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Rohtak News: होली पर बरतें सावधानी...केमिकल युक्त रंग बन सकते हैं त्वचा कैंसर का कारण
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13-डॉ. दिनेश मलिक, त्वचा विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
रोहतक। होली पर्व पर लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं लेकिन पिछले कई सालों से रंगों में केमिकल, सिंथेटिक डाई व शीशे का इस्तेमाल बढ़ गया है। इस कारण त्वचा, नेत्रों व सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नागरिक अस्पताल के त्वचा विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि हर साल होली के बाद ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 25 से 30 प्रतिशत बढ़ रही है। आमतौर पर रोजाना अस्पताल में 200 से 250 त्वचा मरीजों की ओपीडी होती है।
होली पर उपयोग होने वाले हरे रंग में कॉपर सल्फेट की मात्रा अधिक होती है। यह आंखों में जाकर एलर्जी का कारण बनता है। इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है। लाल रंग में मरकरी सल्फाइड होता है। यह त्वचा के लिए नुकसानदायक है।
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केमिकल युक्त रंग के अधिक उपयोग से त्वचा के कैंसर और बौद्धिक क्षमता के कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है। इससे सांस, अस्थमा व एलर्जी की समस्या बढ़ा सकती है।
सिल्वर रंग एल्युमिनियम ब्रोमाइड और पेंट से बनता है। इसका अधिक उपयोग करने पर कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। काले रंग मेें लेड ऑक्साइड होता है जोकि किडनी फेल होने का कारण बनते हैं। इनके अधिक इस्तेमाल से खुजली भी हो जाती है।
केमिकल के कारण त्वचा जल भी जाती है। इनका असर बालों पर भी देखने को मिलता है। बालों में रुखापन आ जाता है और बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं।
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होली पर घर पर ऐसे बनाएं रंग
डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि होली पर पौधों से बनाए रंगों का उपयोग करना चाहिए। मेंहदी व गुलमोहर के पत्तों को सुखाकर हरा रंग बनाया जा सकता है। इसमें गाढ़ा रंग करने के लिए बुरांश के जूस का प्रयोग करें। पीला रंग बनाने के लिए हल्दी, अमलताश के रंग को उपयोग कर सकते हैं। गुलाब व लाल चंदन का उपयोग कर लाल रंग बना सकते हैं। अनार के छिलकों को सुखाकर उसका रंग बना सकते हैं। इनसे सुरक्षित होली खेली जा सकती है।
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नागरिक अस्पताल के त्वचा विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि हर साल होली के बाद ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 25 से 30 प्रतिशत बढ़ रही है। आमतौर पर रोजाना अस्पताल में 200 से 250 त्वचा मरीजों की ओपीडी होती है।
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होली पर उपयोग होने वाले हरे रंग में कॉपर सल्फेट की मात्रा अधिक होती है। यह आंखों में जाकर एलर्जी का कारण बनता है। इससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है। लाल रंग में मरकरी सल्फाइड होता है। यह त्वचा के लिए नुकसानदायक है।
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केमिकल युक्त रंग के अधिक उपयोग से त्वचा के कैंसर और बौद्धिक क्षमता के कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। बैंगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड होता है। इससे सांस, अस्थमा व एलर्जी की समस्या बढ़ा सकती है।
सिल्वर रंग एल्युमिनियम ब्रोमाइड और पेंट से बनता है। इसका अधिक उपयोग करने पर कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। काले रंग मेें लेड ऑक्साइड होता है जोकि किडनी फेल होने का कारण बनते हैं। इनके अधिक इस्तेमाल से खुजली भी हो जाती है।
केमिकल के कारण त्वचा जल भी जाती है। इनका असर बालों पर भी देखने को मिलता है। बालों में रुखापन आ जाता है और बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं।
होली पर घर पर ऐसे बनाएं रंग
डॉ. दिनेश मलिक ने बताया कि होली पर पौधों से बनाए रंगों का उपयोग करना चाहिए। मेंहदी व गुलमोहर के पत्तों को सुखाकर हरा रंग बनाया जा सकता है। इसमें गाढ़ा रंग करने के लिए बुरांश के जूस का प्रयोग करें। पीला रंग बनाने के लिए हल्दी, अमलताश के रंग को उपयोग कर सकते हैं। गुलाब व लाल चंदन का उपयोग कर लाल रंग बना सकते हैं। अनार के छिलकों को सुखाकर उसका रंग बना सकते हैं। इनसे सुरक्षित होली खेली जा सकती है।