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Sirsa News: जेल अधीक्षक समेत तीन अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर की फिर होगी जांच
Sat, 19 Sep 2026 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 19 Sep 2026 11:25 PM IST
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जांच अधिकारी ने की थी एफआईआर रद्द करने की सिफारिश, एसपी ने असहमति जताते हुए एएसपी को सौंपी जांच
कोर्ट ने दिया सख्त आदेश- जांच में देरी हुई तो अगली सुनवाई में डीजी जेल को होना पड़ेगा पेश
जेल में बंदी से मारपीट व अभद्र व्यवहार करने पर हाईकोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान
सिरसा। जिला जेल के तत्कालीन अधीक्षक व दो उप अधीक्षकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की दोबारा जांच अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे। हरियाणा जेल महानिदेशक कार्यालय के मुख्य प्रोबेशन अधिकारी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच को लेकर सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि दोबारा जांच आज से एक महीने के भीतर पूरी कर रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। इसके बाद जांच के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
आदेश की पालना नहीं होने पर हरियाणा के जेल महानिदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। 17 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान जेल महानिदेशक कार्यालय के मुख्य प्रोबेशन अधिकारी की ओर से पिछली सुनवाई के आदेशों की पालना में हलफनामा दाखिल किया गया जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
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हलफनामे में कोर्ट को बताया गया कि 18 अगस्त 2026 को कार्यालय की ओर से जिला जेल सिरसा के अधीक्षक को पत्र भेजकर एफआईआर की स्थिति और जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी। जिला जेल अधीक्षक ने 8 सितंबर को सूचित किया था कि जांच अधिकारी ने 7 सितंबर को उक्त प्राथमिकी को रद्द करने की सिफारिश की थी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक सिरसा ने जांच अधिकारी की सिफारिश से असहमति जताई और मामले की गहन जांच कराने का निर्णय लिया। एसपी कार्यालय की ओर से 10 सितंबर को जारी पत्र को जिला जेल अधीक्षक ने आगे भेजा। इसके तहत जांच की जिम्मेदारी एएसपी सिरसा को सौंपी गई है।
जेल अधिकारियों पर लगे हैं ये आरोपी
यह मामला सिरसा जेल में एक बंदी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट से जुड़ा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था और 21 अप्रैल 2025 को सुनवाई शुरू की थी। सुनवाई के दौरान 21 मई 2026 को थाना सिविल लाइन सिरसा में तत्कालीन जेल अधीक्षक संजीव पट्टार, तत्कालीन उप अधीक्षक मोहन सिंह व उप अधीक्षक वरुण गोदारा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें उक्त अधिकारियों पर एफआईआर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर), जेल अधिनियम की धारा 54 व बीएनएस की धारा 115 के तहत आरोप लगाए गए। आरोपी संजीव पट्टार वर्तमान में पलवल जेल के अधीक्षक हैं जबकि उप अधीक्षक वरुण गोदारा सिरसा जेल में तैनात हैं। वह पिछले काफी समय से अवकाश पर बताए गए हैं। मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन उप अधीक्षक मोहन सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जांच के लिए मांगा है एक माह का समय
राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुनः जांच की प्रक्रिया एक महीने में पूरी कर कानून के अनुसार उचित रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। इस पर न्यायाधीश नीरजा के. कालसन ने संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय में जांच पूरी करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने का कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा। यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो जेल महानिदेशक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को होगी। संवाद
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कोर्ट ने दिया सख्त आदेश- जांच में देरी हुई तो अगली सुनवाई में डीजी जेल को होना पड़ेगा पेश
जेल में बंदी से मारपीट व अभद्र व्यवहार करने पर हाईकोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान
सिरसा। जिला जेल के तत्कालीन अधीक्षक व दो उप अधीक्षकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की दोबारा जांच अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करेंगे। हरियाणा जेल महानिदेशक कार्यालय के मुख्य प्रोबेशन अधिकारी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच को लेकर सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि दोबारा जांच आज से एक महीने के भीतर पूरी कर रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। इसके बाद जांच के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
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आदेश की पालना नहीं होने पर हरियाणा के जेल महानिदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। 17 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान जेल महानिदेशक कार्यालय के मुख्य प्रोबेशन अधिकारी की ओर से पिछली सुनवाई के आदेशों की पालना में हलफनामा दाखिल किया गया जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
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हलफनामे में कोर्ट को बताया गया कि 18 अगस्त 2026 को कार्यालय की ओर से जिला जेल सिरसा के अधीक्षक को पत्र भेजकर एफआईआर की स्थिति और जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी। जिला जेल अधीक्षक ने 8 सितंबर को सूचित किया था कि जांच अधिकारी ने 7 सितंबर को उक्त प्राथमिकी को रद्द करने की सिफारिश की थी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक सिरसा ने जांच अधिकारी की सिफारिश से असहमति जताई और मामले की गहन जांच कराने का निर्णय लिया। एसपी कार्यालय की ओर से 10 सितंबर को जारी पत्र को जिला जेल अधीक्षक ने आगे भेजा। इसके तहत जांच की जिम्मेदारी एएसपी सिरसा को सौंपी गई है।
जेल अधिकारियों पर लगे हैं ये आरोपी
यह मामला सिरसा जेल में एक बंदी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट से जुड़ा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था और 21 अप्रैल 2025 को सुनवाई शुरू की थी। सुनवाई के दौरान 21 मई 2026 को थाना सिविल लाइन सिरसा में तत्कालीन जेल अधीक्षक संजीव पट्टार, तत्कालीन उप अधीक्षक मोहन सिंह व उप अधीक्षक वरुण गोदारा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें उक्त अधिकारियों पर एफआईआर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर), जेल अधिनियम की धारा 54 व बीएनएस की धारा 115 के तहत आरोप लगाए गए। आरोपी संजीव पट्टार वर्तमान में पलवल जेल के अधीक्षक हैं जबकि उप अधीक्षक वरुण गोदारा सिरसा जेल में तैनात हैं। वह पिछले काफी समय से अवकाश पर बताए गए हैं। मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन उप अधीक्षक मोहन सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
जांच के लिए मांगा है एक माह का समय
राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुनः जांच की प्रक्रिया एक महीने में पूरी कर कानून के अनुसार उचित रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी। इस पर न्यायाधीश नीरजा के. कालसन ने संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय में जांच पूरी करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने का कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा। यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो जेल महानिदेशक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को होगी। संवाद