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उम्र कैद की सजा काटने के बाद भी कैदी को नहीं मिल रही रिहाई
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा काटने के बाद भी सिरसा जेल के एक कैदी को रिहाई नसीब नहीं हो रही। कैदी सुधीर इन दिनों पैरोल पर है और अपनी रिहाई को लेकर जेल मंत्री से लेकर जेल महा निदेशक तक को मिलकर रिहाई की गुहार लगा चुका है।
कैदी सुधीर का कहना है कि जेल मंत्री कृष्ण पंवार से 17 अप्रैल को चंडीगढ़ में मुलाकात के बाद उसे जवाब मिला कि एक साल और जेल में काट लो, फिर रिहाई मिल जाएगी। इसी सिलसिले में कैदी सुधीर ने सोमवार को पत्रकार वार्ता करके सरकार से न्याय करने की गुहार लगाई। गांव अबूबशहर निवासी कैदी सुधीर का कहना है कि सिरसा जिला प्रशासन उसकी रिहाई को लेकर फाइल सरकार को काफी समय पहले भेज चुका है। सरकार की वर्ष 2002 की रिहाई पॉलिसी के तहत उसके साथ के विभिन्न जेलों में बंद 120 कैदियों को रिहाई मिल चुकी है, लेकिन उसका केस सरकार ने अस्वीकार कर दिया। कैदी सुधीर ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से गुहार लगाई है कि अब जेल से आजादी उसका अधिकार है, नहीं तो फांसी पर लटका दो।
पूर्व सरपंच का किया था मर्डर
कैदी सुधीर ने बताया कि 1999 में गांव अबूबशहर के पूर्व सरपंच बलदेव राज की हत्या हो गई थी। इस मामले में सिरसा जिला अदालत ने उसे 23 दिसंबर 2006 को दोषी करार देते हुए उम्रकैद दी थी। दस साल की सजा काटने पर राज्य सरकार की रिहाई योजना 2002 के तहत चार साल की माफी मिलने के बाद उसे वर्ष 2013 में रिहा किया जाना था। जेल विभाग ने सारी प्रक्रिया पूरी करके राज्य सरकार को फाइल भेज दी। सुधीर का आरोप है कि सियासी दबाव के कारण उसकी रिहाई रोकते हुए सरकार ने चार साल सजा और बढ़ा दी। सरकार के निर्णय के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की हुई है। सुधीर ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को भी पत्र लिखा है, जिसमें उसने आयोग को बताया है कि हरियाणा राज्य की जेलों में मात्र वही ऐसा कैदी बचा है जो उम्रकैद की सजा पूरी कर चुका है और उसे सरकार की ओर से रिहाई नहीं दी जा रही।
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फैसला सरकार लेगी
जिला जेल प्रशासन की तरफ से कैदी सुधीर की रिहाई प्रक्रिया को लेकर फाइल सरकार को भेजी जा चुकी है। इन मामलों में फैसला राज्य सरकार लेती है।
-अमित भादू, जेल अधीक्षक सिरसा।
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सिरसा।
हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा काटने के बाद भी सिरसा जेल के एक कैदी को रिहाई नसीब नहीं हो रही। कैदी सुधीर इन दिनों पैरोल पर है और अपनी रिहाई को लेकर जेल मंत्री से लेकर जेल महा निदेशक तक को मिलकर रिहाई की गुहार लगा चुका है।
कैदी सुधीर का कहना है कि जेल मंत्री कृष्ण पंवार से 17 अप्रैल को चंडीगढ़ में मुलाकात के बाद उसे जवाब मिला कि एक साल और जेल में काट लो, फिर रिहाई मिल जाएगी। इसी सिलसिले में कैदी सुधीर ने सोमवार को पत्रकार वार्ता करके सरकार से न्याय करने की गुहार लगाई। गांव अबूबशहर निवासी कैदी सुधीर का कहना है कि सिरसा जिला प्रशासन उसकी रिहाई को लेकर फाइल सरकार को काफी समय पहले भेज चुका है। सरकार की वर्ष 2002 की रिहाई पॉलिसी के तहत उसके साथ के विभिन्न जेलों में बंद 120 कैदियों को रिहाई मिल चुकी है, लेकिन उसका केस सरकार ने अस्वीकार कर दिया। कैदी सुधीर ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से गुहार लगाई है कि अब जेल से आजादी उसका अधिकार है, नहीं तो फांसी पर लटका दो।
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पूर्व सरपंच का किया था मर्डर
कैदी सुधीर ने बताया कि 1999 में गांव अबूबशहर के पूर्व सरपंच बलदेव राज की हत्या हो गई थी। इस मामले में सिरसा जिला अदालत ने उसे 23 दिसंबर 2006 को दोषी करार देते हुए उम्रकैद दी थी। दस साल की सजा काटने पर राज्य सरकार की रिहाई योजना 2002 के तहत चार साल की माफी मिलने के बाद उसे वर्ष 2013 में रिहा किया जाना था। जेल विभाग ने सारी प्रक्रिया पूरी करके राज्य सरकार को फाइल भेज दी। सुधीर का आरोप है कि सियासी दबाव के कारण उसकी रिहाई रोकते हुए सरकार ने चार साल सजा और बढ़ा दी। सरकार के निर्णय के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की हुई है। सुधीर ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को भी पत्र लिखा है, जिसमें उसने आयोग को बताया है कि हरियाणा राज्य की जेलों में मात्र वही ऐसा कैदी बचा है जो उम्रकैद की सजा पूरी कर चुका है और उसे सरकार की ओर से रिहाई नहीं दी जा रही।
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फैसला सरकार लेगी
जिला जेल प्रशासन की तरफ से कैदी सुधीर की रिहाई प्रक्रिया को लेकर फाइल सरकार को भेजी जा चुकी है। इन मामलों में फैसला राज्य सरकार लेती है।
-अमित भादू, जेल अधीक्षक सिरसा।