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Rewari News: विद्यार्थी सिद्धयोग से एकाग्रता बढ़ा सकते हैं
Wed, 14 Jan 2026 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 14 Jan 2026 11:56 PM IST
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फोटो: 32रेवाड़ी। सेक्टर 18 स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में आयोजित विशेष ध्यान सत्र में भाग
रेवाड़ी। सेक्टर 18 स्थित प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले राजकीय कन्या महाविद्यालय रेवाड़ी में बुधवार को सिद्धयोग पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। संचालन अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र जोधपुर से पधारी टीम ने किया।
प्रशिक्षकों ने पतंजलि के अष्टांग योग के तीन प्रमुख अंगों धारणा, ध्यान व समाधि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सिद्धयोग के लाभ व प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विद्यार्थी सिद्धयोग का प्रयोग करके एकाग्रता बढ़ा सकते हैं। इसका लाभ उन्हें अपनी पढ़ाई में भी मिल सकता है। सिद्धयोग पर 15 मिनट का एक विशेष ध्यान सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें महाविद्यालय स्टाफ तथा छात्राओं ने स्वयं इसका अनुभव किया।
उसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें स्टाफ व विद्यार्थियों के मन में उठ रही जिज्ञासाओं का टीम सदस्यों ने निराकरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय प्राचार्या डॉ ज्योति यादव ने कहा कि विज्ञान व अध्यात्म का अटूट बंधन है। योग व ध्यान एक पूर्णतया वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिससे शरीर और मन का संतुलन बनता है।
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एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रजनी व डॉ. रेनू ने बताया कि स्वयंसेविकाओं ने इस विशेष कार्यशाला में भाग लिया। सिद्धयोग का अनुभव किया।
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प्रशिक्षकों ने पतंजलि के अष्टांग योग के तीन प्रमुख अंगों धारणा, ध्यान व समाधि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए सिद्धयोग के लाभ व प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विद्यार्थी सिद्धयोग का प्रयोग करके एकाग्रता बढ़ा सकते हैं। इसका लाभ उन्हें अपनी पढ़ाई में भी मिल सकता है। सिद्धयोग पर 15 मिनट का एक विशेष ध्यान सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें महाविद्यालय स्टाफ तथा छात्राओं ने स्वयं इसका अनुभव किया।
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उसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें स्टाफ व विद्यार्थियों के मन में उठ रही जिज्ञासाओं का टीम सदस्यों ने निराकरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय प्राचार्या डॉ ज्योति यादव ने कहा कि विज्ञान व अध्यात्म का अटूट बंधन है। योग व ध्यान एक पूर्णतया वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिससे शरीर और मन का संतुलन बनता है।
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एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रजनी व डॉ. रेनू ने बताया कि स्वयंसेविकाओं ने इस विशेष कार्यशाला में भाग लिया। सिद्धयोग का अनुभव किया।