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नगर निगम में फर्नीचर घोटाला मामला विजिलेंस की जांच पर उठ रहे सवाल

Sun, 19 Mar 2017 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 19 Mar 2017 01:39 AM IST
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nagar nigam furniture buying, vigilance get irregularitie
दोनों प्रापर्टी आईडी और नक्शे अलग-अलग नाम से जारी किये गये - फोटो : demo pic
नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की विजिलेंस जांच सार्वजनिक होने के बाद शहर की सरकार की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है। हालांकि, भाजपा पार्षद विजिलेंस की जांच पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विजिलेंस ने अपनी जांच में कई तथ्यों की अनदेखी की है। इसके बावजूद निगम के तीनों पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा पार्षद अगले सप्ताह तीनों निगम पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तथ्यों सहित सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलेंगे। बता दें कि ट्रेनी आईएस विक्रम सिंह की जांच के बाद विजिलेंस ने भी अपनी जांच में मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एमई जगदीश और अकाउंटेंट विकास को फर्नीचर की खरीद-फरोख्त में अनियमितता के लिए जिम्मेदार माना है।
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भाजपा पार्षदों ने विजिलेंस की जांच रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 फरवरी 2014 को हाउस ने 20 वार्डों के अंदर जन सुविधा केंद्र खोलने का प्रस्ताव पास किया। इसके लिए फर्नीचर खरीदने का फैसला लिया गया। 31 जुलाई 2014 को एसएस स्टील एंड वुडन फर्नीचर को वर्क आर्डर जारी किए। साल 2014 में पहली पेमेंट 3 अगस्त, दूसरी पेमेंट 3 सितंबर, तीसरी पेमेंट 7 नवंबर को जारी की गई। तीनों बार 4 लाख 73 हजार 710 रुपये की राशि जारी की गई। जबकि चौथी पेमेंट 15 दिसंबर 2014 को 3 लाख 78 हजार 968 रुपये जारी की गई। इस तरह निगम ने 18 लाख 98 रुपये का भुगतान किया। विजिलेंस जांच में कहीं न कहीं इन तथ्यों की अनदेखी की गई है।
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भुगतान के बाद जागे अधिकारी, पैसे ज्यादा गए
विजिलेंस जांच में कहा गया है कि जब एसएस स्टील एंड वुडन फर्नीचर हाउस संजय नगर के मालिक अरुण कुमार के बयान दर्ज किए गए तो उसने बताया कि वह सात साल से फर्नीचर बेचने का काम करता है। साल 2014 में उसने निगम को आफिस टेबल, रिवोलविंग कुर्सी, कुर्सी स्टैंड स्टील और लोहे की अलमारी की सप्लाई की थी। निगम की ओर से उसे कोई कोटेशन नहीं दिखाई गई। उसने खुद रेट तय किए थे। इसके बाद उसने वैट लगाकर 19 लाख 38 हजार रुपये का बिल दे दिया। निगम ने चार किस्तों में पेमेंट की। भाजपा पार्षदों का कहना है कि विजिलेंस को दिए बयान में अरुण स्वीकार कर रहा है कि उस पर निगम अधिकारियों ने दबाव बनाया।
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इसके बाद उसने एक लाख 43 हजार रुपये का चेक निगम के पास जमा करवा दिया। यह चेक 16 जनवरी 2015 को जारी किया गया है, जबकि सात जनवरी को मामला मीडिया में उजागर हो गया था। स्थानीय विधायक के मांगने पर 8 जनवरी को कार्यकारी अभियंता रिकार्ड उपलब्ध करवा चुके थे। इसके बाद 16 जनवरी को चेक जमा करवाया गया है। साफ है कि एक लाख 43 हजार रुपये का चेक गड़बड़ी उजागर होने के बाद जमा किया गया है। इस तथ्य की विजिलेंस जांच में अनदेखी की गई है।

जांच रिपोर्ट में इन सवालों के जवाब नहीं
- विजिलेंस को दिए बयान में लेखाकार विकास ने साफ किया है कि उसने कोटेशन पर हस्ताक्षर नहीं किए। आफिस में कोटेशन आने के बाद कार्यालय ने कार्रवाई की। फिर भी उसके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की गई है।
- मीडिया में सात जनवरी को फर्नीचर की खरीद-फरोख्त का मामला उजागर हुआ, जबकि चेक 16 जनवरी को जमा करवाया गया। विजिलेंस ने जमा राशि को आधार मानकर लिखा है कि खरीद-फरोख्त में अनियमितता हुई, लेकिन कोई वित्तीय हानि नहीं हुई।
- फर्नीचर सप्लाई करने वाली फर्म ने जब चेक जमा करवा दिया तो उसे ब्लैक लिस्ट करने या प्री ऑडिट की सिफारिश क्यों की गई।
- ट्रेनी आईएएस विक्रम सिंह ने अपनी जांच में बाजार से 12 फर्मों से कोेटेशन मंगवाई थी। उनके नाम का भी जांच रिपोर्ट में जिक्र किया गया है, जबकि विजिलेंस ने केवल यह लिखा है कि बाजार रेट क्या मिला। यह नहीं साफ किया कि कौन सी फर्म से रेट लिया गया।  


कार्रवाई के लिए सीएम से मिलेंगे
पहला तो आईएस विक्रम के बाद विजिलेंस ने अपनी जांच में निगम पदाधिकारियों व निगम अधिकारियों को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना है। इसके बाद भी सरकार द्वारा कार्रवाई न करना चिंताजनक है। दूसरा विजिलेंस ने जांच में कई तथ्यों की अनदेखी की है। पूरे तथ्य व सबूत के साथ भाजपा पार्षद अगले सप्ताह सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलेेंगे।

- अशोक खुराना, पार्षद वार्ड नंबर-10

 मामला बेहद गंभी
मामला बेहद गंभीर है। विजिलेंस जांच के बाद तो सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। भाजपा पार्षदों के साथ चंडीगढ़ सीएम से मिलने जाऊंगा।
- सूरजमल किलोई, पूर्व पार्षद भाजपा

सरकार में ही मिला रहा संरक्षण
जब आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह अपनी जांच में घोटाला साबित कर चुके थे। इसके बावजूद सरकार ने कार्रवाई नहीं की। अब विजिलेंस ने भी जांच में फर्नीचर खरीद-फरोख्त में अनियमितता मानी है, लेकिन सरकार में ही आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।
- अजय जैन उर्फ टाटू, पार्षद वार्ड नंबर-15
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