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Rewari News: 6.10 करोड़ रुपये से सुधरेगी सेक्टर-11 की दशा
Thu, 07 Dec 2023 12:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:40 AM IST
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रेवाड़ी। औद्योगिक सेक्टर-11 के लोगों के लिए राहत की खबर है। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम लिमिटेड की ओर से सेक्टर की दशा सुधारने को लेकर टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के तहत सेक्टर पर करीब 6,10,73,780 रुपये की राशि खर्च की जाएगी। फिलहाल टेंडर जारी कर दिए गए हैं।
लंबे समय से सेक्टर में विकास कार्य न होने की वजह से क्षेत्र के लोग काफी परेशान हैं। समस्या को लेकर कई बार प्रशासन अधिकारियों को भी विकास कार्य करवाने को लेकर मांग की गई, मगर कोई भी हल नहीं निकाला गया। वहीं, अब टेंडर जारी होने के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है। सेक्टर-11 एक औद्योगिक क्षेत्र है, मगर यहां पर मूल सुविधाएं न होने की वजह से यह पिछड़ता चला गया और अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि यह सेक्टर केवल नाम का ही औद्योगिक क्षेत्र रह गया है। हालांकि, अब विकास कार्य होने के बाद सेक्टर के हालात सुधरने की उम्मीद जगी है।
43 साल पहले बना था सेक्टर-11, सुविधाएं नहीं होने से पलायन कर चुके हैं उद्योगपति
43 साल पहले बने जिले के पहले औद्योगिक सेक्टर-11 में आज तक जिम्मेदार बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पाएं हैं। इसके चलते यहां पर नाम मात्र ही फैक्टरियां संचालित हो रही हैं। सड़क, सीवर और पेयजल जैसी मूूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के चलते उद्योगपति यहां से पलायन कर चुके हैं, जबकि 1980 में इस औद्योगिक सेक्टर का निर्माण देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले मेटल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।
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दो विभागों की आपसी खींचतान में फंसा रहा क्षेत्र का विकास
बीच में हालात इतने खराब थे कि 40 वर्ष बीतने के बाद भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) व एचएसआईआईडीसी (हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम लिमिटेड) के अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ते रहे। इसी खींचतान में कई वर्ष तक विकास का कार्य ठप पड़ा रहा। लोगों को भी समझ नहीं आ रहा था कि अब सेक्टर का भविष्य किसके पास है। फिलहाल विकास की जिम्मेदारी एचएसआईआईडीसी के पास है।
रियल एस्टेट और निर्मित संपत्तियों में निवेशकों के लिए धारूहेड़ा बना पसंदीदा स्थान
रेवाड़ी के साथ दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित धारूहेड़ा में औद्योगिक सेक्टर विकसित किया गया था, यहां पर भी रेवाड़ी जैसी ही समस्याएं थीं, लेकिन अब यहां पर पहले के मुकाबले हालातों में सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी उम्मीद के मुताबिक काम होना बाकी है। धारूहेड़ा में 500 से अधिक औद्योगिक प्लांट व फैक्टरियां चल रही हैं, जबकि भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां पर व्यवसाय के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। धारूहेड़ा अब रियल एस्टेट और निर्मित संपत्तियों में निवेशकों के लिए एक पसंदीदा स्थान है।
1980 से शुरू हुआ था औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम
औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम जिले में 1980 से शुरू हुआ था। 1984-85 में कुल 77 लाख रुपये का निवेश जिले में हुआ था। इसके बाद हर साल 50 से 60 यूनिट बढ़ती चली गई। 1995 के बाद तो यहां यूनिट लगाने के लिए एकदम होड़ लग गई, लेकिन अधिकतर फैक्टरी बावल औद्योगिक क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गई। यदि जिम्मेदारों ने सुध ली होती तो हालात ज्यादा बेहतर हो सकते थे। दूसरी तरफ औद्योगिक मॉडल टाउनशिप बावल एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बना गया, जिसे 1995 में हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की ओर से विकसित किया गया था। यह दिल्ली वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे आईएमटी बहादुरगढ़, आईएमटी कुंडली, सोनीपत और आईएमटी मानेसर के साथ हरियाणा के अन्य आईएमटी के साथ भी तालमेल बैठाता है।
