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12 घंटे में लड़का से हो गया लड़की

Tue, 01 Sep 2015 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला,कुरुक्षेत्र Updated Tue, 01 Sep 2015 01:00 AM IST
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एलएनजेपी अस्पताल में सोमवार को सुबह बच्चा बदलने का आरोप लगाकर परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ ने देर रात उन्हें बेटा होने की सूचना दी और बधाई भी ले ली। इसके बाद कहने लगे कि लड़की हुई है। उन्होंने कहा कि जानबूझ कर उनके बच्चे को बदला गया है।

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दूसरी ओर अस्पताल स्टाफ का कहना है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में लड़की पैदा होने की ही एंट्री है। पता नहीं यह गलतफहमी कैसे हो गई। हंगामे की सूचना पर एएसपी सुमेर प्रताप पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने परिजनों को शांत करवाकर एमएस के रूम से बाहर निकाला। बाद में परिजन डीएनए टेस्ट करवाने की जिद पर अड़ गए। इस पर अस्पताल प्रशासन ने सहमति जताई है। 
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शाहाबाद के गांव कलसाना निवासी पूर्व सरपंच कबाड़ी राम के बेटे गुलशन ने बताया कि उसने अपनी पत्नी प्रीति को शनिवार को एलएनजेपी अस्पताल में दाखिल करवाया था। रविवार को सुबह 11 बजे के करीब बच्चे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद स्टाफ ने बताया कि तुम्हारे घर लड़का आया है और हमसे बधाई भी ले गई। लेकिन, साथ ही ही हमें बच्चे से मिलने नहीं दिया। रात को करीब 11 बजे के करीब स्टाफ आई और कहा कि बच्चे का डाइपर बदलना है। जब मेरी सास कृष्णा डाइपर बदल रही थी तो उन्हें बच्चे के लिंग का पता चला।
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परिजनों ने लगाए बच्चा बदलने के आरोप
परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन ने जानबूझ कर उनके बच्चे को बदला है। कलसाना निवासी गुलशन ने बताया कि मुझे पहले बताया गया कि लड़का हुआ है, लेकिन स्टाफ ने जानबूझ कर मेरे लड़के के बदले में लड़की दे रहा है। इतना ही नहीं बच्चे के जन्म के बाद मैंने एक फार्म पर साइन किए थे जिसमें लिखा था कि लड़का हुआ है। गुलशन ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद मेरे बच्चे को न मुझे और न ही मेरे परिवार के किसी सदस्य को बच्चे से मिलने नहीं दिया।

मेरे बच्चे को नहीं थी ऑक्सीजन की जरूरत
गुलशन ने कहा कि मेरे बच्चे को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं थी, क्योंकि जब में बच्चे से मिलने गया तो स्टाफ ने मुझे ऑक्सीजन का सिलेंडर लगाने को कहा। जिसे लगाने में मुझे करीब आधा घंटा लग गया। क्योंकि सिलेंडर काफी थे और उनमें पता नहीं लग पाया कौन-सा खाली है और कौन-सा भरा हुआ।  उन्होंने कहा कि अब सिलेंडर खाली हो गया तो सीधी सी बात है कि मेरे बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिली। यदि बच्चे को ऑक्सीजन की जरूरत होती हो आधा घंटा बच्चा बिना ऑक्सीजन के कैसे रह गया ?

बधाई भी मांगी अस्पताल स्टाफ ने
गुलशन ने बताया कि अस्पताल स्टाफ ने लड़के की होने की खुशी में उससे बधाई भी मांगी थी। जिस पर मैंने बधाई के नाम पर 500 रुपये स्टाफ को दिए और उसके बाद दो-तीन और भी महिलाएं आईं जिन्हें 100-100 रूपये बधाई के रूप में दी।


परिजनों ने काटा बवाल, पुलिस ने कराया शांत
बच्चे के परिजन गुस्साते हुए एमएस के कमरे में घुस गए और उन्होंने वहां अस्पताल प्रशासन को जमकर खरी खरी सुनाई। खूब हंगामा बढ़ता देखकर अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने पहले कहा कि डॉक्टरों के पास आधे घंटे का समय है या तो मेरा बेटा मुझे दे दो, नहीं तो अस्पताल की ईंट से ईंट बजा देंगे। लेकिन बाद में एएसपी सुमेर सिंह ने दोनों पक्षों को शांतिपूर्वक अपनी बात करने को कहा। दोनों की बात सुनने के बाद पुलिस ने शांत करवाते हुए उन्हें डीएनए टेस्ट करवाने के लिए कहा। इस पर वे मान गए। लेकिन, साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि लड़की उसकी नहीं हुई तो फिर वो किसी कानून को नहीं  मानेगा और सभी डॉक्टरों से निपटेगा। नवजात बच्ची को गुलशन की पत्नी प्रीति ने अपना दूध पिलाकर भूख शांत की। गुलशन ने कहा कि इस सब में बच्ची का कोई कसूर नहीं है इसलिए उसे हम भूखा नहीं रख सकते। बच्ची को फिलहाल प्रीति और गुलशन ने संभाला हुआ है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को बच्ची और गुलशन दोनों के डीएनए सैंपल लिए जाएंगे।

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