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Rewari News: कब्जा छुड़ाने के लिए भटक रही शहीद की पत्नी
Sun, 24 Nov 2024 12:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 24 Nov 2024 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
धारूहेड़ा। जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग को लेकर एक शहीद की पत्नी संतोष दर-दर भटक रही हैं।
गांव ढाकिया निवासी संतोष के पति राय सिंह बीएसएफ में थे 13 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान वह शहीद हो गए थे। शहीद के इकलौते बेटे दिनेश कुमार भी बीएसएफ में भर्ती हुए लेकिन 8 सितंबर 2024 को पंजाब के पठानकोट में ड्यूटी के दौरान दिनेश कुमार भी शहीद हो गए। परिवार में एकमात्र बेटी प्रियंका ने भी देश सेवा को चुना और अब वह बाड़मेर में बीएसएफ में सेवा दे रही हैं। पूरा परिवार देश सेवा कर रहा था लेकिन पीछे से उनके दादा के हिस्से से आई करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर परिवार के लोगों ने ही कब्जा कर लिया।
इस कब्जे को छुड़ाने के लिए शहीद राय सिंह की पत्नी संतोष व बीएसएफ में कार्यरत उनकी पुत्री प्रियंका दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। गत 13 अक्टूबर से लेकर वह लगातार धारूहेड़ा थाना पुलिस से लेकर तमाम आलाधिकारियों के यहां जा चुकी हैं लेकिन आज तक कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले को सामाजिक तौर पर सुलझाने के लिए कई बार पंचायत भी आयोजित की गई लेकिन कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोग पंचायत में आते तक नहीं। मां- बेटी अब अपना गांव छोड़कर राजस्थान में अपने पिता के घर रहने को मजबूर हैं। शहीद की पत्नी संतोष ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से न्याय की गुहार लगाई है।
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धारूहेड़ा। जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग को लेकर एक शहीद की पत्नी संतोष दर-दर भटक रही हैं।
गांव ढाकिया निवासी संतोष के पति राय सिंह बीएसएफ में थे 13 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान वह शहीद हो गए थे। शहीद के इकलौते बेटे दिनेश कुमार भी बीएसएफ में भर्ती हुए लेकिन 8 सितंबर 2024 को पंजाब के पठानकोट में ड्यूटी के दौरान दिनेश कुमार भी शहीद हो गए। परिवार में एकमात्र बेटी प्रियंका ने भी देश सेवा को चुना और अब वह बाड़मेर में बीएसएफ में सेवा दे रही हैं। पूरा परिवार देश सेवा कर रहा था लेकिन पीछे से उनके दादा के हिस्से से आई करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर परिवार के लोगों ने ही कब्जा कर लिया।
इस कब्जे को छुड़ाने के लिए शहीद राय सिंह की पत्नी संतोष व बीएसएफ में कार्यरत उनकी पुत्री प्रियंका दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं। गत 13 अक्टूबर से लेकर वह लगातार धारूहेड़ा थाना पुलिस से लेकर तमाम आलाधिकारियों के यहां जा चुकी हैं लेकिन आज तक कब्जा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले को सामाजिक तौर पर सुलझाने के लिए कई बार पंचायत भी आयोजित की गई लेकिन कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोग पंचायत में आते तक नहीं। मां- बेटी अब अपना गांव छोड़कर राजस्थान में अपने पिता के घर रहने को मजबूर हैं। शहीद की पत्नी संतोष ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से न्याय की गुहार लगाई है।
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