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‘पिछड़ावर्ग आयोग जातिगत आंकड़ों को करें सही’
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:05 AM IST
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‘पिछड़ावर्ग आयोग जातिगत आंकड़ों को करें सही’
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सभी जातियों को लेकर सरकार द्वारा प्रस्तुत किए पिछड़ा वर्ग के आंकड़ों को लेकर पिछड़ा वर्ग ए वेल्फेयर सभा ने आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। सभा के पदाधिकारियों ने हरियाणा पिछड़ा आयोग के चेयरमैन एसएन अग्रवाल से मुलाकात की। सभा के संरक्षक जीताराम पाल, प्रदेशाध्यक्ष शमशेर कश्यप, महासचिव वीरभान जांगड़ा, संगठन सचिव सतबीर सिंह प्रजापति, प्रचार सचिव अशोक भट्ट ने चेयरमैन को सौंपे ज्ञापन में आयोग से इन पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि दर्शाए गए जातिगत सरकारी आंकड़ों से ये स्पष्ट नहीं हो रहा है कि इन आंकड़ों में विश्वविद्यालयों, निगम, बोर्ड, कॉरपोरेशन, स्थानीय निकाय, सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त स्कूल, कॉलेज और अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को इस जातिगत संख्या में शामिल किया गया है या नहीं। यदि नहीं किया गया तो ये न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आयोग से मांग की कि वे इस बात को सुनिश्चित करने की व्यवस्था करे कि जिन विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के जातिगत आंकड़े अब तक उपलब्ध नहीं हुए हैं, उन्हें शीघ्र प्राप्त करके सर्वेक्षण में शामिल किया जाए। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जाति का उल्लेख अभी तक नहीं किया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई कर आंकड़े प्राप्त किए जाएं। शमशेर कश्यप ने मांग की कि अनुबंध आधार, आउटसोर्सिंग 1-2 पॉलिसी, डीसी रेट, अतिथि अध्यापक आदि पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के जातिगत आंकड़े भी इस सर्वेक्षण में शामिल किए जाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
सभी जातियों को लेकर सरकार द्वारा प्रस्तुत किए पिछड़ा वर्ग के आंकड़ों को लेकर पिछड़ा वर्ग ए वेल्फेयर सभा ने आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। सभा के पदाधिकारियों ने हरियाणा पिछड़ा आयोग के चेयरमैन एसएन अग्रवाल से मुलाकात की। सभा के संरक्षक जीताराम पाल, प्रदेशाध्यक्ष शमशेर कश्यप, महासचिव वीरभान जांगड़ा, संगठन सचिव सतबीर सिंह प्रजापति, प्रचार सचिव अशोक भट्ट ने चेयरमैन को सौंपे ज्ञापन में आयोग से इन पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि दर्शाए गए जातिगत सरकारी आंकड़ों से ये स्पष्ट नहीं हो रहा है कि इन आंकड़ों में विश्वविद्यालयों, निगम, बोर्ड, कॉरपोरेशन, स्थानीय निकाय, सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त स्कूल, कॉलेज और अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को इस जातिगत संख्या में शामिल किया गया है या नहीं। यदि नहीं किया गया तो ये न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आयोग से मांग की कि वे इस बात को सुनिश्चित करने की व्यवस्था करे कि जिन विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के जातिगत आंकड़े अब तक उपलब्ध नहीं हुए हैं, उन्हें शीघ्र प्राप्त करके सर्वेक्षण में शामिल किया जाए। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जाति का उल्लेख अभी तक नहीं किया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई कर आंकड़े प्राप्त किए जाएं। शमशेर कश्यप ने मांग की कि अनुबंध आधार, आउटसोर्सिंग 1-2 पॉलिसी, डीसी रेट, अतिथि अध्यापक आदि पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के जातिगत आंकड़े भी इस सर्वेक्षण में शामिल किए जाएं।
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