नी, दो बेटियां और बेटा है। महाशिवरात्रि पर वह इलाके के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर कठपौल टिब्बा माथा टेकने गया था। शाम सात बजे घर फोन कर पत्नी को बताया था कि वह वापस आ रहा है, लेकिन घर नहीं पहुंचा।
हैरानी की बात यह है कि मृतक का आधा शव ही पुलिस के हाथ लगा। उसकी गर्दन और एक हाथ की अंगुलियां कटी हुई हैं। पुलिस अंदाजा लगा रही थी कि मृतक या तो मंदिर की पहाड़ी से फिसल कर कही जंगल में गिर गया है या उसे कोई जंगली जानवर खा गया है। लेकिन शव का इस हालत में मिलना कुछ और ही बयां कर रहा है। शव का इन हालातों में मिलना और स्थानीय लोगों का इशारा कत्ल की तरफ करना, इससे यह साबित होता है कि सिर्फ 174 के तहत मुकदमा दर्ज करने से अवधेश शाही की मौत का राज नहीं खुल पाएगा। इसके लिए पुलिस को आगामी कार्रवाई ताजा हालातों को ध्यान में रखकर करनी होगी। तभी मृतक और उसके परिवार को न्याय मिल सकेगा।
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स्थानीय लोगों की मानें तो जहां मृतक की लाश मिली है, वहां पहाड़ी से गिरकर पहुंचना संभव नहीं है। यानी यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची समझी रणनीति के तहत किया गया कत्ल है। लेकिन वहीं थाना प्रभारी बागा देशराज गुलेरिया का कहना है कि यह एक प्राकृतिक मौत है जो कि गिरने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि अभी तक पुलिस ने इस मामले को आईपीसी की धारा 174 के तहत ही दर्ज किया है। उसी के तहत कार्रवाई भी की जा रही है। आगामी कार्रवाई फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट और शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अमल में लाई जाएगी।
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शव कठपौल टिब्बा बाबा बालक नाथ मंदिर से लगभग डेढ़ से 600 मीटर की दूरी पर जंगल के बीचों-बीच पड़ा मिला था। स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव अपने कब्जे में लिया। जांच के लिए शिमला से फोरेंसिक टीम सोमवार सुबह मौके पर पहुंची।
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गौरतलब है कि अवधेश शाही मूल रूप से मिर्जापुर बिहार का रहने वाला था। अल्ट्राटेक कंपनी के वित्त विभाग में पिछले पांच वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहा था। मृतक के परिवार में उसकी पत्नी, दो बेटियां और बेटा है। महाशिवरात्रि पर वह इलाके के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर कठपौल टिब्बा माथा टेकने गया था। शाम सात बजे घर फोन कर पत्नी को बताया था कि वह वापस आ रहा है, लेकिन घर नहीं पहुंचा।
हैरानी की बात यह है कि मृतक का आधा शव ही पुलिस के हाथ लगा। उसकी गर्दन और एक हाथ की अंगुलियां कटी हुई हैं। पुलिस अंदाजा लगा रही थी कि मृतक या तो मंदिर की पहाड़ी से फिसल कर कही जंगल में गिर गया है या उसे कोई जंगली जानवर खा गया है। लेकिन शव का इस हालत में मिलना कुछ और ही बयां कर रहा है। शव का इन हालातों में मिलना और स्थानीय लोगों का इशारा कत्ल की तरफ करना, इससे यह साबित होता है कि सिर्फ 174 के तहत मुकदमा दर्ज करने से अवधेश शाही की मौत का राज नहीं खुल पाएगा। इसके लिए पुलिस को आगामी कार्रवाई ताजा हालातों को ध्यान में रखकर करनी होगी। तभी मृतक और उसके परिवार को न्याय मिल सकेगा।