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मन की शुद्धि के लिए भागवत सबसे बड़ा साधन : सुरेश
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-अमरपुर में शुरू शोभायात्रा के साथ हुई श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं के अमरपुर गांव में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश और शोभायात्रा का साथ किया गया। इस कथा में पंडित सुरेश भारद्वाज कथावाचन कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने वाचन करते हुए लोगों को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास द्वारा संक्षेप में भागवत पुराण के स्थान, विषय और महत्व का वर्णन किया गया है। यह पुराण हिंदू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं इसमें विस्तृत रूप से प्रस्तुत हैं। भागवत पुराण के श्लोक और अध्यायों की संख्या के कारण इसे अष्टादश पुराणों में गिना जाता है। इस पुराण के स्कंध में विष्णु के अवतारों का संपूर्ण वर्णन है। स्कंध-1 में सृष्टि का विस्तृत वर्णन है, जिसमें वेदों का महत्व और धर्म का उपदेश दिया गया है। स्कंध दो से दस तक में विष्णु के विभिन्न अवतारों की चरित्र कथाएं हैं। इनमें श्रीकृष्ण का जीवन विशेष रूप से विस्तारपूर्वक बताया गया है। यहां पर उनके बाल लीलाएं, कंस वध, गीता उपदेश, ब्रजवासियों के साथ नीति नियमों का पालन आदि का वर्णन मिलता है। भागवत पुराण में रसभाव की अद्भुतता और भक्ति रस की अमृतधारा विद्यमान है। श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसीलिए श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पाठन और श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। भागवत के पाठ से कलियुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। कथा के बाद भजन कीर्तन और प्रसाद वितरण किया गया।
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बिलासपुर। घुमारवीं के अमरपुर गांव में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कलश और शोभायात्रा का साथ किया गया। इस कथा में पंडित सुरेश भारद्वाज कथावाचन कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने वाचन करते हुए लोगों को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताया।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेद व्यास द्वारा संक्षेप में भागवत पुराण के स्थान, विषय और महत्व का वर्णन किया गया है। यह पुराण हिंदू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और भगवान विष्णु के अवतारों की कथाएं इसमें विस्तृत रूप से प्रस्तुत हैं। भागवत पुराण के श्लोक और अध्यायों की संख्या के कारण इसे अष्टादश पुराणों में गिना जाता है। इस पुराण के स्कंध में विष्णु के अवतारों का संपूर्ण वर्णन है। स्कंध-1 में सृष्टि का विस्तृत वर्णन है, जिसमें वेदों का महत्व और धर्म का उपदेश दिया गया है। स्कंध दो से दस तक में विष्णु के विभिन्न अवतारों की चरित्र कथाएं हैं। इनमें श्रीकृष्ण का जीवन विशेष रूप से विस्तारपूर्वक बताया गया है। यहां पर उनके बाल लीलाएं, कंस वध, गीता उपदेश, ब्रजवासियों के साथ नीति नियमों का पालन आदि का वर्णन मिलता है। भागवत पुराण में रसभाव की अद्भुतता और भक्ति रस की अमृतधारा विद्यमान है। श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। इसीलिए श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके पाठन और श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। भागवत के पाठ से कलियुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। कथा के बाद भजन कीर्तन और प्रसाद वितरण किया गया।
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