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Rewari News: मारपीट और एससी-एसटी एक्ट मामले में चार दोषियों को दो-दो साल की कैद
Thu, 17 Sep 2026 11:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:41 PM IST
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रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंकिता शर्मा की अदालत ने मारपीट और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामले में चार दोषियों को सजा सुनाई है। अदालत ने गांव बासदूदा निवासी नरेश, अत्तर सिंह, अमित और कृष्ण कुमार उर्फ टोनी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 325 और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 2-2 साल की कैद की सजा सुनाई।
अदालत के आदेश के अनुसार चारों दोषियों को आईपीसी की धारा 323/34 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। वहीं धारा 325/34 के तहत दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये जुर्माना तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वीए) के तहत भी दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में संबंधित धाराओं के अनुसार अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही जांच और ट्रायल के दौरान आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। आदेश के अनुसार चारों दोषियों ने जुर्माने की राशि जमा कर दी।
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सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों की ओर से सजा निलंबित करने के लिए आवेदन पेश किया गया। अदालत ने कहा कि सुनाई गई सजा तीन वर्ष से अधिक नहीं है और जुर्माना भी जमा किया जा चुका है। इसके चलते अपील दायर करने के लिए एक माह के लिए सजा निलंबित कर दी गई।
अदालत ने चारों को 50-50 हजार रुपये के जमानती बांड और इतनी ही राशि के एक-एक जमानती के आधार पर अंतरिम जमानत दी। उन्हें 15 अक्तूबर तक अपील दायर कर हाईकोर्ट से जमानत लेने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं करने पर उन्हें अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी।
2020 में राजेश और रवि के साथ मारपीट का आरोप:
बासदूदा गांव में वर्ष 2020 में हुए मारपीट के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पूरी की थी। पुलिस के अनुसार 30 जून 2020 को राजेश और उसका भाई राकेश गांव लौट रहे थे। इसी दौरान गांव में कुछ लोगों के साथ उनका विवाद हो गया। पुलिस को अस्पताल से मिली सूचना के बाद जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों के बयान दर्ज किए। राजेश ने अपने बयान में कहा था कि अत्तर सिंह, नरेश, अमित और कृष्ण कुमार ने उसके साथ मारपीट की। मामले में जातिसूचक टिप्पणी करने और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद जांच में शामिल किया गया था। जांच पूरी होने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया गया।
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अदालत के आदेश के अनुसार चारों दोषियों को आईपीसी की धारा 323/34 के तहत छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। वहीं धारा 325/34 के तहत दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये जुर्माना तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(वीए) के तहत भी दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में संबंधित धाराओं के अनुसार अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही जांच और ट्रायल के दौरान आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा। आदेश के अनुसार चारों दोषियों ने जुर्माने की राशि जमा कर दी।
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सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों की ओर से सजा निलंबित करने के लिए आवेदन पेश किया गया। अदालत ने कहा कि सुनाई गई सजा तीन वर्ष से अधिक नहीं है और जुर्माना भी जमा किया जा चुका है। इसके चलते अपील दायर करने के लिए एक माह के लिए सजा निलंबित कर दी गई।
अदालत ने चारों को 50-50 हजार रुपये के जमानती बांड और इतनी ही राशि के एक-एक जमानती के आधार पर अंतरिम जमानत दी। उन्हें 15 अक्तूबर तक अपील दायर कर हाईकोर्ट से जमानत लेने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं करने पर उन्हें अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर सजा भुगतनी होगी।
2020 में राजेश और रवि के साथ मारपीट का आरोप:
बासदूदा गांव में वर्ष 2020 में हुए मारपीट के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पूरी की थी। पुलिस के अनुसार 30 जून 2020 को राजेश और उसका भाई राकेश गांव लौट रहे थे। इसी दौरान गांव में कुछ लोगों के साथ उनका विवाद हो गया। पुलिस को अस्पताल से मिली सूचना के बाद जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों के बयान दर्ज किए। राजेश ने अपने बयान में कहा था कि अत्तर सिंह, नरेश, अमित और कृष्ण कुमार ने उसके साथ मारपीट की। मामले में जातिसूचक टिप्पणी करने और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद जांच में शामिल किया गया था। जांच पूरी होने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया गया।