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घर से निकलते हैं सिर्फ जानवरों को खाना खिलाने के लिए

Wed, 29 Apr 2020 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2020 12:12 AM IST
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they leave the home only food serve for dog
dlf colony ke yuva rly station ke paas lawaris kutton ko khana khilate hue - फोटो : RohtakCity
रोहतक। कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों और अन्य जरूरतमंद लोगों की मदद को जिले भर की समाजसेवी संस्थाएं आगे आई हैं। सरकार और जिला प्रशासन का फोकस भी इन पर है। पर इसी लॉकडाउन का शिकार एक ऐसा वर्ग भी है जो खाने से बिल्कुल महरूम हो गया है और अपनी व्यथा बताने में भी समर्थ नहीं है। ऐसे ही बेसहारा, बेजुबान जानवरों के लिए शहर के कुछ युवा मददगार बने हैं।
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डीएलएफ कॉलोनी निवासी मोबाइल शॉप मालिक सनी राजपूत ने बताया कि वह एक दिन अपने दोस्त के साथ गोहाना अड्डे के पास एक भंडारे में गए थे। वहां देखा लोग चंद जरूरतमंदों को खाना खिला कर फोटो खिंचवा रहे हैं। उनका दोस्त पिछले कई सालों से लावारिस कुत्तों को ब्रेड खिलाता आ रहा है। तभी जहन में आया कि लॉकडाउन में इनका क्या हाल होगा। बस उसी दिन ठान लिया कि जहां तक संभव हो, जितने भी लावारिस कुत्तों का पेट भर सकें, जरूर भरेंगे। यह मिशन लॉकडाउन लागू होने के एक दिन बाद शुरू हुआ। दो दोस्तों शुरू हुआ यह सफर करीब बीस युवाओं की टोली तक पहुंच गया। मिशन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, मददगार भी बढ़ते गए। आज डीएलएफ कॉलोनी के ज्यादातर लोग इस मुहिम में साथ दे रहे हैं। कोई रोटियां देता है तो किसी ने दूध या ब्रेड बंधवा रखा है। लोग अपनी श्रद्धा से पांच से लेकर पंद्रह थैलियां देते हैं। एक डेयरी वाला 11 किलो दूध देता है। एक बंद मैरिज पैलेस वाला रोटियां तैयार करवाता है। सभी से कह दिया गया है, घर में जो भी पड़ा होता है शाम को पॉलीथिन बैग में बाहर टांग देते हैं। लोग सिर्फ रोटी आदि देते ही नहीं हैं, शाम को आकर रोटियों का चूरमा बना कर दूध में मिला कर कुत्तों के लिए बाकायदा भोजन तैयार करते हैं। सारा मैटीरियल तैयार कर सभी दोस्त दो-दो की टोली में अपनी एक्टिवा पर बाल्टी या पतीले रख कर रात करीब साढ़े आठ बजे निकलते हैं। शहर के तमाम इलाकों में जाकर लावारिस कुत्तों को खाना खिलाते हैं। अशोका चौक, आयकर भवन, तहसील, विकास भवन, छोटू राम चौक, सर्विस क्लब, मॉडल स्कूल, सोनीपत स्टैंड, मानसरोवर पार्क के पीछे, दिल्ली रोड, मेडिकल समेत कई इलाकों में बेजुबान अब इनके दोस्त बन चुके हैं। पहले सीटी बजा कर बुलाना पड़ता था। अब कुत्ते समय पर इंतजार करते हैं, हॉर्न की आवाज सुनते ही झुंड के झुंड टूट पड़ते हैं। मेडिकल एरिया में ही करीब दो सौ कुत्ते हैं जो कैंटीन बंद होने से बेहाल थे। पर अब उन्हें रोज रात को भरपेट खाना मिलता है। सनी के साथियों में रोहित, रमित चावला, अजय उप्पल आदि हैं। ज्यादातर लोगों का फैमिली बिजनेस है, बेजुबानों की मदद अब इनका मिशन बन चुका है।
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