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जुलाई से निराश, अगस्त पर आस

Fri, 12 Aug 2016 12:29 AM IST
Sonipat
Sonipat Updated Fri, 12 Aug 2016 12:29 AM IST
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201 mm rain on july in sonipat, monsoon season, rain water, sonipat
rain - फोटो : demo
बारिश न होने से किसान बेहाल हैं। जुलाई महीने में पिछले साल की अपेक्षा कम बारिश होने से किसानों की लागत राशि 3 हजार प्रति एकड़ के करीब बढ़ गई हैं, क्योंकि किसान प्रतिदिन प्रति एकड़ औसतन 5 लीटर डीजल जलाकर धान की फसल को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर अगस्त महीने में भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई तो लागत राशि और बढ़ जाएगी। साथ ही उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
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कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले में इस बार किसानों ने 1,17,000 हजार हेक्टेयर पर फसल बोई है। सबसे ज्यादा 90 हजार हेक्टेअर जमीन पर धान की फसल बोई गई है। वहीं 12 हजार हेक्टेअर में गन्ना, 8 हजार हेक्टेयर में कपास, 6 हजार हेक्टेयर में बाजरा और एक हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल बोई गई है। मौसम विभाग की ओर से इस साल पिछले साल की अपेक्षा मानसून में ज्यादा बारिश बताई गई थी। इसके चलते किसानों ने 5 हजार ज्यादा हेक्टेयर में धान की बिजाई की है। हालांकि जुलाई महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल जुलाई में 800 एमएम के करीब बारिश हुई थी, लेकिन इस साल 500 एमएम से ज्यादा आंकड़ा पार नहीं हुआ। इतना ही नहीं, अगस्त महीने के पहले सप्ताह में भी मात्र 32 एमएम बारिश हुई है, जो पिछले साल के बराबर ही है।
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सितंबर में बारिश हुई तो बीमारी की संभावना ज्यादा
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में धान की फसल के लिए अच्छी बारिश बेहद जरूरी है। अगर सितंबर के महीने में बारिश हुई तो फसल में बीमारियां लगने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। ऐसे में 25 अगस्त तक का समय किसानों के लिए बारिश के हिसाब से बेहद निर्णायक है।
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बारिश अब  तक
जुलाई 2014   233  एमएम
अगस्त 2014   219 एमएम
जुलाई 2015 798 एमएम
अगस्त 2015 608 एमएम
जुलाई 2016  592 एमएम
अगस्त 2016 अब तक  32 एमएम

इस बार 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर धान की फसल पर पड़ा है। किसान फसल बचाने को खाद और दवाइयों के साथ पानी के प्रबंध के लिए ज्यादा खर्च कर रहे हैं। अगर बारिश लेट आती है तो धान की फसल में भयानक बीमारियां भी आ सकती हैं।
-डॉ. देवेंद्र कुहाड़,  कृषि विकास अधिकारी
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