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भगवान को निर्मल मन से भक्ति करने वाले भक्त प्रिय : नरेंद्रा नंद
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थीम पार्क में चल रहे 501 कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ के छठे दिन आदि गुरु शंकराचार्य महा संस्थान सुमेरु मठ काशी के जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती भी पहुंचे। मंगलवार शाम जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने सत्य सनातन संस्कृति, संस्कार व हिंदुत्व पर व्याख्यान दिया। यज्ञ सम्राट हरिओम, महामंडलेश्वर डॉ. प्रेमानंद, महामंडलेश्वर विकास दास मोहड़ा धाम, लक्षचंडी महायज्ञ आयोजन समिति के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा गोल्डी, अशोक शर्मा ने सभी संतों का स्वागत किया। नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यदि भारत में एक साथ 11 लक्षचंडी महायज्ञ का अनुष्ठान हो तो शत्रु देश घुटनों पर होंगे। हमारे देश की तरफ किसी भी राष्ट्र विरोधी ताकतों की आंख उठाने की हिम्मत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भगवान को निर्मल मन से भक्ति करने वाले भक्त बहुत ही प्रिय होते हैं।
उन्होंने कहा कि छल और कपट करने वालों को परमात्मा की कृपा नहीं मिलती है। इस संसार में परमात्मा की शरण ही सच्ची शरण है। इस संसार में जो भी होता है वह परमात्मा की शरण से ही होता है। भगवान की भक्ति मोह के वशीभूत होकर नहीं करना चाहिए। साधना के पथ पर कठिनाइयां आती हैं परंतु जो भी साधक भक्ति के पथ पर जाते हैं उनके जीवन की सारी कठिनाइयां दूर होती है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। श्री दुर्गाजी का एक नाम चंडी भी है। मार्कंडेय पुराण में इसी देवी चंडी का महात्म्य बताया है। उसमें देवी के विविध रूपों एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें से सात सौ श्लोक एकत्रित कर देवी उपासना के लिए श्री दुर्गा सप्तशती नामक ग्रंथ बनाया गया है। कहा कि इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है और सौभाग्य इस विधि के बाद आपका साथ देने लगता है। लक्षचंडी यज्ञ के बाद दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। इस यज्ञ को गणेश जी, भगवान शिव, नवग्रह, और नवदुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य जीवन धन्य होता है।
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उन्होंने कहा कि छल और कपट करने वालों को परमात्मा की कृपा नहीं मिलती है। इस संसार में परमात्मा की शरण ही सच्ची शरण है। इस संसार में जो भी होता है वह परमात्मा की शरण से ही होता है। भगवान की भक्ति मोह के वशीभूत होकर नहीं करना चाहिए। साधना के पथ पर कठिनाइयां आती हैं परंतु जो भी साधक भक्ति के पथ पर जाते हैं उनके जीवन की सारी कठिनाइयां दूर होती है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। श्री दुर्गाजी का एक नाम चंडी भी है। मार्कंडेय पुराण में इसी देवी चंडी का महात्म्य बताया है। उसमें देवी के विविध रूपों एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें से सात सौ श्लोक एकत्रित कर देवी उपासना के लिए श्री दुर्गा सप्तशती नामक ग्रंथ बनाया गया है। कहा कि इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है और सौभाग्य इस विधि के बाद आपका साथ देने लगता है। लक्षचंडी यज्ञ के बाद दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। इस यज्ञ को गणेश जी, भगवान शिव, नवग्रह, और नवदुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य जीवन धन्य होता है।
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