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Jind News: जन्मजात बीमारी ने बढ़ाई चिंता, आरबीएसके ने इलाज की राह आसान की

Sun, 04 Oct 2026 02:32 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 02:32 AM IST
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Congenital condition raised concerns; RBSK paved the way for treatment.
03जेएनडी21: बच्चे के उपचार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती सीएमओ डॉ. सुमन कोहली व डॉ. दिनेश गु
जींद। बच्चे के जन्म के साथ परिवार में आई खुशियां उस समय चिंता में बदल गईं जब उसमें जन्मजात बीमारी का पता चला। बीमारी का इलाज महंगा होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने बच्चे के इलाज की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत हुई स्क्रीनिंग परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनी। जांच में बीमारी की पहचान होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चे के उपचार के लिए करीब चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई।
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बच्चे के पिता अंकित ने बताया कि बीमारी का इलाज काफी महंगा था और परिवार के लिए इसका खर्च उठाना आसान नहीं था। स्वास्थ्य विभाग से उपचार के लिए करीब चार लाख रुपये की सहायता मिलने के बाद इलाज को लेकर उनकी चिंता काफी कम हुई। उन्होंने कहा कि सरकारी मदद से बच्चे के इलाज का रास्ता आसान हुआ और परिवार में नई उम्मीद जगी।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन्मजात बीमारियों की शुरुआती स्तर पर पहचान के लिए प्रसव से जुड़े नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जन्म के समय बच्चे में दिल में छेद, कमर में फोड़ा, कटे होंठ या तालू, टेढ़े पैर, जन्मजात बहरापन, मोतियाबिंद समेत अन्य गंभीर समस्या सामने आने पर उसे आरबीएसके के माध्यम से उपचार के लिए पंजीकृत किया जाता है। विभाग का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही बच्चों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करवाना है।
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तीन बच्चों के इलाज पर 6.11 लाख खर्च
स्क्रीनिंग के दौरान जिले में तीन बच्चों को इलाज के लिए कुल 6 लाख 11 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करवाई गई। इनमें सुनने की समस्या वाले एक बच्चे के इलाज के लिए 4.20 लाख रुपये, दिल में छेद वाले बच्चे के ऑपरेशन के लिए दो लाख रुपये और आंखों के इलाज के लिए एक बच्चे को 11 हजार रुपये की सहायता दी गई।

12 टीमें कर रहीं बच्चों की जांच
डिप्टी सिविल सर्जन एवं स्कूल हेल्थ कार्यक्रम प्रभारी डॉ. दिनेश गुप्ता ने बताया कि जिले में आरबीएसके की 12 टीमें हैं। ये टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं। बीमारी मिलने पर बच्चों को नागरिक अस्पताल जींद भेजा जाता है। जरूरत के अनुसार पीजीआई चंडीगढ़, पीजीआई रोहतक और मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल में भी निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है।
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