फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Health is not improving even after winning the battle with Corona

कोरोना से जंग जीतने के बाद भी सेहत में नहीं हो रहा सुधार

Sun, 13 Dec 2020 02:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2020 02:44 AM IST
विज्ञापन
Health is not improving even after winning the battle with Corona
Health is not improving even after winning the battle with Corona
संजय कुमार
विज्ञापन

रोहतक। कोरोना संक्रमण से जंग जीत चुके मरीजों को ठीक होने के बावजूद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को झेलना पड़ रहा है। इसमें थकान होने के साथ सांस लेने में तकलीफ व दिल संबंधी परेशानियां भी लोगों को हो रही हैं। कोरोना के लक्षण वालों के साथ सामान्य लक्षण वाले मरीजों में भी यह समस्या मिल रही है। एक्सपर्ट मानते हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके 10 से 15 फीसदी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या का उपचार करवाना पड़ रहा है। बात पीजीआईएमएस की करें तो हर दिन 20 से 25 पोस्ट कोविड मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं।
पीजीआइएमएस के पीसीसीएम विभागाध्यक्ष एवं प्रदेश के प्रमुख कोविड-19 नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी बताते हैं कि पोस्ट कोविड समस्या आठ सप्ताह के बाद भी हो सकती है। एक्यूट पोस्ट कोविड तीन सप्ताह से अधिक समय व छह से आठ सप्ताह में सिंड्रोम सिस्टम की समस्या मिल रही है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद थकान, मांसपेशियों में दर्द रहना, एनर्जी ना रहना जैसे सामान्य लक्षण हैं। इसमें सांस लेने में समस्या मुख्य समस्या है। कई बार मरीज के ठीक होने के बाद भी सांस फूलने की समस्या शुरू हो जाती है। शुरूआत में मरीजों उपचार के दौरान स्टेरायड नहीं दिया जाता था, तब अधिक समस्या आती है। लेकिन अब मरीज को उपचार के दौरान स्टेरायड दिया जाता है, इसलिए समस्या कम हो गई है। इसके अलावा छाती में दर्द रहना और दिल की तकलीफ होने लगती है। कई मामलों में हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक तक की समस्या आ जाती है।
विज्ञापन

----
कोरोना से ठीक होने के बाद मिल रही समस्या
10 से 15 प्रतिशत मरीजों को दिल की समस्या
30 से 40 प्रतिशत मरीजों को थकान
30 से 40 प्रतिशत मरीजों को सांस लेने में समस्या
----
इम्यून सिस्टम बना है बाधा
एक्सपर्ट बताते हैं कि कोरोना से ठीक होने के बाद इम्यून सिस्टम गड़बड़ हो जाता है। बच्चों में क्वासाकी सिंड्रोम व व्यस्कों में इम्यून डिस रेगुलेशन की समस्या हो जाती है। इसमें नींद ना आना, तनाव, काम में मन ना लगना, भयभीत रहना शामिल हैं
विज्ञापन
विज्ञापन

----
कोरोना के संक्रमण में हुई सार्वजनिक हुई कई बीमारियां
डॉ. ध्रुव चौधरी बताते हैं कि जो समस्या कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में आ रही है वह पहले भी आती थी। इस समस्या से ग्रस्त स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया के मरीजों के अलावा ट्रामा में रहे मरीजों को अधिक झेलनी पड़ती थी। अब कोरोना संक्रमण काल में इन मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ने से डॉक्टरों के अलावा सरकार भी सकते में आ गई है कि मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ मामलों में तो लंबे समय तक रिकवरी नहीं हो पाती। अब इसकी जांच करने के लिए बॉयोटैक्नोलॉजी टूल भी उपलब्ध हैं। पहले इनके बारे में सिर्फ सोचा जाता था अब यह सामने आ रहीम है। ठीक होने के बाद ब्रेन स्ट्रोक व हार्ट अटैक होने के भी मामले सामने आए हैं।

----
क्या करें मरीज व डॉक्टर
- मरीज समस्या सामने आते ही डॉक्टर से परामर्श लें
- मरीज की समस्या को डॉक्टर भी गंभीरता से लें
- मांसपेशी में दर्द वाले को रिमोटोलॉजी भेजें
- जनरल समस्या वाले को जरनल मेडिसिन भेजें
- हार्ट के मरीज को कार्डियोलॉजी भेजें
- सांस वाले को पीसीसीएम भेजें
- डॉक्टर एक्स-रे, सीटी व एमआरआई से करें निरीक्षण
---
ठीक होने में लग सकता है समय
- आठ से 12 सप्ताह का लग सकता है समय
- कई मामलों में छह से आठ सप्ताह में हो जाती है रिकवरी
----------
कोरोना से ठीक होने के बाद थकान, मांसपेशियों में दर्द रहना, एनर्जी ना रहना जैसे सामान्य लक्षण हैं। इसमें सांस लेने में समस्या मुख्य है। इसके अलावा छाती में दर्द रहना और दिल की तकलीफ होने लगती हैं। कई मामलों में हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक तक की समस्या आ जाती है। इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है।
डॉ. ध्रुव चौधरी, प्रमुख कोविड-19 नोडल अधिकारी हरियाणा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed