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एमडीयू के प्रोफेसर को गोली मारने वाले छात्र को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 25 May 2016 02:53 AM IST
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- फोटो : Demo pic
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एमडीयू के होटल एंड टूरिज्म संस्थान में घुसकर प्रोफेसर आशीष दहिया को गोली मारने के बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया। प्रोफेसर पर जानलेवा हमला करने वाले छात्र को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की कोर्ट ने दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त कै द भुगतनी होगी। मामला दिसंबर 2013 का है। एमडीयू के होटल मैनेजमेंट संस्थान में प्रोफेसर आशीष दहिया संस्थान में बैठे थे। तभी रोल नंबर नहीं मिलने से नाराज गोहाना रोड निवासी छात्र वेदेंद्र ने उन्हें संस्थान में घुसकर गोली मार दी थी। आरोपी मौके से फरार हो गया था। प्रोफेसर के जैसे-तैसे पीजीआई में दाखिल करवाया गया। कई दिनों तक जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ने के बाद प्रोफेसर की जान बच सकी थी। प्रोफेसर फिलहाल महेंद्रगढ़ के केंद्रीय विश्वविद्यालय में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। प्रोफेसर एमडीयू में संस्थान के निदेशक भी रहे।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार झज्जर जिले के गांव छारा निवासी महेंद्र दलाल एमडीयू में होटल मैनेजमेंट संस्थान में सहायक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 2 दिसंबर 2013 को पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि सुबह उनके कार्यालय में डॉ. आशीष दहिया मीटिंग ले रहे थे। मीटिंग करीब दो घंटे तक चली। बैठक के बाद सभी अपने ऑफिस में चले गए, जबकि आशीष दहिया वहीं बैठे रहे। तभी एमडीयू का छात्र वेदेंद्र उनके पास आया और अपना रोल नंबर और स्लिप मांगी। आशीष दहिया ने रोल नंबर और स्लिप ऑफिस से लेने की बात कही। आरोप ह है कि तभी वेदेंद्र ने पिस्तौल निकालकर आशीष को ताबड़तोड़ गोली मार दी और भाग गया। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। वारदात स्थल से आरोपी का पहचान पत्र मिलने के बाद उसकी पहचान हो सकी थी। आरोपी को गिरफ्तार कर चालान अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के बाद वेदेंद्र सजा सुनाई।
एमडीयू में ही छिपा दिया था हथियार
संस्थान में घुसकर प्रोफेसर को गोली मारने का मामला पूरे प्रदेश में कई दिनों तक सुर्खियों में रहा। पुलिस की जांच भी लंबी चली। आरोपी ने रिमांड में खुलासा किया कि उसने वारदात के बाद पिस्तौल को एमडीयू में ही दबा दिया था। जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया।
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प्रोफेसर की जान बचाने को छात्रों ने दिखाया हौसला
संस्थान के ही एक छात्र ने प्रोफेसर को गोली मारी तो संस्थान के ही दूसरे छात्रों ने अपने सर की जान बचाई। घायल को पीजीआई पहुंचाने से लेकर खून देने तक छात्र हमेशा आगे खड़े रहे। हालांकि प्रोफेसर ने पूरे मामले में कभी भी खुलकर कोई बात नहीं कही।
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अदालत में चले अभियोग के अनुसार झज्जर जिले के गांव छारा निवासी महेंद्र दलाल एमडीयू में होटल मैनेजमेंट संस्थान में सहायक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 2 दिसंबर 2013 को पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि सुबह उनके कार्यालय में डॉ. आशीष दहिया मीटिंग ले रहे थे। मीटिंग करीब दो घंटे तक चली। बैठक के बाद सभी अपने ऑफिस में चले गए, जबकि आशीष दहिया वहीं बैठे रहे। तभी एमडीयू का छात्र वेदेंद्र उनके पास आया और अपना रोल नंबर और स्लिप मांगी। आशीष दहिया ने रोल नंबर और स्लिप ऑफिस से लेने की बात कही। आरोप ह है कि तभी वेदेंद्र ने पिस्तौल निकालकर आशीष को ताबड़तोड़ गोली मार दी और भाग गया। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। वारदात स्थल से आरोपी का पहचान पत्र मिलने के बाद उसकी पहचान हो सकी थी। आरोपी को गिरफ्तार कर चालान अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के बाद वेदेंद्र सजा सुनाई।
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एमडीयू में ही छिपा दिया था हथियार
संस्थान में घुसकर प्रोफेसर को गोली मारने का मामला पूरे प्रदेश में कई दिनों तक सुर्खियों में रहा। पुलिस की जांच भी लंबी चली। आरोपी ने रिमांड में खुलासा किया कि उसने वारदात के बाद पिस्तौल को एमडीयू में ही दबा दिया था। जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया।
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प्रोफेसर की जान बचाने को छात्रों ने दिखाया हौसला
संस्थान के ही एक छात्र ने प्रोफेसर को गोली मारी तो संस्थान के ही दूसरे छात्रों ने अपने सर की जान बचाई। घायल को पीजीआई पहुंचाने से लेकर खून देने तक छात्र हमेशा आगे खड़े रहे। हालांकि प्रोफेसर ने पूरे मामले में कभी भी खुलकर कोई बात नहीं कही।