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Bilaspur News: पुराने दीवानी मामले में नए दस्तावेज पेश करने की अर्जी खारिज
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बहस के चरण में पहुंचा मामला, अदालत ने कहा- दस्तावेज पेश करने का पहले ही मिल चुका था मौका
मामले में अब 26 सितंबर को होगी बहस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वरिष्ठ सिविल जज घुमारवीं की अदालत ने 13 वर्ष पुराने दीवानी मामले में नए दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों को अब रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई है, वे वर्ष 2021 और 2024 के हैं। इन्हें साक्ष्य के दौरान पेश करने का पर्याप्त अवसर था, लेकिन उस समय दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।
वादी पक्ष ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 14(3) के तहत अर्जी दायर की थी। इसमें 12 मार्च 2024 को एसडीएम घुमारवीं और सात जनवरी 2021 को सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी घुमारवीं की ओर से पारित आदेशों की प्रतियां रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति मांगी गई थी। वादी पक्ष ने कहा कि बहस की तैयारी के दौरान इन दस्तावेजों की जानकारी मिली और मामले के उचित निर्णय के लिए इन्हें रिकॉर्ड पर लेना जरूरी है। प्रतिवादी पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामला बहस के चरण में पहुंच चुका है और वादी की साक्ष्य पहले ही बंद हो चुकी है। अब दस्तावेज लेने की अनुमति देने से कार्यवाही लंबी खिंच सकती है।
अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि मामला 11 जुलाई 2013 को दायर हुआ था और छह मार्च 2018 को मुद्दे तय किए गए थे। वादी पक्ष को साक्ष्य पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर मिले थे। ऐसे में बहस के चरण में नए दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए बहस के लिए 26 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।
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मामले में अब 26 सितंबर को होगी बहस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। वरिष्ठ सिविल जज घुमारवीं की अदालत ने 13 वर्ष पुराने दीवानी मामले में नए दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने के लिए दायर अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों को अब रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई है, वे वर्ष 2021 और 2024 के हैं। इन्हें साक्ष्य के दौरान पेश करने का पर्याप्त अवसर था, लेकिन उस समय दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।
वादी पक्ष ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 14(3) के तहत अर्जी दायर की थी। इसमें 12 मार्च 2024 को एसडीएम घुमारवीं और सात जनवरी 2021 को सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी घुमारवीं की ओर से पारित आदेशों की प्रतियां रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति मांगी गई थी। वादी पक्ष ने कहा कि बहस की तैयारी के दौरान इन दस्तावेजों की जानकारी मिली और मामले के उचित निर्णय के लिए इन्हें रिकॉर्ड पर लेना जरूरी है। प्रतिवादी पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि मामला बहस के चरण में पहुंच चुका है और वादी की साक्ष्य पहले ही बंद हो चुकी है। अब दस्तावेज लेने की अनुमति देने से कार्यवाही लंबी खिंच सकती है।
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अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि मामला 11 जुलाई 2013 को दायर हुआ था और छह मार्च 2018 को मुद्दे तय किए गए थे। वादी पक्ष को साक्ष्य पेश करने के लिए पर्याप्त अवसर मिले थे। ऐसे में बहस के चरण में नए दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए बहस के लिए 26 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।
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