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लंबे समय से सेक्टर में विकास कार्य न होने की वजह से क्षेत्र के लोग काफी परेशान हैं। समस्या को लेकर कई बार प्रशासन अधिकारियों को भी विकास कार्य करवाने को लेकर मांग की गई, मगर कोई भी हल नहीं निकाला गया। वहीं, अब टेंडर जारी होने के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है। सेक्टर-11 एक औद्योगिक क्षेत्र है, मगर यहां पर मूल सुविधाएं न होने की वजह से यह पिछड़ता चला गया और अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि यह सेक्टर केवल नाम का ही औद्योगिक क्षेत्र रह गया है। हालांकि, अब विकास कार्य होने के बाद सेक्टर के हालात सुधरने की उम्मीद जगी है।
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43 साल पहले बना था सेक्टर-11, सुविधाएं नहीं होने से पलायन कर चुके हैं उद्योगपति
43 साल पहले बने जिले के पहले औद्योगिक सेक्टर-11 में आज तक जिम्मेदार बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पाएं हैं। इसके चलते यहां पर नाम मात्र ही फैक्टरियां संचालित हो रही हैं। सड़क, सीवर और पेयजल जैसी मूूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के चलते उद्योगपति यहां से पलायन कर चुके हैं, जबकि 1980 में इस औद्योगिक सेक्टर का निर्माण देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले मेटल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।
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दो विभागों की आपसी खींचतान में फंसा रहा क्षेत्र का विकास
बीच में हालात इतने खराब थे कि 40 वर्ष बीतने के बाद भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) व एचएसआईआईडीसी (हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम लिमिटेड) के अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ते रहे। इसी खींचतान में कई वर्ष तक विकास का कार्य ठप पड़ा रहा। लोगों को भी समझ नहीं आ रहा था कि अब सेक्टर का भविष्य किसके पास है। फिलहाल विकास की जिम्मेदारी एचएसआईआईडीसी के पास है।
रियल एस्टेट और निर्मित संपत्तियों में निवेशकों के लिए धारूहेड़ा बना पसंदीदा स्थान
रेवाड़ी के साथ दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित धारूहेड़ा में औद्योगिक सेक्टर विकसित किया गया था, यहां पर भी रेवाड़ी जैसी ही समस्याएं थीं, लेकिन अब यहां पर पहले के मुकाबले हालातों में सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी उम्मीद के मुताबिक काम होना बाकी है। धारूहेड़ा में 500 से अधिक औद्योगिक प्लांट व फैक्टरियां चल रही हैं, जबकि भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां पर व्यवसाय के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। धारूहेड़ा अब रियल एस्टेट और निर्मित संपत्तियों में निवेशकों के लिए एक पसंदीदा स्थान है।
1980 से शुरू हुआ था औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम
औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम जिले में 1980 से शुरू हुआ था। 1984-85 में कुल 77 लाख रुपये का निवेश जिले में हुआ था। इसके बाद हर साल 50 से 60 यूनिट बढ़ती चली गई। 1995 के बाद तो यहां यूनिट लगाने के लिए एकदम होड़ लग गई, लेकिन अधिकतर फैक्टरी बावल औद्योगिक क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गई। यदि जिम्मेदारों ने सुध ली होती तो हालात ज्यादा बेहतर हो सकते थे। दूसरी तरफ औद्योगिक मॉडल टाउनशिप बावल एक बड़ा औद्योगिक केंद्र बना गया, जिसे 1995 में हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) की ओर से विकसित किया गया था। यह दिल्ली वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे आईएमटी बहादुरगढ़, आईएमटी कुंडली, सोनीपत और आईएमटी मानेसर के साथ हरियाणा के अन्य आईएमटी के साथ भी तालमेल बैठाता है।