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Rewari News: 18 हजार बच्चे बीमार, 80 हजार की हुई जांच
Fri, 28 Feb 2025 02:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 28 Feb 2025 02:14 AM IST
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रेवाड़ी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 11 माह में करीब 80 हजार बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई है। इनमें 18 हजार बच्चों के स्वास्थ्य में कोई न कोई कमी देखने को मिली है। बच्चों में दांतों की बीमारी ज्यादा मिली है। दंत रोग से पीड़ित बच्चों की संख्या 7 हजार से अधिक है। इसके अलावा बच्चों की नजर भी कमजोर मिली है। गंभीर (सीवियर) एनिमिया भी पाया गया है। 500 बच्चों में खून की कमी पाई गई है।
चिकित्सकों के अनुसार खून की कमी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है। स्वस्थ बच्चों की तुलना में एनिमिया ग्रसित बच्चों की सीखने की क्षमता कम हो जाती है। वहीं, दांतों की बीमारी 7200 बच्चों में मिली है। किसी में पायरिया, दांतों में सड़न, हिलने व अन्य समस्या मिली है। ज्यादा बीमार बच्चों को सिविल अस्पताल में भी रेफर किया गया। इन बच्चों को डेंटल ओपीडी में देखा जाता है। वहीं, 4500 बच्चों में किसी में नजर कमजोर व किसी में दूर या नजदीक में कम दिखने की समस्या मिली। ऐसे बच्चों को चश्मे देने के अलावा आंखों को स्वस्थ रखने के टिप्स बताए जाते हैं।
सात टीमें कर रही हैं कार्य : स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 7 टीमों को लगाया हुआ है। 5 टीमें ब्लॉक में, एक शहर व एक कोसली में जांच कार्य संभालती हैं। ये टीमें सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं।
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चिकित्सकों के अनुसार खून की कमी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है। स्वस्थ बच्चों की तुलना में एनिमिया ग्रसित बच्चों की सीखने की क्षमता कम हो जाती है। वहीं, दांतों की बीमारी 7200 बच्चों में मिली है। किसी में पायरिया, दांतों में सड़न, हिलने व अन्य समस्या मिली है। ज्यादा बीमार बच्चों को सिविल अस्पताल में भी रेफर किया गया। इन बच्चों को डेंटल ओपीडी में देखा जाता है। वहीं, 4500 बच्चों में किसी में नजर कमजोर व किसी में दूर या नजदीक में कम दिखने की समस्या मिली। ऐसे बच्चों को चश्मे देने के अलावा आंखों को स्वस्थ रखने के टिप्स बताए जाते हैं।
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सात टीमें कर रही हैं कार्य : स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 7 टीमों को लगाया हुआ है। 5 टीमें ब्लॉक में, एक शहर व एक कोसली में जांच कार्य संभालती हैं। ये टीमें सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं।
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