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पूर्व तहसीलदार सहित पांच की सजा बरकरार
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 05 Dec 2015 02:11 AM IST
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार की अदालत ने जमीन धोखाधड़ी के एक मामले में निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा है। निचली अदालत ने फरवरी में पूर्व तहसीलदार महेंद्र सिंह सहित कैलाश कॉलोनी निवासी रवींद्र उर्फ बिल्लू, चुन्नीपुरा निवासी रामसिंह, कथूरा निवासी राजबीर सिंह और जींद के रामकली गांव निवासी जगत सिंह को 7-7 साल कैद की सजा सुनाई थी।
फैसले के खिलाफ आरोपियों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को फैसला सुनाया गया। अब आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में अपील लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, एक आरोपी गढ़ी मोहल्ला निवासी बहादुर सिंह की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। अदालत में चले अभियोग के अनुसार सुखपुरा चौक निवासी रिसाल सिंह व उसके भाई रामचंद्र सैनी, रामकिशन, भरत सिंह की गोहाना रोड स्थित मिल्क प्लांट के पास जमीन थी। मामला इसी जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी का है।
यह जमीन 22 अक्तूबर 1999 को प्रॉपर्टी डीलर रवींद्र उर्फ बिल्लू को करीब डेढ़ साल के लिए दी गई। आरोप है कि रवींद्र ने जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही कागज छिपा कर धोखे से मुखत्यारनामे पर भी हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीन अपने मामा के नाम करा दी। फिर जमीन को बेचना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़ित पक्ष कोर्ट में पहुंचा था।
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18 फरवरी को दिया था फैसला
निचली अदालत ने 18 फ रवरी को पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद पांचों दोषियों को धोखाधड़ी मामले में 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, फ र्जी दस्तावेज तैयार करने पर 7 साल की कैद, 40 हजार रुपये जुर्माना, फर्जी दस्तावेज प्रयोग करने पर धारा 468 व 472 के तहत 5 साल की कैद, 25-25 हजार रुपये जुर्माना और षड्यंत्र रचने के लिए 4 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं साथ साथ चलने के आदेश फैसले में शामिल हैं। दोषियों में तत्कालीन तहसीलदार के अलावा तत्कालीन वासिका नवीस, अर्जी नवीस और दो प्रोपर्टी डीलर शामिल हैं।
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फैसले के खिलाफ आरोपियों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर शुक्रवार को फैसला सुनाया गया। अब आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में अपील लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, एक आरोपी गढ़ी मोहल्ला निवासी बहादुर सिंह की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। अदालत में चले अभियोग के अनुसार सुखपुरा चौक निवासी रिसाल सिंह व उसके भाई रामचंद्र सैनी, रामकिशन, भरत सिंह की गोहाना रोड स्थित मिल्क प्लांट के पास जमीन थी। मामला इसी जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी का है।
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यह जमीन 22 अक्तूबर 1999 को प्रॉपर्टी डीलर रवींद्र उर्फ बिल्लू को करीब डेढ़ साल के लिए दी गई। आरोप है कि रवींद्र ने जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही कागज छिपा कर धोखे से मुखत्यारनामे पर भी हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीन अपने मामा के नाम करा दी। फिर जमीन को बेचना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़ित पक्ष कोर्ट में पहुंचा था।
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18 फरवरी को दिया था फैसला
निचली अदालत ने 18 फ रवरी को पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद पांचों दोषियों को धोखाधड़ी मामले में 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, फ र्जी दस्तावेज तैयार करने पर 7 साल की कैद, 40 हजार रुपये जुर्माना, फर्जी दस्तावेज प्रयोग करने पर धारा 468 व 472 के तहत 5 साल की कैद, 25-25 हजार रुपये जुर्माना और षड्यंत्र रचने के लिए 4 साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं साथ साथ चलने के आदेश फैसले में शामिल हैं। दोषियों में तत्कालीन तहसीलदार के अलावा तत्कालीन वासिका नवीस, अर्जी नवीस और दो प्रोपर्टी डीलर शामिल हैं।