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युवा नजरिया: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद वर्तमान में शांति की स्थिति, तेजी से हो रहा विकास

Fri, 22 Dec 2023 10:28 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 22 Dec 2023 10:28 AM IST
सार

पहले जब अनुच्छेद 370 को रद्द किया गया तो वह के लोग डर चुके थे परंतु लोगो को भी धीरे-धीरे विश्वास हुआ कि ये अनुच्छेद उन्हीं के विकास के लिए किया गया है। जम्मू कश्मीर पहले भी पर्यटक स्थल के नाम में पहले नंबर पर आता था और 370 रद्द होने के बाद पर्यटकों के लिए और भी लोकप्रिय हो गया है।

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Yuva Najariya: Presently peace in Jammu and Kashmir after removal of Article 370, rapid development is taking
सौरव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत की आजादी के बाद जब भारत का संविधान लिखा जा रहा था। तब भारतीय संविधान में जम्मू और कश्मीर राज्य के लिए इस विशेष अनुच्छेद (अनुच्छेद 370) को 17 अक्तूबर 1949 को जोड़ा गया था। संविधान निर्माण के समय ये प्रावधान अनुच्छेद 306 के अंतर्गत रखे गए थे, जो बाद में धारा 370 बना। इस अनुच्छेद के अंतर्गत भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष अधिकार प्राप्त थे। राज्य के साथ साथ राज्य के लोगों को भी कुछ विशेष अधिकार देता था, जो अन्य राज्य के नागरिकों को प्राप्त नहीं थे। 

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यहां तक कि राज्य जम्मू और कश्मीर के चुनाव और राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से राज्य के अधीन थी। इस अनुच्छेद के तहत 1976 का शहरी भूमि कानून राज्य में लागू न होने के कारण अन्य राज्य के व्यक्ति को संपत्ति खरीदने पर बाध्यता थी। जब यह अनुच्छेद संविधान में लिखा जा रहा था तब कई नेता इस अनुच्छेद के खिलाफ थे। डॉ. आंबेडकर इसके विरोधी थे इसलिए अनुच्छेद 370 का मसौदा एन गोपालस्वामी अयंगर द्वारा तैयार किया गया था।
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अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर राज्य पर भारतीय संविधान की अधिकतर धाराएं लागू नहीं होती थी। भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे। भारतीय संविधान की धारा 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है। यह जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता था। केंद्रीय सूचना का अधिकार अधिनियम भी जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होता था I एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना साकार जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था,जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का था।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में शांति का माहौल
धारा 370 हटने के बाद शुरुआती समय में हंगामे हुए थे, अलग-अलग राजनीति पार्टियों द्वारा विरोध किया गया परंतु धीरे-धीरे सबको समझ आया की ये धारा हटाने से उनका विकास और तेजी से होने लगेगा। वर्तमान के समय में जम्मू कश्मीर में बेहद शांति का माहौल है, वहां के लोग बहुत प्रेम से एक दूजे के साथ रहते हैं।

पहले जब अनुच्छेद 370 को रद्द किया गया तो वह के लोग डर चुके थे परंतु लोगो को भी धीरे-धीरे विश्वास हुआ कि ये अनुच्छेद उन्हीं के विकास के लिए किया गया है। जम्मू कश्मीर पहले भी पर्यटक स्थल के नाम में पहले नंबर पर आता था और 370 रद्द होने के बाद पर्यटकों के लिए और भी लोकप्रिय हो गया है। अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद वह के लोगो को अब केंद्रीय सरकार द्वारा हर नीतियों का लाभ बिना किसी समस्या के मिलता रहेगा।

सरकार द्वारा लोगों को मिल रहेे लाभ

  • 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने को मंजूरी दी गई। नोटिफिकेशन जारी करते ही 31 अक्तूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश में पुनर्गठित कर दिया गया।
  • इसके साथ ही केंद्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए हैं। यहां के स्थानीय निवासियों और दूसरे राज्यों के नागरिकों के बीच अधिकार अब समान हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वालों के लिए सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। पहले देश के लिए अधिकतर जो स्कीम बनती थी, जो कानून बनते थे, उनमें लिखा होता था  जम्मू-कश्मीर के अलावा, अब ये इतिहास की बात हो चुकी है। शांति और विकास के जिस मार्ग पर जम्मू और कश्मीर बढ़ रहा है, उसने राज्य में नए उद्योगों के आने का मार्ग भी बनाया है।
  • आज जम्मू-कश्मीर आत्मनिर्भर भारत अभियान में अपना योगदान दे रहा है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जम्मू और कश्मीर में लगभग 5 से 7 लाख लाभार्थियों का सत्यापन किया जा चुका है। पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लगभग 2 लाख घर स्वीकृत हुए हैं। जम्मू-कश्मीर से बाहर विवाह करने वाली लड़कियों और उनके बच्चों के अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित हुआ है।
  • सेब के मार्केट के लिए इंटरवेंशन स्कीम लागू की गई है। यह इंटरवेंशन स्कीम के अन्तर्गत डीबीटी द्वारा भुगतान और केंद्रीय खरीद एजेंसी द्वारा परिवहन से इसकी कीमत स्थिर हुई है। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके पुंछ जिले के मोहम्मद शफी पहले दूसरों के घर में रहने को मजबूर थे, बाद में अपना कच्चा मकान बनाया। लेकिन बर्फबारी वाले इस क्षेत्र में कच्चे मकान में बहुत परेशानी होती थी। ऐसे में पुंछ जिले में प्रशासन की संजीदगी से प्रधानमंत्री आवास योजना परवान चढ़ी तो सभी को पक्का मकान मिल गया। और वहा के लोग बहुत खुश हैं।

- सौरव कुमार, सिरसा

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