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Rewari News: फ्लोरोसिस से जूझ रहे बनीपुर गांव के 70 फीसदी लोग
Wed, 21 May 2025 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 21 May 2025 12:39 AM IST
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बनीपुर में हैंडपंप से पानी भरता युवक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। क्षेत्र के बनीपुर गांव के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। यहां के लोग भूजल का सेवन करते हैं। यही वजह है कि इस गांव के 70 फीसदी लोग फ्लोरोसिस की बीमारी से जूझ रहे हैं।
पूरे बावल क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से लोग काफी अलग-अलग तरह की समस्या से परेशान हैं। लोगों से जब बातचीत की गई तो पता चला कि यह समस्या 20 साल से भी अधिक समय से है। इसके बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का प्रयास नहीं किया गया।
कस्बे के बनीपुर गांव के लोग भूजल का सेवन करते हैं। इस गांव के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। फ्लोराइड युक्त पानी का सेवन करने से गांव के 70% लोग फ्लोरोसिस बीमारी से त्रस्त हैं। अधिकतर लोग गठिया, जोड़ों के दर्द और दांत खदरने की समस्या से परेशान हैं।
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गांव के लोग कई बार शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की मांग कर चुके हैं लेकिन इसकी व्यवस्था नहीं की जा सकी। सक्षम लोग पानी खरीद कर पी रहे हैं लेकिन जो सक्षम नहीं हैं, वे भूजल का सेवन करने के लिए विवश हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि इस समस्या से अवगत कराने के बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी शुद्ध पेयजल का इंतजाम नहीं कर सके हैं। प्रशासन ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। संवाद
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फ्लोरोसिस के ये हैं लक्षण
दंत रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. मीत वर्मा ने बताया कि दांतों में पीलापन, गर्दन, पीठ, कंधे व घुटनों के जोड़ों में दर्द फ्लोरोसिस के लक्षण हैं। इससे स्मरण शक्ति कमजोर होती है और गुर्दे की बीमारी होने का खतरा रहता है। स्केलेटल फ्लोरोसिस हड्डियों की बीमारी है, जो अंदर ही अंदर हड्डियों को खोखला कर देती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को गठिया जैसा दर्द होता है। फ्लोरोसिस से ग्रसित व्यक्ति को कमर दर्द, हाथ पैरों में दर्द और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। मांसपेशियों के फ्लोरोसिस में बार-बार पेट में दर्द होना, उल्टी आना, सुन्नपन की समस्या होती है। सिविल अस्पताल में एक साल पहले शुरू हुई फ्लोरोसिस टेस्टिंग लैब, डेंटल ओपीडी में भी होती है।
वर्जन:
2006 में बोर के पानी की जांच हुई थी। तब डॉक्टर ने पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक बताई थी। गांव में लगभग 70 प्रतिशत लोग फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं। कुछ लोगों ने आरओ प्लांट लगा रखा है तो कुछ लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।-रणसिंह, बनीपुर।
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जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी के सैंपल लिए थे। पानी में फ्लोराइड अधिक है। गांव में 70 प्रतिशत लोगों को घुटने में दर्द और मसूड़े से संबंधित समस्या है। इसको देखते हुए चौपाल के पास में आरओ प्लांट लगाने की योजना है।-पवन कुमार, सरपंच, बनीपुर।
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घुटनों में दर्द रहता है। डॉक्टर ने बताया कि फ्लोराइडयुक्त पानी का सेवन करने से यह परेशानी हो रही है। आरओ प्लांट से बीस रुपये प्रति मटका के हिसाब से पानी खरीद कर पी रहे हैं। गांव का भूजल पीने योग्य नहीं है। -विजय कुमारी, बनीपुर
वर्जन:
जिन गांवों में पानी पीने योग्य नहीं है, वहां पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। कई गांवों में स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए कार्य चल रहा है। जल्द ही लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा। इसको लेकर विभाग गंभीर है।-मुकेश शर्मा, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग।
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बावल। क्षेत्र के बनीपुर गांव के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। यहां के लोग भूजल का सेवन करते हैं। यही वजह है कि इस गांव के 70 फीसदी लोग फ्लोरोसिस की बीमारी से जूझ रहे हैं।
पूरे बावल क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से लोग काफी अलग-अलग तरह की समस्या से परेशान हैं। लोगों से जब बातचीत की गई तो पता चला कि यह समस्या 20 साल से भी अधिक समय से है। इसके बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का प्रयास नहीं किया गया।
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कस्बे के बनीपुर गांव के लोग भूजल का सेवन करते हैं। इस गांव के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। फ्लोराइड युक्त पानी का सेवन करने से गांव के 70% लोग फ्लोरोसिस बीमारी से त्रस्त हैं। अधिकतर लोग गठिया, जोड़ों के दर्द और दांत खदरने की समस्या से परेशान हैं।
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गांव के लोग कई बार शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की मांग कर चुके हैं लेकिन इसकी व्यवस्था नहीं की जा सकी। सक्षम लोग पानी खरीद कर पी रहे हैं लेकिन जो सक्षम नहीं हैं, वे भूजल का सेवन करने के लिए विवश हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि इस समस्या से अवगत कराने के बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी शुद्ध पेयजल का इंतजाम नहीं कर सके हैं। प्रशासन ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। संवाद
फ्लोरोसिस के ये हैं लक्षण
दंत रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. मीत वर्मा ने बताया कि दांतों में पीलापन, गर्दन, पीठ, कंधे व घुटनों के जोड़ों में दर्द फ्लोरोसिस के लक्षण हैं। इससे स्मरण शक्ति कमजोर होती है और गुर्दे की बीमारी होने का खतरा रहता है। स्केलेटल फ्लोरोसिस हड्डियों की बीमारी है, जो अंदर ही अंदर हड्डियों को खोखला कर देती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को गठिया जैसा दर्द होता है। फ्लोरोसिस से ग्रसित व्यक्ति को कमर दर्द, हाथ पैरों में दर्द और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। मांसपेशियों के फ्लोरोसिस में बार-बार पेट में दर्द होना, उल्टी आना, सुन्नपन की समस्या होती है। सिविल अस्पताल में एक साल पहले शुरू हुई फ्लोरोसिस टेस्टिंग लैब, डेंटल ओपीडी में भी होती है।
वर्जन:
2006 में बोर के पानी की जांच हुई थी। तब डॉक्टर ने पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक बताई थी। गांव में लगभग 70 प्रतिशत लोग फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं। कुछ लोगों ने आरओ प्लांट लगा रखा है तो कुछ लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं।-रणसिंह, बनीपुर।
जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी के सैंपल लिए थे। पानी में फ्लोराइड अधिक है। गांव में 70 प्रतिशत लोगों को घुटने में दर्द और मसूड़े से संबंधित समस्या है। इसको देखते हुए चौपाल के पास में आरओ प्लांट लगाने की योजना है।-पवन कुमार, सरपंच, बनीपुर।
घुटनों में दर्द रहता है। डॉक्टर ने बताया कि फ्लोराइडयुक्त पानी का सेवन करने से यह परेशानी हो रही है। आरओ प्लांट से बीस रुपये प्रति मटका के हिसाब से पानी खरीद कर पी रहे हैं। गांव का भूजल पीने योग्य नहीं है। -विजय कुमारी, बनीपुर
वर्जन:
जिन गांवों में पानी पीने योग्य नहीं है, वहां पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। कई गांवों में स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए कार्य चल रहा है। जल्द ही लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा। इसको लेकर विभाग गंभीर है।-मुकेश शर्मा, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग।