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Rewari News: गांव नाहड़ में मुगलकालीन धरोहर खो रहे अस्तित्व
Sat, 09 Mar 2024 12:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 09 Mar 2024 12:14 AM IST
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कोसली। गांव नाहड़ में मुगलकाल के धरोहर जर्जर हो गए हैं। क्षेत्र की सामाजिक संस्था और ग्रामीणों ने इनके अस्तित्व को बचाने के लिए मरम्मत की मांग की है। आजादी के बाद नवाब के महल में सब तहसील और उपरी हिस्सा में लोकनिर्माण विभाग ने विश्राम गृह बना दिया था।
इसी भवन के निचले हिस्से को 1987 में नाहड़ की सब तहसील को तोड़ दिया गया ओर पटवार घर बना दिया गया था। 1996 के बाद से खंडहर हो गया। नहाड़ियां नवाब की रियासत के रूप में पहचान बनाने वाला किला देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया है। हरियाणा में चलाए गए न्याय युद्ध के दौरान लोक नायक स्वर्गीय चौधरी देवीलाल को इसी भवन में नजरबंद किया गया था। इमरजेंसी के समय भाजपा नेता रामबिलास शर्मा भी इसी भवन में नजरबंद थे। वहीं जब रामबिलास शर्मा इस क्षेत्र में आते हैं तो वह नजरबंदी के किस्से जरूर सुनाते हैं।
शहीद और पूर्व सैनिक और सैनिक कल्याण समिति के संयोजक डॉक्टर जय भगवान भारद्वाज ने सीएम मनोहर लाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, सांसद डॉक्टर अरविंद शर्मा, विधायक लक्ष्मण सिंह यादव से धरोहर के रखरखाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग मरम्मत करे, जिससे कि इमारत की ऐतिहासिकता बनी रहे।
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1420 से 1430 के बीच में किले का हुआ था निर्माण
क्षेत्र के पूर्व सरपंच अभय सिह, रोशनलाल, प्रेम प्रकाश, मास्टर सतेंद्र, मनोज गोयल आदि ने बताया कि गांव में 15वीं शताब्दी के प्रारंभ में बलूच यहां आए। इन्होंने 1420 से 1430 के बीच में किले का निर्माण कराया था। इसके चारों ओर ऊंची बुर्ज थी। जो समय के साथ गिर चुकी है। किले के साथ ही 12 दरी थी। इसमें नवाब का परिवार आया करता था। नवाब के पास नाहड़ के 24 गांव और दुजाना के पांच गांवों की रियासतें थीं। नवाब दुजाना ओर नाहड़ दोनों जगह रहते थे।
इंसेट
इलाके के लोगों ने की ये मांग
ग्रामीण बताते हैं कि प्रथम नवाब समद खान का जन्म 1764 ईस्वी में हुआ था। 41 वर्ष की आयु में अंग्रेज सेनापति लार्ड लेक ने दुजाना और नाहड़ रियासत के 30 गांव के नवाब के पद पर नियुक्त किया था। इलाके के लोगों और समाजसेवी संगठनों द्वारा बार-बार जनप्रतिनिधियों से इन विरासतों की देखरेख की मांग की जाती है। लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया।
नाहड़ महल के रखरखाव के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि इस वर्ष कार्य को पूरा लिया जाएगा।-जयप्रकाश, एसडीएम, कोसली
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इसी भवन के निचले हिस्से को 1987 में नाहड़ की सब तहसील को तोड़ दिया गया ओर पटवार घर बना दिया गया था। 1996 के बाद से खंडहर हो गया। नहाड़ियां नवाब की रियासत के रूप में पहचान बनाने वाला किला देखरेख के अभाव में जर्जर हो गया है। हरियाणा में चलाए गए न्याय युद्ध के दौरान लोक नायक स्वर्गीय चौधरी देवीलाल को इसी भवन में नजरबंद किया गया था। इमरजेंसी के समय भाजपा नेता रामबिलास शर्मा भी इसी भवन में नजरबंद थे। वहीं जब रामबिलास शर्मा इस क्षेत्र में आते हैं तो वह नजरबंदी के किस्से जरूर सुनाते हैं।
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शहीद और पूर्व सैनिक और सैनिक कल्याण समिति के संयोजक डॉक्टर जय भगवान भारद्वाज ने सीएम मनोहर लाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, सांसद डॉक्टर अरविंद शर्मा, विधायक लक्ष्मण सिंह यादव से धरोहर के रखरखाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग मरम्मत करे, जिससे कि इमारत की ऐतिहासिकता बनी रहे।
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1420 से 1430 के बीच में किले का हुआ था निर्माण
क्षेत्र के पूर्व सरपंच अभय सिह, रोशनलाल, प्रेम प्रकाश, मास्टर सतेंद्र, मनोज गोयल आदि ने बताया कि गांव में 15वीं शताब्दी के प्रारंभ में बलूच यहां आए। इन्होंने 1420 से 1430 के बीच में किले का निर्माण कराया था। इसके चारों ओर ऊंची बुर्ज थी। जो समय के साथ गिर चुकी है। किले के साथ ही 12 दरी थी। इसमें नवाब का परिवार आया करता था। नवाब के पास नाहड़ के 24 गांव और दुजाना के पांच गांवों की रियासतें थीं। नवाब दुजाना ओर नाहड़ दोनों जगह रहते थे।
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इलाके के लोगों ने की ये मांग
ग्रामीण बताते हैं कि प्रथम नवाब समद खान का जन्म 1764 ईस्वी में हुआ था। 41 वर्ष की आयु में अंग्रेज सेनापति लार्ड लेक ने दुजाना और नाहड़ रियासत के 30 गांव के नवाब के पद पर नियुक्त किया था। इलाके के लोगों और समाजसेवी संगठनों द्वारा बार-बार जनप्रतिनिधियों से इन विरासतों की देखरेख की मांग की जाती है। लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया।
नाहड़ महल के रखरखाव के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि इस वर्ष कार्य को पूरा लिया जाएगा।-जयप्रकाश, एसडीएम, कोसली