फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   crime

आरोपियों को नहीं लाया जा सका जींद, 30 तक करना होगा सरेंडर

Fri, 18 Dec 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
ब्यूरो/अमर उजाला जींद Updated Fri, 18 Dec 2015 12:33 AM IST
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश के मेरठ में जींद प्रशासन द्वारा लिंग परीक्षण के आरोप में की गई रेड के बाद भी आरोपियों को जींद नहीं लाया जा सका है। कानूनी पेचीदगी के चलते जींद पुलिस ने आरोपियों को 30 दिसंबर तक पेश होने का समय दिया है।

विज्ञापन


मेरठ पुलिस ने भी लिखित में भरोसा दिया है कि पुलिस आरोपियों को हर हाल में पेश करेगी। ऐसे में आरोपी चिकित्सकों को अब 30 दिसंबर तक जींद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। ऐसा नहीं करने पर जींद पुलिस अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और कोर्ट के माध्यम से आरोपियों को जींद लाने का प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन


हालांकि, जींद पुलिस ने अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर अपने कब्जे में ले लिया है। मशीन की जांच अब मधुबन लैब में करवाई जाएगी। इससे भी कई प्रकार के राज खुलने की संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कानून की कमजोरी
पुलिस के अनुसार कानूनी कमजोरी के कारण आरोपियों को राहत मिली है। एसएसपी अभिषेक जोरवाल के अनुसार इस मामले में आरोपी को अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में आरोपियों को पुलिस बेल पर ही आसानी से छोड़ दिया गया है।

काले कारनामे का रिकॉर्ड जब्त
प्रशासन ने आरोपी चिकित्सक के काले कारनामों का रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी चिकित्सक की अल्ट्रासाउंड मशीन पहले भी तीन बार सील हो चुकी है, लेकिन खुल जाती है। ऐसे में रिकार्ड से प्रशासन को यह जानकारी मिल सकती है कि क्षेत्र से कितने केस वहां जाते रहे हैं।

सुमन से जुड़ती गई कड़ी
इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाने में लगी स्वास्थ्य विभाग की टीम पहले जींद शहर की ही रहने वाली एक सुमन नामक महिला के संपर्क में आई। महिला को इसकी भनक नहीं थी कि जो लोग लिंग परीक्षण के लिए बातचीत कर रहे हैं, वे स्वास्थ्य विभाग के हैं। ऐसे में महिला पहले शामली में एक और व्यक्ति के पास इन लोगों को ले गई। इसके बाद सभी लोग उत्तर प्रदेश के बुडाला गए और यहां से इन लोगों को विश्वास होने के बाद मेरठ के बच्चा पार्क स्थित गर्ग अल्ट्रासाउंड क्लीनिक पर गए।

उत्तर प्रदेश पुलिस से नहीं मिला सहयोग
रेड के लिए मेरठ गई जींद प्रशासन की टीम के अनुसार, पूरे मामले में यूपी पुलिस से सहयोग नहीं मिला। यही कारण है कि आरोपियों को जींद नहीं लाया जा सका। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मेरठ की सिविल लाइन थाना पुलिस ने छापामार टीम को रोकने के लिए शहर में नाकेबंदी तक करवाई। यूपी पुलिस के व्यवहार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां के पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन चौकी पहुंचे और टीम के सदस्यों से उनकी कानूनी हैसियत पूछने लगे।

यूं बनी रणनीति
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ के अनुसार सूचना मिली थी कि जींद की एक महिला महिलाओं को लिंग परीक्षण के लिए यूपी ले जाती है। इस पर स्वास्थ्य विभाग की एक कर्मचारी को गर्भवती बनाकर संबंधित महिला के पास भेजा गया। पहले महिला को शामली ले जाकर यहां अहसान नामक व्यक्ति से मिलवाया गया। अहसान ने गर्भवती महिला को मेरठ निवासी दूसरे फैजल से पहचान करवाई। ल महिला को डॉ. परिणिति के पास ले गया। डॉ. परिणिति ने गर्ग अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक डॉक्टर विनोद गर्ग से बातचीत की। छह हजार रुपये में सौदा तय होने के बाद गर्भवती महिला को डॉ. विनोद गर्ग के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ले जाया गया। राशि कर्मचारियों को सौंपने के बाद डॉ. विनोद गर्ग की पत्नी डॉ. सरिता गर्ग ने गर्भ में शिशु के लिंग परीक्षण का जिम्मा लिया। सिविल सर्जन के अनुसार जिस समय लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था, टीम ने छापा मारकर डॉक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।


महिला को सरकारी गवाह बनाने की तैयारी
इस मामले में जींद प्रशासन अब दलाल महिला को सरकारी गवाह बनाने की योजना तैयार कर रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि जींद शहर की सुमन नामक महिला ही भ्रूण लिंग जांच मामले में राज खोल सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed